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Bihar News: बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली के बाद भी बिल में माइनस! ऐप में दिख रहे ₹400-500, जानिए क्या है मामला

बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली के बावजूद मुजफ्फरपुर के उपभोक्ता परेशान हैं। सुविधा बिहार ऐप में हर महीने 400-500 रुपये माइनस दिखने और बिलिंग की तकनीकी खामियों की पूरी जानकारी पढ़ें।

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Tejpratap
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Bihar News : बिहार में 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलने की सुविधा के बीच उपभोक्ताओं की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ सरकार की ओर से मुफ्त बिजली का लाभ दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ बिजली बिलिंग से जुड़े सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियां लोगों को उलझन में डाल रही हैं। मुजफ्फरपुर में कई उपभोक्ताओं की शिकायत है कि बिजली बिल में हर महीने 400 से 500 रुपये तक की राशि माइनस में दिखाई दे रही है। ऐसे में लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मुफ्त बिजली का वास्तविक लाभ उन्हें किस तरह मिल रहा है और बिल में माइनस राशि दिखने का मतलब क्या है?


मुजफ्फरपुर में बिजली बिलिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 'सुविधा बिहार' ऐप में आ रही तकनीकी दिक्कतों ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि ऐप पर बिजली खपत, मुफ्त बिजली की छूट और डिफरमेंट चार्ज का हिसाब स्पष्ट रूप से समझ में नहीं आ रहा है। इसके कारण उपभोक्ताओं को अपने बिजली बिल का पूरा गणित समझने के लिए बिजली कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।


इस समस्या को लेकर मिस्काट निवासी अजय झा ने अपनी परेशानी साझा की है। उनका कहना है कि पहले उनके घर में बिजली की खपत 125 यूनिट से कम रहती थी। ऐसे में ऐप पर बिजली बिल शून्य दिखाई देता था और मुफ्त बिजली योजना का लाभ आसानी से समझ में आ जाता था। लेकिन पिछले करीब तीन महीनों से स्थिति बदल गई है। अब ऐप पर बिजली खपत और बिलिंग का हिसाब पहले की तरह स्पष्ट नहीं दिख रहा है।


उपभोक्ता के मुताबिक, टाइम ऑफ डे (TOD) सिस्टम लागू होने के बाद ऐप पर घर का लोड अचानक बढ़ा हुआ दिखाई देने लगा है। इसके साथ ही 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ किस तरह समायोजित किया जा रहा है, यह भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। इससे उपभोक्ताओं के मन में बिलिंग व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।


सबसे ज्यादा परेशानी तब हो रही है, जब बिजली विभाग की ओर से खाते में 125 यूनिट का वर्चुअल क्रेडिट दिए जाने की बात कही जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इस क्रेडिट के बावजूद ऐप पर हर महीने 400 से 500 रुपये तक की राशि माइनस में दिखाई दे रही है। ऐसे में उन्हें यह समझने में दिक्कत हो रही है कि उनके खाते में वास्तव में कितनी छूट मिली है और बिजली बिल का अंतिम हिसाब क्या है।


बिल में माइनस राशि दिखने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि उपभोक्ता को उतनी रकम जमा करनी है। यह क्रेडिट या समायोजन से जुड़ी राशि भी हो सकती है। हालांकि, संबंधित उपभोक्ताओं के मामले में इसका सटीक कारण क्या है, यह बिलिंग रिकॉर्ड और विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


बताया जा रहा है कि बिजली विभाग ने इस समस्या को समझने और समाधान तलाशने के लिए उपभोक्ताओं से फीडबैक भी लिया है। मुजफ्फरपुर के विभिन्न बिजली डिवीजनों के अलावा मोतिहारी समेत अन्य जिलों में भी अधिकारियों ने उपभोक्ताओं के घर पहुंचकर सुविधा बिहार सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं की जानकारी जुटाई थी।


इसके बावजूद उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। लोगों की मांग है कि बिजली बिलिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि मुफ्त बिजली की छूट, वास्तविक खपत और अन्य शुल्कों का पूरा विवरण ऐप पर साफ-साफ दिखाई दे।


बिहार में 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए अब सबसे जरूरी सवाल यही है कि ऐप पर दिख रहे आंकड़ों का सही अर्थ क्या है। जब तक सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों को दूर कर बिलिंग का हिसाब स्पष्ट नहीं किया जाता, तब तक उपभोक्ताओं की यह उलझन बनी रह सकती है।