आरा: बिहार के भोजपुर जिले में वन विभाग की एक कार्रवाई ने नई चर्चा छेड़ दी है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में वन विभाग की टीम ने छापेमारी कर एक जीवित हिरण बरामद करने का दावा किया है। यह कार्रवाई गांव निवासी सरोज त्रिपाठी और पंकज त्रिपाठी के घर पर की गई। दोनों भाई हाल के महीनों में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं।
वन विभाग की टीम ने शनिवार को बिलौटी गांव पहुंचकर छापेमारी की। विभाग के अनुसार, तलाशी के दौरान सरोज त्रिपाठी के घर से एक जीवित हिरण मिला, जिसे तत्काल अपने कब्जे में ले लिया गया। बरामद वन्यजीव को सुरक्षित स्थान पर भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
शाहपुर थाना में पूरी हुई कागजी कार्रवाई
छापेमारी के बाद वन विभाग के अधिकारी हिरण को लेकर शाहपुर थाना पहुंचे, जहां जब्ती की औपचारिक प्रक्रिया और आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की गई। विभागीय अधिकारियों ने फिलहाल बरामदगी की पुष्टि की है, लेकिन मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
सूत्रों के अनुसार, वन विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है कि हिरण वहां कैसे पहुंचा और उसे कितने समय से रखा गया था। यदि जांच में वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले से जुड़े रहे हैं दोनों भाई
बिलौटी गांव वही गांव है, जहां के रहने वाले भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर ने पूरे बिहार में राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया था। 17 जून को हुई इस घटना के बाद सरोज त्रिपाठी और पंकज त्रिपाठी उन स्थानीय लोगों में शामिल रहे, जिन्होंने लगातार निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग उठाई।
मामले के बढ़ते विवाद को देखते हुए बिहार सरकार ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। जांच आयोग पहले ही बिलौटी गांव पहुंचकर भरत तिवारी के परिजनों, ग्रामीणों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर चुका है।
क्या दोनों मामलों का कोई संबंध है?
वन विभाग की कार्रवाई के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, अब तक किसी भी सरकारी एजेंसी ने इस छापेमारी को भरत तिवारी एनकाउंटर मामले या उसकी न्यायिक जांच से जोड़कर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। वन विभाग का कहना है कि कार्रवाई केवल वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत प्राप्त सूचना के आधार पर की गई है। विभाग फिलहाल बरामद हिरण और उससे जुड़े तथ्यों की जांच में जुटा है।
दोनों भाइयों की ओर से नहीं आया बयान
समाचार लिखे जाने तक सरोज त्रिपाठी और पंकज त्रिपाठी की ओर से इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि वे वन विभाग के दावों पर क्या पक्ष रखते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और सभी पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही निकाला जाना चाहिए। फिलहाल यह मामला वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत दर्ज प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रहा है।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
अब सबकी निगाहें वन विभाग की विस्तृत रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं। यदि जांच में किसी प्रकार के नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि जांच में कोई नया तथ्य सामने आता है तो उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।





