Bihar News : भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पुलिस मुठभेड़ सही थी या गलत, इसका अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल इस घटना ने पूरे इलाके में बहस छेड़ दी है। एक ओर पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है तो दूसरी ओर भरत तिवारी के परिजन और समर्थक इस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
बिलौटी गांव के आसपास बसे जवइनिया कटाव पीड़ित परिवारों, खासकर महिलाओं के बीच भरत भूषण तिवारी की अलग पहचान थी। कटाव प्रभावित महिलाओं का कहना है कि भरत उनके लिए किसी भगवान से कम नहीं था। महिलाओं के अनुसार वह रोज उनके बीच पहुंचता था, उनकी समस्याएं सुनता था और अधिकारियों तक उनकी आवाज पहुंचाने का काम करता था।
महिलाओं ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि बिजली, पानी, सड़क और बच्चों की पढ़ाई जैसे मुद्दों को लेकर भरत हमेशा सक्रिय रहता था। उनका कहना है कि वह उनकी समस्याओं का वीडियो बनाकर प्रशासनिक अधिकारियों को भेजता था और लगातार समाधान की मांग करता था। यही वजह थी कि इलाके की कई महिलाएं उसे अपना मसीहा मानने लगी थीं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ महिलाओं ने दावा किया कि भरत भूषण तिवारी ने अपनी सुरक्षा के लिए महावीरी लॉकेट बेचकर हथियार खरीदा था। महिलाओं का आरोप है कि 17 जून को हुई घटना के दौरान उन्हें वहां से हटा दिया गया और उसके बाद भरत तिवारी का एनकाउंटर कर दिया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
भरत तिवारी सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय बताया जाता था। वह कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह क्षेत्र की समस्याओं को लेकर खुलकर अपनी बात रखता था और सोशल मीडिया के माध्यम से अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करता था।
सामाजिक कार्यों में उसकी भागीदारी को लेकर भी कई चर्चाएं सामने आई हैं। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान भरत भूषण तिवारी ने वैक्सीन परीक्षण के लिए अपना शरीर दान करने की इच्छा जताई थी। उसने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि यदि कोरोना वैक्सीन के परीक्षण के लिए उसकी आवश्यकता पड़े तो वह इसके लिए तैयार है। उस समय उसका यह कदम भी काफी चर्चा में रहा था।
भरत तिवारी की मौत के बाद उसके परिवार में भारी आक्रोश है। परिजनों का आरोप है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और घटना की सच्चाई सामने आनी चाहिए। दूसरी ओर इलाके के लोग भी इस मामले की पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस मुठभेड़ को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यह कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप थी या फिर कहीं कोई चूक हुई, इसका जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेगा। लेकिन इतना जरूर है कि भरत भूषण तिवारी की मौत ने भोजपुर के बिलौटी गांव और आसपास के कटाव प्रभावित इलाकों में गहरा असर छोड़ा है। जिन लोगों के बीच वह सक्रिय रहता था, वे आज भी उसे एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद कर रहे हैं जिसने उनकी समस्याओं को अपनी लड़ाई बना लिया था।





