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मंत्री चंद्रशेखर तो गये! तेजस्वी ने विदेश से लौटते ही नीतीश की शान में कसीदे पढ़े, शिक्षा मंत्री को कोई सहारा नहीं मिलने के संकेत

09-Jul-2023 09:04 PM

By FIRST BIHAR EXCLUSIVE

PATNA: अपने विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक से विवाद के बाद कोपभवन में बैठे शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर की आखिरी उम्मीद भी टूटती दिखाई दे रही है. चंद्रशेखर लालू यादव और नीतीश कुमार दोनों से फरियाद कर चुके हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ. उन्हें उम्मीद थी कि विदेश से लौटने के बाद तेजस्वी यादव सहारा देंगे. लेकिन विदेश से बिहार की धरती पर कदम रखते ही तेजस्वी यादव ने नीतीश की शान में कसीदे गढ़े. लिहाजा मंत्री चंद्रशेखर की आखिरी उम्मीद भी टूटती हुई दिखाई दे रही है. 


विदेश से लौटे तेजस्वी का नीतीश गान

लगभग 15 दिनों की विदेश यात्रा के बाद रविवार की देर शाम तेजस्वी यादव पटना पहुंचे. एयरपोर्ट पर पहुंचते ही मीडिया से बात की. कहा-महागठबंधन में खटपट या विवाद की बात पूरी तरह से गलत है. ये भाजपा प्रायोजित मीडिया का प्रोपगेंडा है. जब से हमारी सरकार बनी है, तभी से ही ये अफवाह उड़ायी जा रही है कि महागठबंधन में गड़बड़ है. महागठबंधन पूरी तरह से एकजुट है. 


तेजस्वी बोले-हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में मजबूती से काम कर रहे हैं. उनके नेतृत्व में काम करते रहेंगे. कहीं कोई विवाद नहीं है. हम लोग मिलकर भाजपा को हरायेंगे. बिहार में तो हम एकजुट हैं ही, पूरे देश में विपक्षी पार्टियों को एकजुट कर रहे हैं. अभी देखते जाइये न आगे क्या सब होगा. इसी से भाजपा बौखलायी है और अफवाह फैला रही है.


शिक्षा मंत्री का क्या होगा?

तेजस्वी ने इशारों में ही सही साफ कर दिया कि बिहार की सरकार वैसे ही चलेगी जैसे नीतीश कुमार चाहते हैं. ऐसे में शिक्षा विभाग में भी वही होगा जो नीतीश कुमार करा रहे हैं. केके पाठक वहीं बने रहेंगे और उसी तरह काम करते रहेंगे जिस पर शिक्षा मंत्री को भारी एतराज है. फिर शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर क्या करेंगे. केके पाठक ने उनके आप्त सचिव कृष्णानंद यादव के शिक्षा विभाग में घुसने पर रोक लगा दिया है. मंत्री ने अपने आप्त सचिव से पत्र लिखवाया था तो जवाब में केके पाठक ने शिक्षा विभाग के निदेशक से मंत्री की ऐसी-तैसी करने वाला पत्र भिजवा दिया. इसके बाद शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने ऑफिस जाना बंद कर दिया. पिछले चार दिनों से वे ऑफिस नहीं जा रहे हैं.


शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर को तेजस्वी यादव का करीबी माना जाता है. लेकिन तेजस्वी के बयान औऱ बॉडी लैंग्वेज ने बता दिया कि वे फिलहाल नीतीश कुमार से कोई टकराव नहीं मोल लेंगे. ऐसे में शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के पास दो ही विकल्प हैं. या तो वे कुर्सी छोड़ दें या फिर शिक्षा विभाग में केके पाठक की मुहिम को चुपचाप देखें. राजद के ही नेता बताते हैं कि चंद्रशेखर में इतना हौंसला नहीं दिखता है कि कुर्सी छोड़ दें. जिस दिन वे नीतीश कुमार के पास गुहार लगाने गये थे और उनकी गुहार रिजेक्ट कर दी गयी थी, उस दिन ही चंद्रशेखर के इस्तीफे की अफवाह उड़ गयी थी. आनन फानन में चंद्रशेखर ने अपने कर्मचारियों के जरिये इसका खंडन करवाया था कि वे इस्तीफा दे रहे हैं. 


चंद्रशेखर कोई खास जनाधार वाले नेता भी नहीं रहे हैं. उनकी पहचान मधेपुरा में पहले पप्पू यादव के शागिर्द के तौर पर थी. बाद में वे राजद में चले गये तो वहां पार्टी के वोट बैंक के सहारे चुनाव जीत कर आते रहे. मंत्री की कुर्सी भी उन्हें इसलिए मिली है क्योंकि तेजस्वी यादव चंद्रशेखर को आगे कर मधेपुरा में पप्पू यादव को डाउन करना चाहते हैं.