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24-Oct-2021 01:01 PM
PATNA : कांग्रेस का हाथ पकड़ने के लिए बेचैन दिख रहे पप्पू यादव को पार्टी आलाकमान सोनिया गांधी और राहुल गांधी भाव नहीं दे रहे हैं. यह पप्पू यादव इस उम्मीद के साथ दिल्ली पहुंचे थे कि उनकी मुलाकात सोनिया गांधी या फिर कम से कम राहुल गांधी से जरूर हो जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. बीते विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद पप्पू राजनैतिक पुनर्जन्म के प्रयास में लगे हुए हैं. यही वजह है कि जेल से बाहर आने के बाद पप्पू लगातार कांग्रेस से अपनी नज़दीकियां बढ़ा रहे. पप्पू को ऐसा लगता है कि कांग्रेस के साथ ही अब उनकी सियासी नाव यहां पर लग सकती है. लेकिन कांग्रेस को लेकर पप्पू यादव ने जो ब्लूप्रिंट तैयार किया है. फिलहाल वह जमीन पर उतरता नहीं दिख रहा.
दरअसल पप्पू यादव यह चाहते हैं कि कांग्रेस के साथ उनका जो भी एडजस्टमेंट हो, वह या तो सोनिया गांधी तय करें या फिर राहुल गांधी. सोनिया और राहुल के जरिए ही पप्पू कांग्रेस में या तो एंट्री चाहते हैं या फिर एडजस्टमेंट. लेकिन फिलहाल राहुल और सोनिया पप्पू को भाव देते नजर नहीं आ रहे. कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने पप्पू यादव से मिलने से इंकार कर दिया है.
अब कांग्रेस के दूसरी कतार के नेताओं से ही पप्पू मुलाकात का जुगाड़ कर रहे हैं. लेकिन इसमें भी उन्हें सफलता नहीं मिल रही पार्टी के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास से पप्पू पिछले दिनों मुलाकात कर चुके हैं. इस मुलाकात के बाद भक्त चरण दास ने भी कहा था कि बिहार प्रदेश कांग्रेस के नेता ही पप्पू यादव से राजनीतिक तालमेल या अन्य संभावनाओं पर बातचीत करेंगे. पार्टी आलाकमान इस मसले पर फिलहाल कोई बातचीत नहीं करने वाला.
सियासी गलियारे में इस बात की चर्चा है कि कांग्रेस आलाकमान पप्पू के रवैया से भलीभांति वाकिफ है. बीते लोकसभा चुनाव से लेकर बिहार विधानसभा चुनाव तक के पप्पू जिस अंदाज में बीजेपी पर हमला बोलते थे. उसी अंदाज में उन्होंने लगातार कांग्रेस पर भी निशाना साधा. राहुल गांधी हो या सोनिया गांधी पप्पू ने उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई. यह अलग बात है कि पप्पू इन दिनों राहुल की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं.
पप्पू यादव ने जिस तरह कांग्रेस के ऊपर लगातार हमला बोला. उसकी वजह से उनकी पत्नी रंजीत रंजन को कांग्रेस बिहार में अब तक बड़ी भूमिका नहीं दे पाई. सियासी जानकार मानते हैं कि रंजीत रंजन कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंच गई रहती. अगर पप्पू राहुल सोनिया जैसे नेताओं पर बयानबाजी करने में संयम बरतते. लेकिन पप्पू के बयानों से रंजीत रंजन का नुकसान हुआ.
आज पप्पू कांग्रेस में एंट्री के लिए जो प्रयास कर रहे हैं. उसके पीछे भी कहीं न कहीं रंजीत रंजन की सोच बताई जा रही. लेकिन पप्पू यादव के सियासी अंदाज से वाकिफ राहुल और सोनिया फिलहाल उनसे कोई बातचीत करने के मूड में नजर नहीं आ रहे. ऐसे में पप्पू यादव को जो भी बात करनी होगी, वह बिहार प्रदेश के नेताओं से ही करनी होगी. अब देखना होगा कि पप्पू इस रास्ते पर आगे बढ़ पाते हैं या राहुल सोनिया से मुलाकात का वक्त मिलने तक इंतजार करते हैं.