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बिहार में शराबबंदी का हाल देखिये: फेल हो गया नीतीश का खास टास्क फोर्स, सरकार ने गाड़ी-मोबाइल वापस लिया

19-Aug-2022 03:59 PM

PATNA: बिहार में शराबबंदी लागू करने के लिए पानी की तरह सरकारी खजाने का पैसा बहा रही सरकार की हर कोशिश फेल हो रही है. बिहार सरकार के मद्य निषेध विभाग ने शराब पर रोक के लिए खास टास्क फोर्स बनाया था. ये टास्क फोर्स फेल हो गया है. अब सरकार ने टास्क फोर्स को ही खत्म कर दिया है. टास्क फोर्स के सदस्यों को दिया गया मोबाइल और वाहन वापस ले लिया गया है.


एंटी लिकर टास्क फोर्स खत्म

दरअसल बिहार के मद्य निषेध विभाग ने शराब के खिलाफ कार्रवाई के लिए एंटी लिकर टास्क फोर्स का गठन किया था 230 दस्ते बनाये गये थे. एंटी लिकर टास्क फोर्स के इस खास दस्ते को खास संसाधन और विशेष शक्तियां दी गई थीं.सरकार ने एंटी लिकर टास्क फोर्स के 230 दस्ते को गाड़ी और मोबाइल की सुविधा भी दी थी. लेकिन, अब सरकार कह रही है कि एंटी लिकर टास्क फोर्स ठीक तरीके से काम ही नहीं कर रहा है.


उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक की ओर से आदेश जारी कर एंटी लिकर टास्क फोर्स को दी जाने वाली मोबाइल और गाडिय़ों की सुविधा वापस ले ली है. विभाग अब ये कह रहा है कि इस टास्क फोर्स को जितनी सुविधाएं दी गई हैं, उस हिसाब से कार्रवाई नहीं हो पा रही है. ऐसे में विभाग के सीमित बजट का हवाला देते हुए मोबाइल और गाडिय़ां वापस ले ली गई हैं.


एंटी लिकर टास्क फोर्स को भंग करने के बाद मद्य निषेध विभाग के कंट्रोल रूम में आने वाली शराब की शिकायतों को अब सीधे पुलिस थानों को ट्रांसफर किया जा रहा है. बता दें कि शराब से संबंधित शिकायतों के लिए मद्य निषेध विभाग ने कंट्रोल रूम बना रखा है. लोग यहां टॉल फ्री नंबर के जरिये शराब से संबंधित मामलों की शिकायत कर सकते हैं. यहां आने वाली शिकायतों को पहले एंटी लिकर टास्क फोर्स को भेज दी जाती थी. लेकिन अब व्यवस्था बदल दी गयी है. वहीं, एंटी लिकर टास्क फोर्स को जिला प्रशासन से अटैच कर दिया गया है.


वैसे मद्य निषेध विभाग के उपायुक्त कृष्ण कुमार ने बताया कि शराब को लेकर हर रोज औसतन 400 शिकायतें मिल रही हैं. इसमें शराब की अवैध बिक्री से लेकर शराबियों तक की जानकारी दी जा रही है. विभाग इन शिकायतों को सीधे थानों को ट्रांसफर कर रहा है, जहां से तत्काल कार्रवाई की जा रही है. उपायुक्त ने बताया कि पिछले महीने यानि जुलाई में अवैध शराब को लेकर एक लाख से अधिक छापेमारी की गई थी, इनमें 12 हजार से अधिक केस दर्ज किये गये. करीब 20 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जुलाई में करीब चार लाख लीटर अवैध देसी-विदेशी शराब भी जब्त की गई है.