ब्रेकिंग
बिहार में बाढ़ के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दान किया एक महीने का वेतन, राहत कोष में दिए 2.70 लाखबोर्ड पर लिखा था मसाज पार्लर, अंदर चल रहा था गंदा खेल, पुलिस ने मारा छापा... संचालिका समेत 6 महिलाएं हिरासत मेंअनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद के बीच नीतीश-ललन सिंह की मुलाकात, JDU में हलचल तेजगया सिविल कोर्ट के पास अधिवक्ताओं ने सड़क जाम कर किया विरोध-प्रदर्शन, पुलिस पर लगाया गंभीर आरोपकमला नदी में प्लास्टिक से लिपटा मिला अधेड़ का शव, हाथ-पैर बंधे होने की आशंका; पहचान में जुटी पुलिसबिहार में बाढ़ के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दान किया एक महीने का वेतन, राहत कोष में दिए 2.70 लाखबोर्ड पर लिखा था मसाज पार्लर, अंदर चल रहा था गंदा खेल, पुलिस ने मारा छापा... संचालिका समेत 6 महिलाएं हिरासत मेंअनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद के बीच नीतीश-ललन सिंह की मुलाकात, JDU में हलचल तेजगया सिविल कोर्ट के पास अधिवक्ताओं ने सड़क जाम कर किया विरोध-प्रदर्शन, पुलिस पर लगाया गंभीर आरोपकमला नदी में प्लास्टिक से लिपटा मिला अधेड़ का शव, हाथ-पैर बंधे होने की आशंका; पहचान में जुटी पुलिस

बेगूसराय के 50 मजदूर फंसे हैं केरल में, बिहार सरकार से लगायी मदद की गुहार

BEGUSARAI : कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच किए गए लॉकडाउन में बेगूसराय के 50 से अधिक मजदूर केरल में फंस गए हैं। वहां इन लोगों के समक्ष खाने-पीने की भीषण समस्या हो गई है।

FirstBihar
Anurag Goel
2 मिनट

BEGUSARAI : कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच किए गए लॉकडाउन में बेगूसराय के 50 से अधिक मजदूर केरल में फंस गए हैं। वहां इन लोगों के समक्ष खाने-पीने की भीषण समस्या हो गई है। परेशान मजदूरों ने सोशल मीडिया वीडियो जारी कर बिहार सरकार और जिला प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की गुहार लगाई है।


सभी मजदूर नीतीश सरकार से विनती की कि हमलोगों की स्थिति बद से बदतर हो गई है ,जल्दी हमलोगों को यहां से  ले जाने का उपाय सरकार करे।मजदूरों में नावकोठी पंचायत के 28 मजदूर तथा रजाकपुर पंचायत के 22 मजदूर, बलिया प्रखंड के दो, तेघड़ा प्रखंड के एक एवं चेरिया बरियारपुर प्रखंड के सात मजदूर शामिल हैं‌। यह सभी केरल के त्रिशूर जिला के कोट्टानेल्लुर कांपलेक्स तथा इरमंगलम में फंसे हैं।


रजाकपुर के मो. तिजामुल, नावकोठी के मो. तनवीर आदि ने मोबाइल पर वीडियो कॉलिंग के माध्यम से बताया है कि पिछले चार दिनों से कमरे में बंद हैं। स्थानीय पुलिस घर से निकलने नहीं दे रही है, स्थानीय प्रशासन का कोई सहयोग उन्हें नहीं मिल रहा है, खाने-पीने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी है। इन लोगों के पास ना तो रूपये हैं और ना ही आसपास कोई ठिकाना, इन्हें अन्यत्र कहीं शिफ्ट भी नहीं किया गया है। सभी लोग किराए के एक कमरा में किसी तरह से कैदी बने हुए हैं। बाहर निकलने पर प्रतिबंध है, रात में अगर भोजन की तलाश में निकलते भी हैं तो स्थानीय पुलिस के दमन का शिकार हो जाते हैं। मजदूरों का कहना है कि 24 घंटे में कोई व्यवस्था नहीं होती है तो भूखमरी का संकट और गहरा जाएगा।

रिपोर्टिंग
J

रिपोर्टर

Jitendra Kumar

FirstBihar संवाददाता