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नीतीश का ड्रीम प्रोजेक्ट सफेद हाथी बन गया, सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर से आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया

नीतीश का ड्रीम प्रोजेक्ट सफेद हाथी बन गया, सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर से आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया

06-Oct-2021 07:44 AM

PATNA : पटना के गांधी मैदान के पास 3 साल पहले सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर बनकर तैयार हुआ था 2017 में जब इसका उद्घाटन हुआ तो इस पर कुल लागत 450e करोड़ से ज्यादा की बताई गई थी लेकिन इसका अर्थ यही ड्रीम प्रोजेक्ट सफेद हाथी साबित हो रहा है दरअसल सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर से सरकार को आमदनी उतनी नहीं हो रही जितना मेंटेनेंस पर खर्च हो रहा है आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाला मुहावरा इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर सही साबित हो रहा है। 


सूचना का अधिकार के तहत भवन निर्माण विभाग में सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर को लेकर जो जानकारी साझा की है उसके मुताबिक इसके मेंटेनेंस पर हर दिन 3 लाख से ज्यादा की रकम खर्च होती है। पिछले 4 सालों में सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर के मेंटेनेंस पर 47.50 को रुपए खर्च किए जा चुके हैं। यानी हर साल तकरीबन 12 करोड़ और महीने के हिसाब से अगर आंकड़ा निकाले तो तकरीबन एक करोड़ रुपए हर महीने इस सेंटर के मेंटेनेंस पर खर्च किए जाते हैं। हैरत की बात यह है कि सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर से अब तक सरकार को 4 साल में केवल 16 करोड रुपए की कमाई हुई है जबकि खर्च 47 करोड़ से ज्यादा हुआ है। ऐसे में यह सेंटर सरकार के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। 


गांधी मैदान के पास जब इस कन्वेंशन सेंटर निर्माण कराया गया था तो सरकार का तर्क था कि इसमें बड़े आयोजनों के लिए बुकिंग होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके दो कारण हैं पहला यह कि इस बड़े कन्वेंशन सेंटर की बुकिंग की रकम काफी ज्यादा रखी गई है। दूसरे नियम इतने सख्त बनाए गए हैं कि कोई आयोजनकर्ता जल्दी इसकी बुकिंग नहीं करना चाहता। सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर के रखरखाव को लेकर भी बड़ा तामझाम है। सेंटर की सुरक्षा में 24 घंटे 50 सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहते हैं। इसके अलावे हाउसकीपिंग और मेंटेनेंस के दूसरे स्टाफ भी काम करते हैं। इलेक्ट्रिक से लेकर फायर फाइटिंग टीम तक के ऊपर भी मोटी रकम खर्च होती है हालांकि सरकार को इससे कोई परेशानी नहीं। भवन निर्माण विभाग का कहना है कि इसका निर्माण आम लोगों के हितों और सरकारी कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर किया गया था। इसका वाणिज्यिक और व्यवसायिक मकसद नहीं है यानी सरकार को इस बात की कोई परवाह नहीं की मेंटेनेंस में अगर 3 लाख प्रतिदिन खर्च हो रहे हैं तो यह रकम जनता के खजाने से ही जा रही है और बदले में आमदनी अठन्नी है।