बेतिया: करोड़ों रुपये की लागत से बने अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया। लेकिन बेतिया जीएमसीएच से सामने आए एक वीडियो ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में एक मां अपनी 11 वर्षीय बीमार बच्ची को गोद में उठाकर अस्पताल परिसर में घूमती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि बच्ची को ले जाने के लिए उन्हें स्ट्रेचर नसीब नहीं हुआ।
वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि जब करीब 850 करोड़ रुपये की लागत से तैयार अस्पताल में एक बीमार बच्ची के लिए स्ट्रेचर जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी, तो अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे कितने कारगर हैं?
बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंची थी मां
जानकारी के अनुसार, चनपटिया थाना क्षेत्र के महना गांव निवासी नजीर अंसारी की 11 वर्षीय बेटी सयाना खातून की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उसे इलाज के लिए बेतिया जीएमसीएच लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने के बाद बच्ची को ले जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला। इसके बाद उसकी मां ने बच्ची को गोद में उठा लिया और अस्पताल परिसर में इधर-उधर घूमती नजर आई। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालाकि वायरल इस वीडियो की पुष्टि फर्स्ट बिहार नहीं करता है.
अस्पताल अधीक्षक ने जांच की बात कही
वायरल वीडियो को लेकर जीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक अनिल कुमार ने वीडियो देखे जाने की बात कही है। उन्होंने कर्मचारियों की कमी को ऐसी स्थिति की एक संभावित वजह बताया और मामले की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हालांकि, यह सवाल भी उठ रहा है कि कर्मचारियों की कमी कब तक मरीजों की परेशानी की वजह बनी रहेगी। अस्पताल में स्ट्रेचर जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। ऐसे में इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
फिलहाल वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, अस्पताल अधीक्षक ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच और कार्रवाई की बात कही है। अब देखना होगा कि जांच के बाद सिर्फ जिम्मेदारी तय की जाती है या अस्पताल में ऐसी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाती है कि भविष्य में किसी मरीज या उसके परिजन को स्ट्रेचर जैसी बुनियादी सुविधा के लिए परेशान न होना पड़े। सवाल सिर्फ एक स्ट्रेचर का नहीं, बल्कि उस स्वास्थ्य व्यवस्था का है जिसमें करोड़ों रुपये की लागत से बनी इमारत के बावजूद एक बीमार बच्ची को उसकी मां को गोद में उठाकर ले जाना पड़ा।
बेतिया से संतोष कुमार सिंह की रिपोर्ट






