PATNA : पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जयनाथ मिश्रा के अंतिम संस्कार में गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने के दौरान बिहार पुलिस की राइफलें फुस्स हो गई थीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में बुधवार को यह सब कुछ हुआ। गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने के लिए जैसे ही बिहार पुलिस के जवानों ने कंधे पर बंदूक रखकर राइफल का ट्रिगर को दबाया एक-एक कर 21 राइफलों ने धोखा दे दिया।
गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान राइफलों से गोली नहीं छूटने के कारण बिहार पुलिस की भारी किरकिरी हुई। पुलिस मुख्यालय ने इस मामले में तुरंत जांच के आदेश दिए और अब इस मामले में जो खुलासा हुआ है वह बेहद चौंकाने वाला है। दरअसल गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने के लिए राइफलों में जिन कारतूसों का इस्तेमाल किया गया, वह 1996 में बनी थीं। इन कारतूसों को 3 साल के अंदर इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन एक्सपायर हो चुकी इन कारतूसों के जरिए 20 साल बाद बिहार पुलिस के जवान गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए खड़े हुए थे।
मामला फुस्स होने के बाद सुपौल पुलिस लाइन के आर्मरर को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। ऐसे मौकों पर गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए ब्लैंक कार्टरिज का इस्तेमाल किया जाता है। बिहार पुलिस की तरफ से जिलों के सभी पुलिस लाइन में इसे सुरक्षित रखा जाता है। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी आर्मरर की होती है। आपको बता दें कि ब्लैंक कार्टरिज में बुलेट नहीं होता यह केवल आवाज के लिए बनाया जाता है।
एक्सपायरी कारतूस से दिया गया था गार्ड ऑफ ऑनर, मामला फुस्स हुआ तो आर्मरर पर गिरी गाज
PATNA : पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जयनाथ मिश्रा के अंतिम संस्कार में गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने के दौरान बिहार पुलिस की राइफलें फुस्स हो गई थीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में बुधवार

