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06-Jul-2023 05:58 PM
By RAMESH SHANKAR
SAMASTIPUR: कभी-कभी कोई ऐसी घटनाएं सामने आ जाती है जिसे देखकर काफी हैरानी होती है। बात समस्तीपुर की ही ले लीजिए यहां एक नाबालिग मासूम बच्चे की बड़े ही बेरहमी से हाथ पैर बांधकर पीटा गया। इस दौरान बच्चे के ऊपर पानी की तेज बौछार भी किया गया। बिस्किट चोरी का आरोप लगाकर 16 साल के बालक को 9 घंटे तक पीटा गया। लेकिन मौके पर मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे। किसी ने बच्चे को बचाने की कोशिश नहीं की।
हैरानी की बात तो यह है कि जिस समय पिटाई की जा रही थी उस वक्त गांव के जनप्रतिनिधि और मुखिया पति भी मौजूद थे। गांव के किसी भी व्यक्ति ने इस घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी। घटना सिंघिया थाना क्षेत्र के माहे गांव का है। बच्चे की बेरहमी से पिटाई का वीडियो किसी ने अपने मोबाइल से बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। जब इस वीडियो पर नजर समस्तीपुर के पुलिस कप्तान विनय तिवारी की गई तब आनन-फानन में पुलिस की टीम मौके पर भेजी गयी। जिसके बाद पुलिस ने बच्चे को छुड़ाया लेकिन अस्पताल ले जाने के बजाये उसे घर भेज दिया।
पीड़ित ने बताया कि उसे घर भेजने के बाद फिर देर रात में पुलिस आई थी और उसे अस्पताल ले गयी। अस्पताल में कुछ दवा देकर फोटो खिंचवाया और एक आवेदन पर उसके परिवार वालों से अंगुठे का निशान लगवाया गया। बच्चे की बातें सुनकर लोग भी हैरान रह गये। लेकिन सबसे बड़ा सवाल उठता है कि पुलिस शाम को 6 बजे पहुंची थी लेकिन बच्चे को छुड़ाने के बाद उसे सीधा घर भेज दिया। जबकि पहले उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए था। लेकिन शायद पुलिस को अपनी गलती का एहसास हुआ होगा तब फिर देर रात 1:30 बजे पुलिस पीड़ित के घर पहुंच गई और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गयी।
नाबालिग बच्चे ने बताया कि उसकी पिटाई सिंघिया थाना क्षेत्र के माही गांव निवासी दुकानदार मोती साहू और उसके बेटे ने की। जब वह दुकान पर स्वीट सुपारी खरीदने के लिए गया था। तभी बिस्किट चोरी के आरोप में दुकानदार उसकी पिटाई करने लगा। उसे 9 बजे सुबह से लेकर शाम 6 बजे तक हाथ-पैर बांधकर पीटा गया। लेकिन गांव के किसी व्यक्ति का दिल नहीं पसीजा ना ही किसी ने उसे बचाया। इस दौरान पंचायत के मुखिया पति दिलीप सिंह भी वही मौजूद थे लेकिन उन्होंने भी बच्चे को बचाने के बदले उसे मारने की बात करते रहे।
सोशल मीडिया पर जब वीडियो वायरल हुआ तब एसपी विनय तिवारी ने मामले की जांच का जिम्मा रोसड़ा एसडीपीओ को दी। जिसके बाद आरोपी पिता-पुत्र को गिरफ्तार किया गया। समस्तीपुर एसपी ने बताया कि बच्चे की पिटाई के दौरान मौजूद जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की संलिप्तता की जांच के आदेश दिये गये हैं। यदि वे लोग भी दोषी होंगे तो उन पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
SAMASTIPUR: कभी-कभी कोई ऐसी घटनाएं सामने आ जाती है जिसे देखकर काफी हैरानी होती है। बात समस्तीपुर की ही ले लीजिए यहां एक नाबालिग मासूम बच्चे की बड़े ही बेरहमी से हाथ पैर बांधकर पीटा गया। इस दौरान बच्चे के ऊपर पानी की तेज बौछार भी किया गया। बिस्किट चोरी का आरोप लगाकर 16 साल के बालक को 9 घंटे तक पीटा गया। लेकिन मौके पर मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे। किसी ने बच्चे को बचाने की कोशिश नहीं की।
हैरानी की बात तो यह है कि जिस समय पिटाई की जा रही थी उस वक्त गांव के जनप्रतिनिधि और मुखिया पति भी मौजूद थे। गांव के किसी भी व्यक्ति ने इस घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी। घटना सिंघिया थाना क्षेत्र के माहे गांव का है। बच्चे की बेरहमी से पिटाई का वीडियो किसी ने अपने मोबाइल से बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। जब इस वीडियो पर नजर समस्तीपुर के पुलिस कप्तान विनय तिवारी की गई तब आनन-फानन में पुलिस की टीम मौके पर भेजी गयी। जिसके बाद पुलिस ने बच्चे को छुड़ाया लेकिन अस्पताल ले जाने के बजाये उसे घर भेज दिया।
पीड़ित ने बताया कि उसे घर भेजने के बाद फिर देर रात में पुलिस आई थी और उसे अस्पताल ले गयी। अस्पताल में कुछ दवा देकर फोटो खिंचवाया और एक आवेदन पर उसके परिवार वालों से अंगुठे का निशान लगवाया गया। बच्चे की बातें सुनकर लोग भी हैरान रह गये। लेकिन सबसे बड़ा सवाल उठता है कि पुलिस शाम को 6 बजे पहुंची थी लेकिन बच्चे को छुड़ाने के बाद उसे सीधा घर भेज दिया। जबकि पहले उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए था। लेकिन शायद पुलिस को अपनी गलती का एहसास हुआ होगा तब फिर देर रात 1:30 बजे पुलिस पीड़ित के घर पहुंच गई और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गयी।
नाबालिग बच्चे ने बताया कि उसकी पिटाई सिंघिया थाना क्षेत्र के माही गांव निवासी दुकानदार मोती साहू और उसके बेटे ने की। जब वह दुकान पर स्वीट सुपारी खरीदने के लिए गया था। तभी बिस्किट चोरी के आरोप में दुकानदार उसकी पिटाई करने लगा। उसे 9 बजे सुबह से लेकर शाम 6 बजे तक हाथ-पैर बांधकर पीटा गया। लेकिन गांव के किसी व्यक्ति का दिल नहीं पसीजा ना ही किसी ने उसे बचाया। इस दौरान पंचायत के मुखिया पति दिलीप सिंह भी वही मौजूद थे लेकिन उन्होंने भी बच्चे को बचाने के बदले उसे मारने की बात करते रहे।
सोशल मीडिया पर जब वीडियो वायरल हुआ तब एसपी विनय तिवारी ने मामले की जांच का जिम्मा रोसड़ा एसडीपीओ को दी। जिसके बाद आरोपी पिता-पुत्र को गिरफ्तार किया गया। समस्तीपुर एसपी ने बताया कि बच्चे की पिटाई के दौरान मौजूद जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की संलिप्तता की जांच के आदेश दिये गये हैं। यदि वे लोग भी दोषी होंगे तो उन पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।