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Bihar News : भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा एक्शन: नामजद SDPO राजेश शर्मा लाइन हाजिर, बढ़ीं मुश्किलें

भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। एसडीपीओ राजेश शर्मा को लाइन हाजिर कर दिया गया है। मामले में न्यायिक जांच और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई जारी है।

Bihar News : भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा एक्शन: नामजद SDPO राजेश शर्मा लाइन हाजिर, बढ़ीं मुश्किलें
Tejpratap
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Bihar News : भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया है। मामले में लगातार उठ रहे सवालों और दर्ज प्राथमिकी के बाद बिहार सरकार ने जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को लाइन हाजिर कर दिया है। उन्हें पुलिस मुख्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया गया है।


पुलिस मुख्यालय से जारी आदेश के अनुसार जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के पद पर जल्द ही नए अधिकारी की तैनाती की जाएगी। इस कार्रवाई को भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बढ़ते दबाव और निष्पक्ष जांच की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


दरअसल, भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने इस मामले में जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष एवं निलंबित इंस्पेक्टर राजेश मालाकार को नामजद अभियुक्त बनाया है। दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर भरत तिवारी को गोली मारी गई।


घटना के छह दिन बाद 22 जून 2026 को दर्ज कांड संख्या 178/26 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1)(5) के साथ-साथ आर्म्स एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं। एफआईआर में कुछ अन्य पुलिसकर्मियों को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि एसडीपीओ के आदेश पर भरत तिवारी को पांच गोलियां मारी गई थीं।


पुलिस विभाग में किसी अधिकारी को लाइन हाजिर किया जाना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई मानी जाती है। इसके तहत संबंधित अधिकारी को उसके वर्तमान पद से हटाकर पुलिस लाइन या मुख्यालय से संबद्ध कर दिया जाता है। इस अवधि के दौरान वह किसी थाने के संचालन, अनुसंधान या अन्य क्षेत्रीय कार्यों में भाग नहीं ले सकता। उसे वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्य करना पड़ता है।


इस पूरे मामले में आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मी जवइनिया कटाव पीड़ितों की समस्या की जानकारी लेने के बहाने भरत भूषण तिवारी को अपने साथ ले गए थे। बाद में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर संजीव कुमार को सौंपी गई है।


इधर, मामले ने तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार ने घटना की न्यायिक जांच कराने का भी फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया जाएगा।अब तक इस मामले में पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। वहीं एसडीपीओ को लाइन हाजिर किए जाने के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल तेज हो गई है।


गौरतलब है कि 17 जून की सुबह एसटीएफ और शाहपुर पुलिस की संयुक्त टीम भरत भूषण तिवारी को गिरफ्तार करने के लिए बिलौटी गांव पहुंची थी। पुलिस का दावा था कि भरत पर कई आपराधिक मामले दर्ज थे और वह फरार चल रहा था। घटना के दौरान भरत तिवारी पुलिस को देखकर भाग गया था। पुलिस के अनुसार उसने फायरिंग भी की थी। इसके बाद वह हाथ में हथियार लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लाइव आया और पुलिस को चुनौती देता दिखाई दिया।


हालांकि, वायरल वीडियो में वह बाद में आत्मसमर्पण करते हुए और हथियार छोड़ते हुए भी नजर आया। इसके कुछ समय बाद फेसबुक लाइव बंद हो गया। इसके बाद हुई कार्रवाई और एनकाउंटर को लेकर कई सवाल उठने लगे। अब न्यायिक जांच, नामजद प्राथमिकी और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद इस मामले की जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है।