Bihar Aadhaar Card : बिहार के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब आधार कार्ड बनवाने या उसमें अपडेट कराने के लिए उन्हें प्रखंड मुख्यालय या दूर-दराज के साइबर कैफे का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। राज्य की सभी 8053 पंचायतों के पंचायत सरकार भवन में जल्द ही आधार सेवा केंद्र शुरू किए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही इन केंद्रों पर आधार के अलावा सरकारी योजनाओं और रोजमर्रा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाओं का लाभ भी एक ही जगह मिल सकेगा।
पंचायती राज विभाग ने इस दिशा में तैयारी तेज कर दी है। आधार सेवा केंद्रों के संचालन के लिए विभाग और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के बीच जल्द करार होने की संभावना है। इसके लिए समझौते का मसौदा तैयार किया जा रहा है। करार होते ही पंचायत स्तर पर लोगों को डिजिटल और नागरिक सेवाओं का बड़ा नेटवर्क उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
आधार के लिए गांव से बाहर जाने की जरूरत नहीं
अभी गांव के लोगों को नया आधार बनवाने, आधार में मोबाइल नंबर या अन्य जानकारी अपडेट कराने के लिए कई बार प्रखंड मुख्यालय या अधिकृत केंद्रों तक जाना पड़ता है। दूरी, समय और आने-जाने के खर्च के कारण खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को परेशानी होती है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायत सरकार भवन ही कई जरूरी सरकारी सेवाओं का स्थानीय केंद्र बन जाएगा। यहां नया आधार बनाने से लेकर आधार अपडेट तक की सुविधा उपलब्ध होगी। नए आधार के लिए निर्धारित शुल्क 75 रुपये बताया गया है। अन्य आधार सेवाओं के लिए भी तय शुल्क ही लिया जाएगा। अगर कोई कर्मचारी निर्धारित शुल्क से ज्यादा पैसे मांगता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सिर्फ आधार नहीं, 64 सेवाओं का मिलेगा फायदा
पंचायत सरकार भवन में प्रस्तावित कॉमन सर्विस सेंटर केवल आधार कार्ड तक सीमित नहीं रहेगा। यहां करीब 64 तरह की नागरिक सुविधाओं को आसान बनाने की तैयारी है। जाति, आय और आवास प्रमाण पत्र से लेकर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन तक की सुविधा लोगों को मिल सकेगी।इसके अलावा कृषि, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, परिवहन, योजना एवं विकास, राजस्व एवं भूमि सुधार, शिक्षा और समाज कल्याण विभाग से जुड़ी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।पेंशन से जुड़े काम, छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, राशन कार्ड से संबंधित आवेदन, राशन कार्ड में नाम जोड़ना या हटाना और राशन कार्ड अपडेट कराने जैसी सुविधाएं भी इन केंद्रों पर मिल सकेंगी।
जमीन के कागजात से जुड़े काम भी होंगे आसान
ग्रामीण इलाकों में जमीन से जुड़े काम के लिए लोगों को अक्सर प्रखंड और अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रस्तावित केंद्रों के जरिए इस परेशानी को भी कम करने की कोशिश होगी। दाखिल-खारिज के लिए आवेदन, एलपीसी, ऑनलाइन जमाबंदी देखना और उसका प्रिंट निकालना तथा ऑनलाइन लगान भुगतान जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे जमीन संबंधी कई छोटे-छोटे कामों के लिए लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालय जाने की जरूरत कम हो सकती है। परिवहन से जुड़ी सेवाओं में डुप्लीकेट आरसी, फिटनेस नवीनीकरण आदि की सुविधा भी शामिल होगी। वहीं माप-तौल उपकरणों की बिक्री के लिए लाइसेंस जैसी सेवाओं के आवेदन की सुविधा भी केंद्र पर उपलब्ध कराने की तैयारी है।
कौन चलाएगा आधार सेवा केंद्र?
प्रस्तावित व्यवस्था में पंचायती राज विभाग और CSC की भूमिका तय की गई है। विभाग कंप्यूटर और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराएगा, जबकि कॉमन सर्विस सेंटर के कर्मी केंद्रों का संचालन करेंगे। इन कर्मियों का मानदेय और अन्य भुगतान CSC की ओर से किया जाएगा। इन कर्मचारियों को पंचायती राज विभाग का कर्मचारी नहीं माना जाएगा और वे विभाग के कर्मचारी के रूप में किसी तरह का दावा नहीं कर सकेंगे। आधार सेवा केंद्र के संचालन के लिए CSC को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) से जरूरी लाइसेंस मिलेगा। इसके लिए केंद्र से अनुमति लिए जाने की बात भी सामने आई है।
कमाई का भी तय होगा फार्मूला
केंद्रों से होने वाली आमदनी को लेकर भी व्यवस्था तय की जा रही है। प्रस्तावित फार्मूले के अनुसार आधार और दूसरी शुल्क वाली सेवाओं से प्राप्त राशि में 80 प्रतिशत हिस्सा CSC को मिलेगा, जबकि 20 प्रतिशत राशि पंचायती राज विभाग को दी जाएगी।
कुछ सेवाओं के लिए निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट से जुड़ी सेवाओं के साथ बिजली, पानी और अन्य यूटिलिटी बिलों के भुगतान पर शुल्क लगेगा। बैंकिंग और बीमा सेवाओं, लोन, माइक्रो क्रेडिट, रेल, बस और हवाई टिकट की बुकिंग जैसी सेवाओं के लिए भी निर्धारित शुल्क लिया जा सकता है।
21 सेवाओं के लिए नहीं देना होगा पैसा
सरकार की योजना सिर्फ शुल्क वाली सेवाएं उपलब्ध कराने की नहीं है। प्रस्तावित व्यवस्था में 21 तरह की नागरिक सेवाओं के लिए लोगों से कोई राशि नहीं ली जाएगी। जाति प्रमाण पत्र, आवास प्रमाण पत्र तथा जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं इसके दायरे में बताई गई हैं।यानी एक तरफ आधार और अन्य डिजिटल सेवाओं के लिए पंचायत स्तर पर सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ कई सरकारी प्रमाण पत्रों और योजनाओं के आवेदन के लिए भी ग्रामीणों को सहूलियत होगी।
पंचायत सरकार भवन बनेगा गांव का 'वन स्टॉप सेंटर'
अगर यह व्यवस्था तय योजना के अनुसार लागू होती है तो पंचायत सरकार भवन सिर्फ सरकारी बैठकों या पंचायत संबंधी कामकाज की जगह नहीं रहेगा। यह ग्रामीणों के लिए एक तरह का 'वन स्टॉप सर्विस सेंटर' बन सकता है, जहां आधार से लेकर राशन कार्ड, पेंशन, प्रमाण पत्र, जमीन के रिकॉर्ड और टिकट बुकिंग तक कई काम एक ही जगह कराए जा सकेंगे।
सबसे बड़ा फायदा उन ग्रामीण परिवारों को होगा जिन्हें छोटी-छोटी सरकारी सेवाओं के लिए प्रखंड और जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता है। अब गांव के पंचायत सरकार भवन तक ही कई काम पहुंचाने की तैयारी है। सभी 8053 पंचायतों में केंद्र शुरू होने के बाद यह व्यवस्था बिहार के ग्रामीण इलाकों में डिजिटल और नागरिक सेवाओं की पहुंच को काफी आसान बना सकती है।





