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27-Jul-2022 04:19 PM
PATNA: रेलवे में जमीन के बदले नौकरी औऱ IRCTC घोटाले में आज सीबीआई ने आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के करीबी भोला यादव को गिरफ्तार कर लिया है. सीबीआई ने रेलवे के इस घोटाले के राज उगलवाने के लिए भोला यादव को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर ले लिया है. दो दशकों से लालू परिवार के सबसे खास माने जाने वाले भोला यादव पर सीबीआई की दबिश के बाद लालू फैमिली ही नहीं बल्कि पूरे राजद में बेचैनी है. सियासी हलके में चर्चा ये है कि लालू परिवार के हनुमान कहे जाने वाले भोला यादव ने अगर सीबीआई के सामने राज उगल दिया तो लालू प्रसाद यादव के साथ साथ तेजस्वी यादव को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है.
बता दें कि सीबीआई लालू यादव के रेल मंत्री रहते रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने और आईआरसीटीसी के होटलों को जमीन लेकर लीज पर देने के घोटाले की जांच कर रही है. सीबीआई इस मामले में लालू प्रसाद यादव के घर समेत दूसरे ठिकानों पर पहले ही छापेमारी कर चुकी है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने भोला यादव को चार दिन पहले पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं गए थे. इसके बाद बुधवार की सुबह भोला यादव के दिल्ली, पटना और दरभंगा आवास समेत चार ठिकानों पर छापेमारी की गई. सीबीआई ने भोला यादव को गिरफ्तार कर दिल्ली की कोर्ट में पेश किया. सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि भोला से पूछताछ जरूरी है लिहाजा कोर्ट ने उन्हें 7 दिनों की रिमांड पर भेज दिया है.
हनुमान के सीने में दफन है हर राज
फर्स्ट बिहार ने राजद के एक प्रमुख नेता से बात की. उन्होंने कहा लालू परिवार अपने घर पर हुई छापेमारी से जितना बेचैन नहीं था उससे ज्यादा बेचैनी भोला यादव पर सीबीआई की दबिश से है. राजद नेता के मुताबिक पिछले ढ़ाई दशक से लालू परिवार का सारा राज भोला यादव के सीने में दफन है. लालू परिवार के हर ट्रांसजैक्शन में भोला यादव की भूमिका रही है. 20 साल से भी ज्यादा समय तक वे लालू यादव के साथ साये की तरह रहे हैं. लिहाजा उन्हें हर उस बात की जानकारी है जिसे सीबीआई जानना चाहती है.
लालू फैमिली की हर जमीन खरीद में गवाह हैं भोला
सरकारी नियमों के मुताबिक किसी जमीन या मकान की रजिस्ट्री या एग्रीमेंट होता है तो उसमें दो गवाह होते हैं. राजद के एक नेता ने बताया कि पिछले दो दशकों में लालू परिवार ने बड़े पैमाने पर जमीन की रजिस्ट्री करायी. ऐसी हर रजिस्ट्री में गवाह के तौर पर भोला यादव का नाम है. सीबीआई आरोप लगा रही है कि 2004 से 2009 तक जब लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री थे तो उन्होंने लोगों से जमीन लिखवा कर उन्हें रेलवे की नौकरी दी. ऐसी जितनी जमीन की रजिस्ट्री हुई उसमें भोला यादव ही गवाह बने हैं.
खास बात ये भी है कि लालू जब रेल मंत्री थे तो भोला यादव उनके ओएसडी हुआ करते थे. सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक आरोप ये है कि भोला यादव ने ही नौकरी के जमीन से लेकर दूसरी चीजों की डीलिंग की. सीबीआई का मानना है कि रेलवे की नौकरी का सारा हिसाब किताब भोला यादव देखते थे. सीबीआई के मुताबिक डीलिंग के किंगपिन तो लालू यादव थे लेकिन जमीन से लेकर पैसे की वसूली भोला यादव करते थे. इस काम में भोला यादव ने खुद भी काफी संपत्ति बनायी.
बता दें कि 2004 से 2009 तक लालू यादव के ओएसडी रहे फिलहाल आरजेडी के राष्ट्रीय महासचिव हैं. राजद ने 2014 में उन्हें विधान पार्षद बनाया था. बाद में 2015 के विधानसभा चुनाव में भोला यादव को दरभंगा जिले के बहादुरपुर विधानसभा सीट से आरजेडी प्रत्याशी बनाया गया. भोला यादव चुनाव जीत भी गये. 2020 के विधानसभा चुनाव में भोला को दरभंगा के ही हायाघाट से RJD उम्मीदवार बनाया गया लेकिन वे चुनाव हार गये.
विधान पार्षद और विधायक बनने के बाद भी भोला यादव लालू प्रसाद यादव के निजी सहायक के तौर पर ही नजर आते रहे. लालू यादव जब भी पटना में रहे भोला यादव उनके साथ साये की तरह रहे. चारा घोटाला सहित कई अन्य मामलों में जब भी लालू यादव को अदालत जाना पड़ा, भोला यादव उनके साथ दिखते रहे. इस दौरान कई बार लालू यादव रांची के रिम्स और दिल्ली के एम्स अस्पताल में भी भर्ती रहे. उस दौरान भी भोला यादव ही उनके साथ रहते थे.
बिहार की सियासत में ये माना जाता रहा है कि लालू यादव और उनके परिवार का लगभग हर राज भोला यादव जानते हैं. खास बात ये भी है कि भोला यादव सिर्फ लालू यादव ही नहीं बल्कि उनके पूरे परिवार के करीबी रहे हैं. लगभग 20 सालों से भोला यादव लालू यादव के साथ साथ उनकी पत्नी और पूर्व सीएम राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के भी करीबी रहे हैं.
सियासी गलियारे में उत्सुकता इस बात की है कि भोला यादव सीबीआई से क्या कहते हैं. अगर भोला ने जुबान खोली तो फिर लालू-राबड़ी से लेकर तेजस्वी तक बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं. वैसे फिलहाल सीबीआई के अधिकारी भोला यादव से पूछताछ कर रहे हैं. 2004 से 200 भोला यादव, लालू यादव का ओएसडी भी रह चुके हैं।