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नीतीश ने RCP के लिए बंद कर दिया JDU का दरवाजा, प्रदेश प्रवक्ता से जलील करवाने का मतलब समझिए

नीतीश ने RCP के लिए बंद कर दिया JDU का दरवाजा, प्रदेश प्रवक्ता से जलील करवाने का मतलब समझिए

08-Jul-2022 09:47 AM

PATNA : पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह जनता दल यूनाइटेड में पूरी तरीके से हाशिए पर चले गए हैं। आरसीपी सिंह के लिए उनके नेता नीतीश कुमार ने पार्टी का दरवाजा बंद कर दिया है, लिहाजा अब दिल्ली से पटना वापस आने के बावजूद जेडीयू में बने रहना आरसीपी सिंह के बेहद मुश्किल है। गुरुवार की दोपहर बाद आरसीपी सिंह जब दिल्ली से पटना पहुंचे तो एयरपोर्ट पर उन्होंने अपना आत्मविश्वास दिखाने की कोशिश की। आरसीपी सिंह अपने मुट्ठी भर समर्थकों की नारेबाजी से इतने उत्साहित हुए कि उन्होंने दावा कर दिया कि वह सेल्फमेड लीडर हैं। लेकिन उनकी यह दावेदारी जेडीयू नेतृत्व को रास नहीं आई लिहाजा प्रदेश प्रवक्ता को आरसीपी सिंह का जवाब देने के लिए आगे कर दिया गया। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद निषाद ने रात के वक्त बयान जारी करते हुए आरसीपी बाबू को जमकर खरी-खोटी सुना दी। 


ललन सिंह ने किया होम्योपैथी इलाज


ठीक साल भर पहले आरसीपी सिंह जब केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे तब उन्होंने यह दावा किया था कि नीतीश कुमार की मर्जी से ही उन्होंने मोदी कैबिनेट में शपथ ली। हालांकि नीतीश कुमार ने कभी सार्वजनिक तौर पर आरसीपी सिंह की बात को खारिज नहीं किया लेकिन उस वक्त ललन सिंह केंद्रीय मंत्री बनते–बनते रह गए थे। आरसीपी सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और वह मंत्रिमंडल में शामिल हो गए। बाद में उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी छोड़नी पड़ी। राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी ललन सिंह के पास आई तो उन्होंने आरसीपी सिंह का अपने अंदाज में काट निकालना शुरू कर दिया। ललन सिंह अपनी जिस राजनीतिक शैली में विरोधियों का सफाया करते हैं उसे होम्योपैथी फॉर्मेट कहा जाता है। ललन सिंह ने आरसीपी सिंह का भी होम्योपैथी इलाज शुरू किया। धीरे धीरे कर आरसीपी के करीबी लोगों को पार्टी में साइडलाइन कर दिया गया। जो ललन सिंह के साथ आए उनकी जान बच गई और जो आरसीपी के साथ खड़े रहे वह हाशिए पर लगा दिए गए। लेकिन अब बारी थी आरसीपी बाबू की। पहले उनका राज्यसभा टिकट कटा और उसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा। केंद्रीय मंत्रिमंडल और राज्यसभा से विदाई के बाद आरसीपी सिंह बैरंग पटना लौट आए लेकिन पार्टी में उनके लिए जगह क्या बची है, इसका अंदाजा प्रदेश प्रवक्ता से मिले जवाब के बाद खुद आरसीपी सिंह को लग गया होगा। 


नीतीश चाहते हैं विदाई


आरसीपी सिंह को लेकर जनता दल यूनाइटेड में जो कुछ भी चल रहा है उसपर सियासी जानकारों की राय स्पष्ट है। यह बात बिल्कुल तय मानी जा रही है कि नीतीश कुमार आरसीपी सिंह को अब जनता दल यूनाइटेड में नहीं देखना चाहते। कभी नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे आरसीपी सिंह अब उनका भरोसा खो चुके हैं। यही वजह है कि नीतीश कुमार आरसीपी सिंह को पहले राज्यसभा से विदा कर गए और फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल से भी उनकी विदाई हो गई। जिस तरह प्रदेश प्रवक्ता ने आरसीपी सिंह को खरी-खोटी सुनाई वह नीतीश कुमार की मर्जी के बगैर संभव नहीं। लिहाजा यह बात तय है कि अब आरसीपी सिंह जेडीयू में बहुत लंबे अरसे तक नहीं बने रह पाएंगे। नीतीश कुमार हर हाल में आरसीपी सिंह को पार्टी से बाहर जाने के लिए मजबूर करेंगे। हां, ये अलग बात है कि नीतीश यह सारा खेल पर्दे के पीछे से खेलेंगे। अब देखना होगा कि नीतीश के गेम प्लान में फंसे आरसीपी सिंह कब तक जेडीयू में जलील होते रहेंगे।

PATNA : पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह जनता दल यूनाइटेड में पूरी तरीके से हाशिए पर चले गए हैं। आरसीपी सिंह के लिए उनके नेता नीतीश कुमार ने पार्टी का दरवाजा बंद कर दिया है, लिहाजा अब दिल्ली से पटना वापस आने के बावजूद जेडीयू में बने रहना आरसीपी सिंह के बेहद मुश्किल है। गुरुवार की दोपहर बाद आरसीपी सिंह जब दिल्ली से पटना पहुंचे तो एयरपोर्ट पर उन्होंने अपना आत्मविश्वास दिखाने की कोशिश की। आरसीपी सिंह अपने मुट्ठी भर समर्थकों की नारेबाजी से इतने उत्साहित हुए कि उन्होंने दावा कर दिया कि वह सेल्फमेड लीडर हैं। लेकिन उनकी यह दावेदारी जेडीयू नेतृत्व को रास नहीं आई लिहाजा प्रदेश प्रवक्ता को आरसीपी सिंह का जवाब देने के लिए आगे कर दिया गया। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद निषाद ने रात के वक्त बयान जारी करते हुए आरसीपी बाबू को जमकर खरी-खोटी सुना दी। 


ललन सिंह ने किया होम्योपैथी इलाज


ठीक साल भर पहले आरसीपी सिंह जब केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे तब उन्होंने यह दावा किया था कि नीतीश कुमार की मर्जी से ही उन्होंने मोदी कैबिनेट में शपथ ली। हालांकि नीतीश कुमार ने कभी सार्वजनिक तौर पर आरसीपी सिंह की बात को खारिज नहीं किया लेकिन उस वक्त ललन सिंह केंद्रीय मंत्री बनते–बनते रह गए थे। आरसीपी सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और वह मंत्रिमंडल में शामिल हो गए। बाद में उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी छोड़नी पड़ी। राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी ललन सिंह के पास आई तो उन्होंने आरसीपी सिंह का अपने अंदाज में काट निकालना शुरू कर दिया। ललन सिंह अपनी जिस राजनीतिक शैली में विरोधियों का सफाया करते हैं उसे होम्योपैथी फॉर्मेट कहा जाता है। ललन सिंह ने आरसीपी सिंह का भी होम्योपैथी इलाज शुरू किया। धीरे धीरे कर आरसीपी के करीबी लोगों को पार्टी में साइडलाइन कर दिया गया। जो ललन सिंह के साथ आए उनकी जान बच गई और जो आरसीपी के साथ खड़े रहे वह हाशिए पर लगा दिए गए। लेकिन अब बारी थी आरसीपी बाबू की। पहले उनका राज्यसभा टिकट कटा और उसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा। केंद्रीय मंत्रिमंडल और राज्यसभा से विदाई के बाद आरसीपी सिंह बैरंग पटना लौट आए लेकिन पार्टी में उनके लिए जगह क्या बची है, इसका अंदाजा प्रदेश प्रवक्ता से मिले जवाब के बाद खुद आरसीपी सिंह को लग गया होगा। 


नीतीश चाहते हैं विदाई


आरसीपी सिंह को लेकर जनता दल यूनाइटेड में जो कुछ भी चल रहा है उसपर सियासी जानकारों की राय स्पष्ट है। यह बात बिल्कुल तय मानी जा रही है कि नीतीश कुमार आरसीपी सिंह को अब जनता दल यूनाइटेड में नहीं देखना चाहते। कभी नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे आरसीपी सिंह अब उनका भरोसा खो चुके हैं। यही वजह है कि नीतीश कुमार आरसीपी सिंह को पहले राज्यसभा से विदा कर गए और फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल से भी उनकी विदाई हो गई। जिस तरह प्रदेश प्रवक्ता ने आरसीपी सिंह को खरी-खोटी सुनाई वह नीतीश कुमार की मर्जी के बगैर संभव नहीं। लिहाजा यह बात तय है कि अब आरसीपी सिंह जेडीयू में बहुत लंबे अरसे तक नहीं बने रह पाएंगे। नीतीश कुमार हर हाल में आरसीपी सिंह को पार्टी से बाहर जाने के लिए मजबूर करेंगे। हां, ये अलग बात है कि नीतीश यह सारा खेल पर्दे के पीछे से खेलेंगे। अब देखना होगा कि नीतीश के गेम प्लान में फंसे आरसीपी सिंह कब तक जेडीयू में जलील होते रहेंगे।