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सुसाइड करने वाले थे एक्टर मनोज वाजपेयी, कहा-दोस्तों ने बचा दी थी जान

सुसाइड करने वाले थे एक्टर मनोज वाजपेयी, कहा-दोस्तों ने बचा दी थी जान

01-Jul-2020 08:18 PM

DESK: सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद पूरे देश में बॉलीवुड को लेकर चल रही बहस के बीच बिहार के ही एक और अभिनेता मनोज वाजपेयी ने कहा कि एक समय वे भी सुसाइड करने की सोच चुके थे. डिप्रेशन के उस दौर में मनोज वाजपेयी के दोस्तों ने उनकी जान बचा ली थी.


मनोज वाजपेयी ने सुनायी अपनी कहानी
एक इंटरव्यू में मनोज वाजपेयी ने अपनी कहानी सुनायी है. उन्होंने उस दौर की कहानी सुनायी जब वे आत्महत्या करने का फैसला कर चुके थे. उन्होंने कहा “वो दौर तब का था जब मैं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन लेना चाहता था. मैंने NSD में एडमिशन लेने के लिए बहुत मेहनत किया था. मुझे भोजपुरी बोलनी आती थी लेकिन मैंने दिन-रात एक कर सही तरीके से हिन्दी और अंग्रेजी बोलना सीखा. लेकिन मैं बाहरी था. लिहाजा तीन-तीन दफे मुझे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में रिजेक्ट कर दिया गया. तब मैंने सुसाइड करने की सोंची थी. लेकिन वो मेरे दोस्त थे जिन्होंने मेरा साथ दिया. मेरे दोस्त मेरे साथ सोते थे और कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ा. वे तब तक मेरे साथ रहे जब मुझे सफलता नहीं मिल गयी.”


मनोज वाजपेयी ने कहा कि उन्होंने पूरी जिंदगी संघर्ष ही किया. बिहार के चंपारण के एक गांव में किसान परिवार में उनका जन्म हुआ. जिंदगी अभाव से भरी थी लेकिन 9 साल की उम्र में ही मनोज वाजपेयी ने तय कर लिया कि उन्हें एक्टिंग ही करना है. 17 साल की उम्र में वे दिल्ली चले आये और वहां थियेटर करने लगे. बाद में चिट्ठी लिख कर अपने पिता को जानकारी दी कि वे एक्टर बनना चाहते हैं. पिताजी ने 200 रूपये महीने का खर्च भेजना शुरू किया. लेकिन समाज ने उन्हें निकम्मा करार दिया. दिल्ली में ही नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन के लिए उन्हें इतनी जद्दोजहद करनी पड़ी.


बॉलीवुड में भी लगातार नकारा गया
मनोज वाजपेयी ने बताया कि मुंबई में सालों उन्हें अपमान झेलना पड़ा. पांच दोस्तों के साथ मिलकर एक चाल को किराये पर लिया और फिल्म निर्माताओं-निर्देशकों के दफ्तर का चक्कर लगाना शुरू कर दिया. किसी ने काम नहीं दिया. एक डायरेक्टर ने मेरे सामने ही मेरी तस्वीर फाड़ दी. एक फिल्म में मौका मिला तो पहले शॉट के बाद ही गेट आउट कह दिया गया. फिल्म डायरेक्टर मानने को तैयार नहीं थे कि मेरा चेहरा फिल्मी हीरो की तरह का है. हालत ये थी कि एक बड़ा पांव के लिए भी पैसा जुटाना मुश्किल हो गया था. 


4 सालों तक धक्के खाने के बाद महेश भट्ट के एक टीवी सीरियल में काम करने का मौका मिला और तब 1500 रूपये प्रति एपिसोड मिलने शुरू हुए. इसी दौरान रामगोपाल वर्मा को मनोज वाजपेयी का काम पसंद आया और फिर फिल्म सत्या में मौका मिला. रामगोपाल वर्मा की फिल्म सत्या में मनोज वाजपेयी ने गैंगस्टर भीखू महात्रे का रोल निभाया और पहली फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. इसके बाद मनोज वाजपेयी ने 67 फिल्मों में काम किया. मनोज वाजपेयी की दो फिल्में इस साल रिलीज हो रही हैं. ये हैं मिसेज सीरियल किलर और भोंसले. दोनों फिल्में OTT प्लेटफार्म पर रिलीज होंगी. 

DESK: सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद पूरे देश में बॉलीवुड को लेकर चल रही बहस के बीच बिहार के ही एक और अभिनेता मनोज वाजपेयी ने कहा कि एक समय वे भी सुसाइड करने की सोच चुके थे. डिप्रेशन के उस दौर में मनोज वाजपेयी के दोस्तों ने उनकी जान बचा ली थी.


मनोज वाजपेयी ने सुनायी अपनी कहानी
एक इंटरव्यू में मनोज वाजपेयी ने अपनी कहानी सुनायी है. उन्होंने उस दौर की कहानी सुनायी जब वे आत्महत्या करने का फैसला कर चुके थे. उन्होंने कहा “वो दौर तब का था जब मैं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन लेना चाहता था. मैंने NSD में एडमिशन लेने के लिए बहुत मेहनत किया था. मुझे भोजपुरी बोलनी आती थी लेकिन मैंने दिन-रात एक कर सही तरीके से हिन्दी और अंग्रेजी बोलना सीखा. लेकिन मैं बाहरी था. लिहाजा तीन-तीन दफे मुझे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में रिजेक्ट कर दिया गया. तब मैंने सुसाइड करने की सोंची थी. लेकिन वो मेरे दोस्त थे जिन्होंने मेरा साथ दिया. मेरे दोस्त मेरे साथ सोते थे और कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ा. वे तब तक मेरे साथ रहे जब मुझे सफलता नहीं मिल गयी.”


मनोज वाजपेयी ने कहा कि उन्होंने पूरी जिंदगी संघर्ष ही किया. बिहार के चंपारण के एक गांव में किसान परिवार में उनका जन्म हुआ. जिंदगी अभाव से भरी थी लेकिन 9 साल की उम्र में ही मनोज वाजपेयी ने तय कर लिया कि उन्हें एक्टिंग ही करना है. 17 साल की उम्र में वे दिल्ली चले आये और वहां थियेटर करने लगे. बाद में चिट्ठी लिख कर अपने पिता को जानकारी दी कि वे एक्टर बनना चाहते हैं. पिताजी ने 200 रूपये महीने का खर्च भेजना शुरू किया. लेकिन समाज ने उन्हें निकम्मा करार दिया. दिल्ली में ही नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन के लिए उन्हें इतनी जद्दोजहद करनी पड़ी.


बॉलीवुड में भी लगातार नकारा गया
मनोज वाजपेयी ने बताया कि मुंबई में सालों उन्हें अपमान झेलना पड़ा. पांच दोस्तों के साथ मिलकर एक चाल को किराये पर लिया और फिल्म निर्माताओं-निर्देशकों के दफ्तर का चक्कर लगाना शुरू कर दिया. किसी ने काम नहीं दिया. एक डायरेक्टर ने मेरे सामने ही मेरी तस्वीर फाड़ दी. एक फिल्म में मौका मिला तो पहले शॉट के बाद ही गेट आउट कह दिया गया. फिल्म डायरेक्टर मानने को तैयार नहीं थे कि मेरा चेहरा फिल्मी हीरो की तरह का है. हालत ये थी कि एक बड़ा पांव के लिए भी पैसा जुटाना मुश्किल हो गया था. 


4 सालों तक धक्के खाने के बाद महेश भट्ट के एक टीवी सीरियल में काम करने का मौका मिला और तब 1500 रूपये प्रति एपिसोड मिलने शुरू हुए. इसी दौरान रामगोपाल वर्मा को मनोज वाजपेयी का काम पसंद आया और फिर फिल्म सत्या में मौका मिला. रामगोपाल वर्मा की फिल्म सत्या में मनोज वाजपेयी ने गैंगस्टर भीखू महात्रे का रोल निभाया और पहली फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. इसके बाद मनोज वाजपेयी ने 67 फिल्मों में काम किया. मनोज वाजपेयी की दो फिल्में इस साल रिलीज हो रही हैं. ये हैं मिसेज सीरियल किलर और भोंसले. दोनों फिल्में OTT प्लेटफार्म पर रिलीज होंगी.