Bihar News : बिहार में सरकारी कामकाज को लेकर मुख्य सचिव ने वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है। अब अगर कोई बड़ा अधिकारी किसी महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हो सकता है, तो उसे आखिरी समय में अनुपस्थिति की सूचना देने के बजाय कम से कम सात दिन पहले इसकी जानकारी देनी होगी। बैठक में अधिकारियों की गैरमौजूदगी और प्रशासनिक समन्वय को लेकर जारी इस हिदायत को सरकारी कामकाज में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
दरअसल, शासन-प्रशासन में कई ऐसे फैसले होते हैं, जिनके लिए अलग-अलग विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों का एक साथ बैठना जरूरी होता है। विभागीय योजनाओं की समीक्षा, विकास कार्यों की प्रगति, नीतिगत निर्णय और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल जैसे मुद्दों पर होने वाली बैठकों में संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी काफी मायने रखती है। ऐसे में यदि कोई महत्वपूर्ण अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचता है, तो कई बार चर्चा अधूरी रह जाती है और जरूरी निर्णय लेने में देरी हो सकती है।
मुख्य सचिव की ओर से दी गई हिदायत का उद्देश्य इसी तरह की परिस्थितियों से बचना और सरकारी बैठकों को अधिक प्रभावी बनाना है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यदि किसी अपरिहार्य कारण से वे बैठक में शामिल नहीं हो सकते हैं, तो इसकी जानकारी पहले से उपलब्ध कराई जाए। सात दिन पहले सूचना देने की व्यवस्था से संबंधित विभागों को भी अपनी तैयारी करने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का समय मिल सकेगा।
बिहार में प्रशासनिक स्तर पर मुख्य सचिव की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। राज्य के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने से लेकर सरकारी योजनाओं की निगरानी और महत्वपूर्ण निर्णयों को लागू कराने तक, मुख्य सचिव की जिम्मेदारी व्यापक होती है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकों में नियमित उपस्थिति प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए जरूरी मानी जाती है।
सरकारी बैठकों का मकसद सिर्फ अधिकारियों को एक जगह जुटाना नहीं, बल्कि समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान निकालना भी होता है। जब किसी विभाग का जिम्मेदार अधिकारी बैठक में मौजूद नहीं रहता, तो उससे जुड़े सवालों का तत्काल जवाब मिलना मुश्किल हो सकता है। कई मामलों में फाइलों पर निर्णय अटक सकते हैं और दूसरे विभागों को भी आगे की कार्रवाई के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। इस वजह से बैठक में शामिल होने या अनुपस्थित रहने की सूचना समय पर देना प्रशासनिक अनुशासन का अहम हिस्सा बन जाता है।
मुख्य सचिव की इस हिदायत के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी बैठकों और विभागीय जिम्मेदारियों के बीच बेहतर तालमेल बनाना होगा। पहले से तय कार्यक्रम, विभागीय समीक्षा और अन्य जरूरी कामों को ध्यान में रखते हुए बैठक में भागीदारी सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता में शामिल रहेगा। यदि किसी अधिकारी के सामने ऐसी परिस्थिति आती है, जिसमें बैठक में पहुंचना संभव नहीं है, तो समय रहते इसकी जानकारी देना जरूरी होगा।
इस निर्देश का व्यापक उद्देश्य सरकारी कामकाज में अनावश्यक देरी को रोकना, विभागों के बीच बेहतर समन्वय कायम करना और निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस हिदायत का कितना पालन करते हैं और इसका असर बिहार के प्रशासनिक कामकाज की गति पर किस तरह दिखाई देता है।





