11 साल बाद जिंदा घर लौटी 80 वर्षीया लीलावती, मृत समझ परिवारवाले हर साल मना रहे थे पुण्यतिथि हरिद्वार में जयपुरिया यात्री निवास का उद्घाटन, श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर हरिद्वार में जयपुरिया यात्री निवास का उद्घाटन, श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर मायके जा रही महिला से झपटा सोने की बाली, पकड़े जाने पर चोर ने निगला, एक्स-रे रिपोर्ट देखकर डॉक्टर रह गये हैरान पटना में खेल मंत्री रक्षा खडसे ने सराहा बिहार मॉडल, देशभर में लागू होगी मैदान निर्माण योजना पटना में खेल मंत्री रक्षा खडसे ने सराहा बिहार मॉडल, देशभर में लागू होगी मैदान निर्माण योजना बिहार दिवस समारोह में अनोखा नजारा: नीतीश के गुब्बारे जमीन पर गिरे, सम्राट चौधरी के उड़े आसमान में बिहार में अपराधियों का तांडव, मॉर्निंग वॉक पर निकले प्रॉपर्टी डीलर को मारी गोली बिहार में अपराधियों का तांडव, मॉर्निंग वॉक पर निकले प्रॉपर्टी डीलर को मारी गोली डाक पार्सल वैन से 2 करोड़ का गांजा बरामद, दो तस्कर भी गिरफ्तार
01-May-2020 08:47 AM
PATNA : कोरोना ने किसानों की तकलीफ को और बढ़ा दिया है. वंचित समाज पार्टी के नेता और चुनाव अभियान समिति के प्रमुख ललित मोहन सिंह ने कहा कि किसानों के बही खाते में नफा-नुकसान का कोई कॉलम ही नहीं होता, आखिरकार ऑडिट करने कौन आएगा, उसके खाते में एक ही कॉलम है घाटे वाला क्योंकि उसके उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य, तय करने वाले कभी खेतों की मेड़ों पर नहीं घूमे. ऐसे अधिकारी इसका मूल्य तय करते हैं जिन्हें न तो खेत से मतलब है और न ही उन्होंने किसानों की परेशानी और दर्द को सामने से देखा है.
उन्होंने कहा कि बिहार में, बहुतायत में, संतोष धन पाया जाता है, कोई किसान खुदकुशी नहीं करता, वह जानता है कि जो होता है अच्छा होता है. दिनकर की कविता की पंक्तियां को अपना भाग्य समझता है ,“सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें आगे क्या होता है।“ और “होहियें वही जे राम रुचि राखा।“ जैसी पंक्तियों को अपनी जीवन का आधार मानता है.
सरकारी खरीद तो यहां एक मज़ाक बन कर रह गई है. जो भी अधिकारी को खरीदने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है वह मिल मालिकों से तथा पैक्स के सभापति की मिली भगत में कम-से-कम 3.00 से लेकर 3.50 प्रति किलो ग्राम या 300/- से 350/- प्रति क्विंटल चाहिए चाहिए. जिस फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1500/- प्रति क्विंटल रखा गया हो उस फसल का 20 से 25% तो सरकार के अधिकारियों को जाता है. और किसानों को तत्तकाल भुगतान के विपरीत कई महीने बाद पैसे मिलते हैं. किसानों की मजबूरी और मजबूती भी यही है कि हम हर साल उपजायेंगे और हर बार मुस्कराहट के साथ घाटा सहेंगे क्योंकि यही हमारा भाग्य है, यह ही हमारी नियति और यही हमारा प्रारब्ध.हम हैं तो खुदा भी है नहीं तो इबादत करेगा कौन?
बिहार दिवस समारोह में अनोखा नजारा: नीतीश के गुब्बारे जमीन पर गिरे, सम्राट चौधरी के उड़े आसमान में...
बिहार दिवस पर CM नीतीश को बधाई, JDU प्रदेश महासचिव ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात....दी शुभकामनाएं ...
पूर्व JDU नेता केसी त्यागी ने RLD का दामन थामा, दिल्ली में पार्टी चीफ जयंत चौधरी ने दिलाई सदस्यता...