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29-Jan-2020 06:45 PM
By Saurav Kumar
SITAMARHI : प्रशासन की नाकामी छुपाने के लिए पत्रकारों को धमकी देने का एक ताजा मामला सामने आया है. खबर दिखाने पर खीझे लाडले डीपीआरओ खुद फोन कर धमकाते हैं. वैसे तो डीपीआरओ बड़ी-बड़ी डिंग हांकते हैं लेकिन खबर जनहित में प्रकाशित और प्रसारित करने पर भड़क उठते हैं. क्योंकि उनको लगता है कि प्रशासन की नाकामी सामने आ गई है.
DM मैडम बोली हैं FIR कर दो
मामला सीतामढ़ी जिले का है. जहां पत्रकार को खबर लिखने के कारण फोन पर एफआईआर धमकी देने का मामला सामने आया है. दरअसल भारत बंद के दौरान सीतामढ़ी से मानवता को तार-तार करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई. जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया. एबुलेंस के अंदर गर्भवती तड़पती रही इधर बंद समर्थक एंबुलेंस को जलाने की बात करते रहें. परिजनों के लाख मिन्नत के बावजूद भी बंद समर्थकों ने एंबुलेंस को वहां से आगे नहीं बढ़ने दिया. फर्स्ट बिहार झारखंड पर यह खबर प्रकाशित होने के बाद सीतामढ़ी के DPRO परिमल कुमार रिपोर्टर को फोन कर FIR की धमकी देने लगे.
क्या बोले डीपीआरओ
DPRO परिमल कुमार ने रिपोर्टर को फोन कर कहा कि ये सब खबर नहीं देना चाहिए. आज बइठ के मैडम चिल्ला रही थी. काहे जोड़ दिए हैं. ग्रुप में रखे हुए हैं ऐसे लोगों को. इनके ऊपर FIR कीजिये. खबर में पूरी सच्चाई है, लेकिन नहीं दिखाना चाहिए. हालांकि रिपोर्टर ने बताया कि उसने इस अमानवीय स्थिति को देखते हुए पुलिस को सूचना दी थी. लेकिन उनकी ओर से कोई पहल नहीं की गई.
क्या है पूरा मामला
सीतामढ़ी के बाजपट्टी थाना क्षेत्र के हरपुरवा नेशनल हाईवे को एनआरसी और सीएए के विरोध में लोगों ने जाम कर रखा था. इसी बीच दर्द से कराहती कोख में 9 महीने के बच्चा लिए महिला एंबुलेंस से जब हरपुरवा के पास पहुंची तो लोगों ने उस एंबुलेंस को आगे नहीं जाने दिया और इन लोगो ने हद तो तब कर दी जब एंबुलेंस को वापस नहीं करने पर जला देने की बात भी कहने लगे. इस दौरान महिला के परिजन बंद समर्थकों से आगे जाने देने की गुहार लगाते रहे लेकिन बंद समर्थक गुंडों ने एक नहीं मानी और एंबुलेंस को वहीं से वापस कर दिया.
एम्बुलेंस रोकना कानून के खिलाफ
मौके पर मौजूद फर्स्ट बिहार झारखंड के संवाददाता कुमार सौरभ ने उसी क्षण बाजपट्टी थाना प्रभारी को अपने मोबाइल नंबर से संपर्क कर इसकी सूचना भी दी. संवाददाता ने बंद समर्थकों और थाना प्रभारी को नियमों का हवाला भी दिया. उन्होनें बताया कि जाम कर प्रदर्शन कर रहे हैं ठीक है लेकिन एंबुलेंस का किसी भी सड़क जाम या प्रदर्शन वाले इलाकों में नहीं रोका जाता है. एक ओर जहां सरकार की ओर से एंबुलेंस को रोकने और रास्ता नहीं देने को लेकर ₹10,000 की फाइन की घोषणा की गई है और जेल भी भेजने का प्रावधान किया गया है. लेकिन पुलिस इतने पर भी एक्शन में नहीं दिखी.
दर्द से कराह रही थी मरीज
बाजपट्टी थाना के हरपुरवा में बंद समर्थक सभी नियम-कानून की धज्जियां उड़ाते दिखे. बंद समर्थकों ने बेशर्मी सारी हदें हद पार करते हुए एंबुलेंस को वापस भेज दिया. एम्बुलेंस में उषा देवी नाम की एक गर्भवती महिला थी जिसका हिमोग्लोबिन सिर्फ 7 फीसदी था और उसकी हालत गंभीर बतायी जा रही थी. महिला को आनन-फानन में पुपरी पीएचसी से सीतामढ़ी सदर अस्पताल के लिए रेफर किया गया था ताकि सदर हॉस्पिटल में महिला की सुरक्षित डिलीवरी हो सके.