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01-Mar-2023 10:57 AM
By First Bihar
MUZAFFARPUR : जेडीयू से अलग होकर नई पार्टी बनाने के बाद RLJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा विरासत बचाओ नमन यात्रा पर निकले हुए हैं। अपनी इस यात्रा के जरिए उपेंद्र कुशवाहा नीतीश सरकार की नाकामियों को जनता के बीच रख रहे हैं और समाजवादियों की खो रही विरासत को बचाने और उसे बढ़ाने के लिए लोगों को एकजुट कर रहे हैं।
दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा अपनी विरासत बचाओ नमन यात्रा पर मुजफ्फरपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए जनता को नीतीश सरकार की नाकामियों को जनता के बीच रख रहे हैं और समाजवादियों की खो रही विरासत को बचाने लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इस दौरान वो जुब्बा साहनी की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी करेंगे।
इस दौरान जनसभा को सम्बोधित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि, जब जनता दल यूनाइटेड में हम थे तो हमारा पहला प्रयास यह था कि नीतीश कुमार जी जिस गलत रास्तों पर अभी चल रहे हैं उसपर नहीं जाएं और पार्टी को मजबूत और एकजुट करने की कोशिश करें। इसको लेकर हमने अपने तरफ से बहुत प्रयास किया लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली जिसके बाद हमने उनका साथ छोड़ दिया।
इतना ही नहीं जब मैं नीतीश कुमार को गलत रास्ते पर जाने के लिए रोका तो उल्टा मेरे बारे में बहुत कुछ अनर्गल बयानबाजी भी शुरू कर दी गई। मेरे बारे में कहा गया कि उपेंद्र कुशवाहा अति महत्वकांक्षी है इसलिए इस तरह की बातें कर रहे हैं। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री के तरफ से यह कहा गया कि कुशवाहा को जहां जाना है चले जाएं मैंने उनको नहीं बुलाया था।
इसके अलावा खुद के विधान परिषद पद से इस्तीफा देने को लेकर भी उन्होंने कहा कि जब विधान परिषद बंद कर दी जनता की समस्याओं को उठाया नहीं जा सकता है और पार्टी गलत रास्ते पर जा रही हो तो फिर विधान परिषद पद पर बने रहने का क्या फायदा है। वही, खुद के कई बार अलग अलग राजनीतिक पार्टियों से गठबंधन को लेकर भी उपेंद्र कुशवाहा ने साफ कहा कि यह बात सच है कि मैं इधर से उधर करता हूं लेकिन कभी भी कुर्सी के लोभ में इसी के साथ गठबंधन नहीं करता बल्कि बिहार की जनता के हित में गठबंधन करता हूं।
आपको बताते चलें कि , कुशवाहा की पहले चरण की यात्रा 6 मार्च तक चलेगी, जो सीवान में खत्म होगी। जबकि दूसरा चरण 16 मार्च से भागलपुर से शुरू होगा और 20 मार्च को शहीद जगदेव प्रसाद की स्मारक पर खत्म होगा। इस दौरान कुशवाहा बिहार के 28 जिलों से होते हुए दो दर्जन से अधिक महापुरुषों की जन्मस्थली और कर्मस्थली पर जाएंगे और करीब 100 से अधिक जनसभा को संबोधित करेंगे।