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06-Feb-2026 12:20 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Budget Session 2026: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन कार्यवाही जारी है। आज सदन में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सवालों पर चर्चा हो रही है। राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली से जुड़े सवाल विपक्ष के साथ साथ सत्ताधारी पक्ष के सदस्यों के द्वारा सरकार से पूछा जा रहा है। इसी बीच सहरसा से इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के विधायक आईपी गुप्ता ने ऐसा सवाल पूछ लिया जिसका जवाब खुद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को देना पड़ गया।
दरअसल, सहरसा से इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने सरकार से सवाल पूछा कि मैंने सहरसा में मेडिकल कॉलेज खोलने से जुड़ा सवाल पूछा था, सरकार की तरफ से जवाब तो मिला है लेकिन पूरक पूछना चाहते हैं लेकिन पता नहीं मंत्री जी जवाब दे सकेंगे या नहीं। 2023 में मेडिकल कॉलेज खोलने के अप्रुवल मिला था। इसके लिए जमीन का हस्तांतरण 2025 में हुआ है। इस कार्य में दो साल लग गए।
उन्होंने पूछा कि सहरसा सदर अस्पताल के पास 21 एकड़ जमीन उपलब्ध है और इंफ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध है, क्या सरकार तत्कालिक तौर पर सदर अस्पताल में मेडिकल कॉलेज खोलने का विचार रखती है या नहीं? सरकार का कहना है कि पीपीपी मोड में इसको शुरू करेंगे तो यह कब टेंडरिंग प्रोसेस में जाएगा? और पीपीपी मोड का मेथड़ क्या होगा?
आईपी गुप्ता के इस सवाल का जवाब विभागीय मंत्री नहीं दे सके जिसके बाद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सरकार की तरफ से विधायक के सवालों का जवाब दिया और बताया कि सरकार को भी इसकी चिंता है। मधेपुरा में सरकार ने मेडिकल कॉलेज स्थापित किया है। लेकिन आज की स्थिति में जब भी वहां डॉक्टरों को पदस्थापित किया जाता है वह नहीं जाते हैं। इसलिए सरकार आगे पॉलिसी बनाने जा रही है कि जो डॉक्टर सरकारी नौकरी कर रहे हैं उन्हें किसी भी हाल में प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करने देंगे।
सम्राट चौधरी ने आगे कहा कि सहरसा सदर अस्पताल की सरकार ने समीक्षा कराई थी। जिस जमीन पर मेडिकल कॉलेज बनना है वहां मैं और खुद मुख्यमंत्री भी निरीक्षण के लिए गए थे और सभी चीजों को देखा है। अगर सदस्य चाहते हैं तो उसकी फिर से समीक्षा कराई जाएगी कि उक्त भूमि पर मेडिकल कॉलेज बनाया जा सकता है या नहीं बनाया जा सकता है।
उन्होंने सदन को बताया कि जहां तक पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज खोलने की बात है तो सरकार इसकी पॉलिसी बना रही है। मघेपुरा मेडिकल कॉलेज में सारी व्यवस्था देने के बावजूद वहां डॉक्टर नहीं रहते हैं तो वहीं से यह सोंच भी आई है कि इसको पीपीपी मोड पर आगे बढ़ाना चाहिए। सरकार की तरफ से इतना खर्च करने के बाद भी हमारे लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है, इसलिए पीपीपी मोड पर चर्चा हो रही है।