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Bihar News: भोजपुर एनकाउंटर केस: भरत भूषण तिवारी की मौत के 7 दिन बाद बड़ी कार्रवाई, SDPO और SHO समेत पुलिसकर्मियों पर हत्या की FIR दर्ज; जानें किन धाराओं में हुआ मामला

भोजपुर एनकाउंटर केस में 7 दिन बाद बड़ा एक्शन! भरत भूषण तिवारी की मां के आवेदन पर SDPO, SHO समेत पुलिसकर्मियों पर हत्या की FIR दर्ज... जानिए किन धाराओं में हुआ मुकदमा।

Bharat bhushan tiwari
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© File photo
Tejpratap
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Bihar News: भोजपुर जिले के बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में घटना के सातवें दिन बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भरत भूषण तिवारी की मां की ओर से दिए गए आवेदन के आधार पर पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है। अब लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आरोपी पुलिसकर्मियों पर किन कानूनी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है और इन धाराओं का मतलब क्या है?


पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), धारा 3(8) और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस केस की जांच की जिम्मेदारी आरा सर्किल इंस्पेक्टर संजीव कुमार को सौंपी गई है। जांच अधिकारी अब पूरे मामले में घटनास्थल, पुलिस कार्रवाई, हथियारों के इस्तेमाल और अन्य सभी पहलुओं की जांच करेंगे।


BNS की धारा 103(1) में दर्ज हुआ हत्या का मामला


भरत भूषण तिवारी मामले में सबसे महत्वपूर्ण धारा BNS 103(1) है। यह धारा हत्या से संबंधित है। अगर किसी व्यक्ति की जानबूझकर हत्या करने का आरोप लगाया जाता है तो इस धारा के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इसमें आरोपी के खिलाफ हत्या के आरोप की जांच की जाती है और दोष साबित होने पर कानून के अनुसार सजा का प्रावधान है।


इस मामले में मृतक की मां के आवेदन के आधार पर पुलिसकर्मियों पर हत्या का आरोप लगाया गया है। अब जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि घटना किस परिस्थिति में हुई, पुलिस की कार्रवाई नियमों के अनुसार थी या नहीं और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।


BNS की धारा 3(8) क्या बताती है?

मामले में BNS की धारा 3(8) भी लगाई गई है। यह धारा किसी अपराध में शामिल व्यक्तियों की सामूहिक जिम्मेदारी से जुड़ी होती है। अगर एक से ज्यादा लोग किसी अपराध को अंजाम देने में शामिल पाए जाते हैं या किसी आपराधिक कृत्य में उनकी भूमिका सामने आती है तो यह धारा लगाई जा सकती है।


इस धारा के तहत जांच में यह पता लगाया जाता है कि घटना के दौरान किस-किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी और क्या सभी आरोपी किसी साझा उद्देश्य के तहत कार्रवाई में शामिल थे।


आर्म्स एक्ट की धारा 27 भी जोड़ी गई

एफआईआर में आर्म्स एक्ट की धारा 27 भी शामिल की गई है। यह धारा हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े अपराधों पर लागू होती है। अगर हथियार का इस्तेमाल किसी अपराध को अंजाम देने में किया जाता है तो इस धारा के तहत कार्रवाई की जा सकती है।


भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में हथियारों के इस्तेमाल और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया की भी जांच की जाएगी। जांच एजेंसी यह देखेगी कि इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोलीबारी की स्थिति क्या थी।


अब जांच पर टिकी निगाहें

एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पूरे मामले की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। जांच अधिकारी घटनास्थल की जांच, गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस रिकॉर्ड समेत कई बिंदुओं की पड़ताल करेंगे।


बताया जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि घटना वास्तव में किस परिस्थिति में हुई थी। फिलहाल एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस विभाग के संबंधित अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं।


भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब कानूनी जांच के दायरे में पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और सामने आने वाले तथ्यों पर सभी की नजरें रहेंगी।