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09-Dec-2021 08:03 AM
PATNA : बिहार में शराबबंदी कानून को पहले से ज्यादा सख्त तरीके से अमलीजामा पहनाने के लिए एक तरफ जहां नीतीश कुमार ने कमर कसी हुई है. तो वहीं दूसरी तरफ से लगातार विपक्ष शराबबंदी कानून की समीक्षा की जरूरत तो बता रहा है. अब नीतीश कुमार किस सहयोगी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने भी बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की जरूरत बताई है.
मांझी ने कहा है कि बिहार में जो मौजूदा शराब बंदी कानून लागू है उसे राज्य को काफी नुकसान हो रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बिना लाग लपेट के कह दिया है कि शराबबंदी कानून से बेहतर साल 1991 का पुराना कानून था.
बिहार को काफी नुकसान
बिहार में नए शराबबंदी कानून के लागू होने के बाद राज्य को हुए नुकसान की गिनती जीतन राम मांझी ने कराई है. मांझी ने कहा है कि आज बिहार में होटल उद्योग पूरी तरीके से चौपट हो चुका है. टूरिज्म इंडस्ट्री का हाल बेहद बुरा है. गया जैसी जगह पर जहां पहले टूरिस्ट बड़ी संख्या में आते थे अब वह गया आने की बजाय कोलकाता चले जाते हैं. जो होटल कारोबारी गया में टूरिस्ट अट्रैक्शन के कारण कारोबार कर रहे थे उनकी हालत पतली हो गई है.
सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है. इतना ही नहीं मांझी ने यह भी कहा कि बिहार में जिस तरह शराबबंदी लागू की गई है, उसके कारण अब अवैध कारोबार के नए नेटवर्क को खड़ा होने में मदद मिली है. जीतन राम मांझी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सरकार को तत्काल शराबबंदी कानून की समीक्षा करनी चाहिए. ऐसी शराबबंदी का क्या फायदा जब इससे राज्य को नुकसान हो रहा हो.
कुछ लोगों को पीने की छूट जरूरी
बिहार के मुख्यमंत्री एक तरफ तो पीने वालों को लेकर सख्त है तो वहीं जीतन राम मांझी ने कह दिया है कि पुराने शराबबंदी कानून में भी लोगों के ऊपर एक्शन लेने का प्रावधान है. 1991 के शराब बंदी कानून में भी यह बात स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कोई व्यक्ति शराब पीकर सार्वजनिक जगह पर बवाल या हंगामा नहीं कर सकता. सड़क पर अगर कोई शराबी उपद्रव करता है तो उसके खिलाफ पुराने कानून के तहत भी एक्शन लिया जा सकता है. लेकिन शराबबंदी कानून के दायरे में केवल गरीब लोग आ रहे हैं.
जीतन राम मांझी ने कहा है कि कुछ लोगों को पीने की छूट जरुर मिलनी चाहिए. गरीब आदमी अगर दिन भर मजदूरी करने के बाद एक ग्लास दूध खरीद कर पीने में सक्षम नहीं है तो वह ढाई सौ मिली लीटर शराब लेकर अपनी थकावट दूर करता था लेकिन अब वह जैसे ही शराब पीता है उसे जेल में डाल दिया जाता है. इतना ही नहीं जीतन राम मांझी ने यह भी कहा कि बिहार में आर्मी के लोगों को भी शराब पीने पर जेल भेज दिया जाता है जो सही नहीं है.
आर्मी के लोगों के कल्चर में ही वाइन है लेकिन बिहार का शराबबंदी कानून इसकी इजाजत नहीं देता है. इसके अलावे टूरिस्ट जो बिहार आते हैं उन्हें भी शराब पीने पर जेल भेज दिया जाता है जो ठीक नहीं है. मांझी ने कहा कि शराबबंदी कानून को व्यवहारिक बनाए जाने की जरूरत है. उन्होंने इतना जरूर कहा कि वह शराबबंदी कानून का विरोध नहीं कर रहे लेकिन उनका मानना है कि पुराना कानून ही बेहतर था.