Bihar parbhari mantri list : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने कैबिनेट सहयोगियों को जिला का प्रभारी मंत्री बनाया है।


इस संबंध में कैबिनेट सचिवालय की तरफ से अधिसूचना जारी कर दी गई है। बीजेपी कोटे के जिन मंत्रियों के पास अभी तक दो जिलों का प्रभार था, उनसे एक जिला ले लिया गया है। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पटना जिले के प्रभारी मंत्री बने रहेंगे। वहीं दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिंह दो जिला भोजपुर और मुजफ्फरपुर के प्रभारी मंत्री थे ।अब सिर्फ मुजफ्फरपुर के प्रभारी मंत्री रहेंगे।

वहीं जेडीयू कोटे के तीन मंत्री विजय चौधरी, अशोक चौधरी और श्रवण कुमार दो दो जिला के प्रभारी मंत्री रहेंगे।

कुछ प्रमुख नियुक्तियां इस प्रकार हैं:

 श्री सम्राट चौधरी – पटना

 श्री विजय कुमार सिन्हा – मुजफ्फरपुर

 श्री विजय कुमार चौधरी – पूर्णिया, नालंदा

 श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव – वैशाली

 डॉ. प्रेम कुमार – कैमूर

  श्री श्रवण कुमार – समस्तीपुर, मधेपुरा

  श्री संतोष कुमार सुमन – औरंगाबाद

  श्री सुमित कुमार सिंह – सारण

  श्रीमती रेणु देवी – सिवान

  श्री मंगल पाण्डे – दरभंगा

 श्री नीरज कुमार सिंह – कटिहार

 श्री अशोक चौधरी – सीतामढ़ी, जहानाबाद

 श्रीमती लेशी सिंह – मधुबनी

 श्री मदन सहनी – सुपौल

 श्री नीतीश मिश्रा – अररिया

 श्री नीतीन नवीन – बक्सर

 श्री महेश्वर हजारी – खगड़िया

 श्रीमती शीला कुमारी – लखीसराय

 श्री सुनील कुमार – पूर्वी चंपारण

 श्री जनक राम – पश्चिम चंपारण

 श्री हरी सहनी – अरवल

 श्री कृष्णनंदन पासवान – गोपालगंज

 श्री जयंत राज – रोहतास

 श्री मो. जमा खान – किशनगंज

 श्री रत्नेश सादा – जमुई

 श्री केदार प्रसाद गुप्ता – भोजपुर

 श्री सुरेन्द्र मेहता – बांका

 श्री संतोष कुमार सिंह – भागलपुर

 श्री संजय सरावगी – बेगूसराय

 डॉ. सुनील कुमार – गया

 श्री जिवेश कुमार – नवादा

 श्री राजू कुमार सिंह – शेखपुरा

 श्री मोती लाल प्रसाद – शिवहर

 श्री विजय कुमार गंडल – सहरसा

 श्री कृष्ण कुमार मंटू – मुंगेर


इस सूची में कुल 35 मंत्री शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न जिलों का प्रभारी मंत्री नियुक्त किया गया है। इन मंत्रियों की जिम्मेदारी जिले में सरकार की योजनाओं के सही क्रियान्वयन, जनता से संवाद, और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना होगा। सरकार का यह कदम प्रशासनिक दक्षता और नीतिगत पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। साथ ही यह बदलाव आगामी लोकसभा चुनावों की तैयारी के मद्देनज़र राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।