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सरकारी आदेश न मानना पड़ा भारी! बिहार में 45 शिक्षकों का कटेगा वेतन

Bihar News: बिहार में इंटर और मैट्रिक उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन के दौरान 45 शिक्षक निर्धारित मूल्यांकन केंद्र पर अनुपस्थित रहे। उनके स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने के बाद जिला शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों के वेतन में कटौती का निर्णय लिया।

सरकारी आदेश न मानना पड़ा भारी! बिहार में 45 शिक्षकों का कटेगा वेतन
Tejpratap
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4 मिनट

बिहार में इंटर और मैट्रिक उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन के दौरान 45 शिक्षकों की अनुपस्थिति ने हड़कंप मचा दिया है। जिला शिक्षा विभाग ने उनके स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाया है, जिसके बाद इन शिक्षकों के वेतन में कटौती करने का फैसला लिया गया है। जानकारी के अनुसार, इन शिक्षकों की ड्यूटी इंटर और मैट्रिक की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए लगाई गई थी, लेकिन वे निर्धारित तिथि पर अपने मूल्यांकन केंद्र पर मौजूद नहीं हुए।


मूल्यांकन कार्य में अनुपस्थित रहने के बावजूद स्पष्टीकरण देने के बाद भी 45 शिक्षकों की परेशानी कम नहीं हुई है। जिला शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया है, इसलिए उनके वेतन में कटौती की कार्रवाई की जाएगी।


दरअसल, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से चल रहे इंटर और मैट्रिक उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन कार्य के लिए भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड के 45 शिक्षकों की ड्यूटी सीएमएस स्कूल स्थित मूल्यांकन केंद्र पर लगाई गई थी। इस संबंध में विभाग ने पहले ही ड्यूटी चार्ट जारी कर दिया था। लेकिन निर्धारित तिथि पर शिक्षक मूल्यांकन केंद्र पर उपस्थित नहीं हुए। यह मामला तब उजागर हुआ जब मूल्यांकन केंद्र के केंद्राधीक्षक ने अनुपस्थित शिक्षकों की सूची डीपीओ माध्यमिक शिक्षा कार्यालय को भेजी। इसके बाद विभाग ने सभी शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा।


स्पष्टीकरण में अधिकांश शिक्षकों का कहना था कि उन्हें ड्यूटी से संबंधित पत्र प्राप्त ही नहीं हुआ था, इसलिए वे मूल्यांकन केंद्र पर योगदान नहीं दे सके। हालांकि, विभाग ने सभी स्पष्टीकरणों की समीक्षा की तो पाया कि ज्यादातर उत्तर लगभग एक जैसे थे। अधिकांश शिक्षकों ने लिखा कि उन्हें स्पष्टीकरण पत्र रात 11:24 बजे मिला और इसके बाद उन्होंने जवाब भेजा।


विभागीय सूत्रों का कहना है कि मूल्यांकन से संबंधित पत्र विद्यालय परीक्षा समिति के पोर्टल पर भी उपलब्ध होते हैं, साथ ही जिला स्तर से इसे प्रधानाध्यापक तक भेजने की प्रक्रिया भी पूरी की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया मूल्यांकन शुरू होने से एक सप्ताह पहले ही संपन्न कर दी जाती है। बावजूद इसके, शिक्षक ड्यूटी पर अनुपस्थित रहे, लेकिन जैसे ही स्पष्टीकरण पत्र जारी हुआ, सभी को तुरंत संदेश प्राप्त हो गया।


डीपीओ माध्यमिक शिक्षा ने बताया कि एक ही प्रखंड के इतने अधिक शिक्षकों का मूल्यांकन केंद्र पर अनुपस्थित रहना गंभीर मामला है। इससे मूल्यांकन कार्य प्रभावित हुआ और पूरे केंद्र की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ा। स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने के कारण विभाग ने अब इन 45 शिक्षकों के वेतन में कटौती की कार्रवाई शुरू कर दी है।


विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह जांच की जाएगी कि आखिर किस स्तर पर चूक हुई। शिक्षकों तक ड्यूटी का पत्र क्यों नहीं पहुंचा और प्रशासनिक प्रक्रिया में कहीं कोई त्रुटि हुई तो इसकी भी जिम्मेदारी तय की जाएगी।


शिक्षक संगठन और स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इस तरह के मामलों से न केवल मूल्यांकन कार्य प्रभावित होता है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में भी सवाल खड़े करता है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों के तहत अनुपस्थिति और असंतोषजनक स्पष्टीकरण देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।