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सहरसा में वाहन चेकिंग के नाम पर वसूली का खेल! पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप

सहरसा में वाहन चेकिंग के नाम पर वसूली का खेल! पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप

31-May-2023 07:22 PM

By RITESH HUNNY

SAHARSA: बिहार की पीपुल्स फ्रेंडली पुलिस का कारनामा सहरसा में देखने को मिला है। सहरसा की पस्तपार शिविर पुलिस ने गश्ती के दौरान एक परिवार के साथ ना सिर्फ अभद्र व्यवहार किया है बल्कि उनके साथ मारपीट भी की। पीड़ित परिवार ने वरीय पदाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। 


पीड़ित परिवार मधेपुरा जिले क्षेत्र के बिहारीगंज थाना अंतर्गत हथिऔंधा सिहुंरिया टोला निवासी विकास कुमार की पत्नी पुजा कुमारी है। उसने बताया कि 28 मई रविवार की देर रात चार पहिया वाहन से पति, देवर,ननद, सास और अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ सुपौल हॉस्पिटल से बीमार बच्चे को देखकर लौट रही थी। इसी बीच मधेपुरा-ग्वालपाड़ा मुख्य मार्ग स्थित जिरवा नहर पर पहले से खड़ी पस्तपार पुलिस शिविर गश्ती दल द्वारा गाड़ी रोककर रात्रि में तलाशी ली गयी। 


जब कुछ नहीं मिला तो सीट बेल्ट नहीं बांधे जाने का बहाना बनाकर रुपये की मांग की गयी। यह आरोप पीड़िता ने पस्तपार पुलिस पर लगाया है। पीड़िता ने बताया कि पैसे मांगे जान के बाद उनके पति ने पुलिस से चालान दिये जाने की बात कही गई। इस बात पर गश्ती दल में पुलिस जवानों सहित पुलिस वाहन चालक आग-बबूला हो गए और कॉलर पकड़कर उन्हें गाड़ी से बाहर खींच लिया। 


इसका विरोध करने पर सभी पुलिसकर्मियों द्वारा राइफल के बट से पूरे परिवार के सदस्यों की पिटाई कर दी। यहां तक कि हम महिलाओं को भी पुलिस के जवानों ने नहीं बख्शा। ऐसी घटना मानवाधिकार का सरासर उल्लंघन है। पीड़ित परिवार ने पुलिस के वरीय पदाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई और दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग की। 


वहीं मामला संज्ञान में आते ही पुलिस मामले की पड़ताल में फिलहाल जुट गई है। वहीं पुलिस शिविर प्रभारी ने अपने सिरे से मामले को खारिज करते हुए कहा कि वाहन जाँच के लिए रोका गया था जो पीड़ित पक्ष को नागवार गुजरा। पुलिस द्वारा मारपीट व बदसलूकी के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

SAHARSA: बिहार की पीपुल्स फ्रेंडली पुलिस का कारनामा सहरसा में देखने को मिला है। सहरसा की पस्तपार शिविर पुलिस ने गश्ती के दौरान एक परिवार के साथ ना सिर्फ अभद्र व्यवहार किया है बल्कि उनके साथ मारपीट भी की। पीड़ित परिवार ने वरीय पदाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। 


पीड़ित परिवार मधेपुरा जिले क्षेत्र के बिहारीगंज थाना अंतर्गत हथिऔंधा सिहुंरिया टोला निवासी विकास कुमार की पत्नी पुजा कुमारी है। उसने बताया कि 28 मई रविवार की देर रात चार पहिया वाहन से पति, देवर,ननद, सास और अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ सुपौल हॉस्पिटल से बीमार बच्चे को देखकर लौट रही थी। इसी बीच मधेपुरा-ग्वालपाड़ा मुख्य मार्ग स्थित जिरवा नहर पर पहले से खड़ी पस्तपार पुलिस शिविर गश्ती दल द्वारा गाड़ी रोककर रात्रि में तलाशी ली गयी। 


जब कुछ नहीं मिला तो सीट बेल्ट नहीं बांधे जाने का बहाना बनाकर रुपये की मांग की गयी। यह आरोप पीड़िता ने पस्तपार पुलिस पर लगाया है। पीड़िता ने बताया कि पैसे मांगे जान के बाद उनके पति ने पुलिस से चालान दिये जाने की बात कही गई। इस बात पर गश्ती दल में पुलिस जवानों सहित पुलिस वाहन चालक आग-बबूला हो गए और कॉलर पकड़कर उन्हें गाड़ी से बाहर खींच लिया। 


इसका विरोध करने पर सभी पुलिसकर्मियों द्वारा राइफल के बट से पूरे परिवार के सदस्यों की पिटाई कर दी। यहां तक कि हम महिलाओं को भी पुलिस के जवानों ने नहीं बख्शा। ऐसी घटना मानवाधिकार का सरासर उल्लंघन है। पीड़ित परिवार ने पुलिस के वरीय पदाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई और दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग की। 


वहीं मामला संज्ञान में आते ही पुलिस मामले की पड़ताल में फिलहाल जुट गई है। वहीं पुलिस शिविर प्रभारी ने अपने सिरे से मामले को खारिज करते हुए कहा कि वाहन जाँच के लिए रोका गया था जो पीड़ित पक्ष को नागवार गुजरा। पुलिस द्वारा मारपीट व बदसलूकी के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।