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21-Feb-2023 04:59 PM
By First Bihar
PATNA: जेडीयू से नाता तोड़ कर अलग पार्टी बनाने के एलान के एक दिन बाद ही उपेंद्र कुशवाहा को भाजपा का ऑफर मिल गया है. भाजपा आलाकमान का मैसेज लेकर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल उपेंद्र कुशवाहा के घर पहुंच गये हैं. दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई. हालांकि संजय जायसवाल ने कहा कि वे शिष्टाचार में उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात करने आये हैं।
संजय जायसवाल मंगलवार को ही दिल्ली से पटना पहुंचे औऱ एयरपोर्ट से सीधे उपेंद्र कुशवाहा के घर पहुंच गये. उन्होंने लगभग आधे घंटे तक कुशवाहा से बातचीत की. सू सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक संजय जायसवाल अपने नेतृत्व का मैसेज लेकर कुशवाहा के घर गये थे. भाजपा मान रही है कि कुशवाहा के अलग होने के बाद जेडीयू में कोई दम नहीं रह गया है. उपेंद्र कुशवाहा 2024 और 2025 के चुनाव में बीजेपी के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
कुशवाहा से सीख लें नीतीश
वैसे संजय जायसवाल ने मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे शिष्टाचार मुलाकात करने आये थे. उपेंद्र कुशवाहा से नीतीश कुमार को सीख लेना चाहिये. उपेंद्र कुशवाहा राज्यपाल द्वारा मनोनीत विधान पार्षद थे. फिर भी जेडीयू छोडने के साथ साथ उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफे का एलान कर दिया. नीतीश कुमार को सीखना चाहिये कि राजनीतिक इमानदारी क्या होती है. अगर पाला बदलना हो तो पद से इस्तीफा दे देना चाहिये औऱ फिर से जनादेश लेना चाहिये. संजय जायसवाल ने कहा कि इस मुलाकात का कोई सियासी मकसद नहीं है. वे व्यक्तिगत तौर पर उपेंद्र कुशवाहा को बधाई देने आये हैं.
बता दें कि एक दिन पहले ही उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू को छोड कर राष्ट्रीय लोक जनता दल बनाने का एलान किया है. उसी दिन बीजेपी के नेताओं ने उनके फैसले का स्वागत किया था. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा था कि उनका उपेंद्र कुशवाहा से बेहतर संबंध नहीं रहा है. लेकिन कुशवाहा ने जिस दिलेरी से विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देकर जेडीयू छोड़ने का एलान किया है उससे वे बहुत प्रभावित हुए हैं.
उधर उपेंद्र कुशवाहा ने पहले ही भाजपा को लेकर नरमी के संकेत दे दिये हैं. कुशवाहा ने आज मीडिया से बात करते हुए कहा कि 2024 में नरेंद्र मोदी को दिल्ली की सत्ता से हटा पाना मुश्किल है. जाहिर है भाजपा औऱ कुशवाहा के बीच फिर से दोस्ती की पटकथा तैयार हो रही है. वैसे भी उपेंद्र कुशवाहा 2014 से 2019 तक बीजेपी के साथ ही थे. 2019 में नीतीश कुमार के दबाव में भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा से पल्ला झाड़ लिया था.