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01-Jul-2023 04:32 PM
By RAKESH KUMAR
ARA: भोजपुर के चर्चित BJP नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड के गवाह कमल किशोर की हत्या के मुख्य आरोपी उमाशंकर मिश्रा को पुलिस और एसटीएफ की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने 50 हजार के इनामी बदमाश उमाशंकर मिश्रा को आरा के रमना मैदान रोड से गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएफ और भोजपुर पुलिस की स्पेशल टीम डीआईयू उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से उमाशंकर का पीछा कर रही थी।
दरअसल, भोजपुर के चर्चित विशेश्वर ओझा हत्याकांड के गवाह कमल किशोर मिश्रा की 28 सितंबर, 2018 को हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी उमाशंकर मिश्रा को गिरफ्तार किया था। साल 2022 में जेल में बंद उमाशंकर मिश्रा के पिता का निधन हो गया था। पिता के श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए उमाशंकर मिश्रा एक महीने के पैरोल पर जेल से बाहर आया था। पेरोल की एक महीने की अवधि खत्म होने के बावजूद उमाशंकर मिश्रा वापस जेल नहीं लौटा और फरार हो गया था।
बाद में पुलिस ने कोर्ट से कुर्की जब्ती का आदेश प्राप्त किया और उमाशंकर मिश्रा के घर की कुर्की की लेकिन उसने पुलिस के सामने सरेंडर नहीं किया। पटना हाई कोर्ट ने उमाशंकर मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए डीजीपी को निर्देश दिया था। सरकार के कुख्यात बदमाश के ऊपर 50 हजार का इनाम घोषित किया था। पुलिस और एसटीएफ की टीम उमाशंकर मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए लगातार कोशिश कर रहे थे लेकिन वह हाथ नहीं आ रहा था।
पुलिस की टीम झारखंड और उत्तर प्रदेश में कुख्यात उमाशंकर मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी। पुलिस को खबर मिली कि वह गोरखपुर में छिपा हुआ है। जिसके बाद पुलिस ने वहां दबिश दी लेकिन पुलिस को चकमा देकर वह आरा पहुंच गया। आरा पहुंचने के बाद उसने अपने वकील से संपर्क साधा और उससे मिलने के लिए कोर्ट जा रहा था, तभी इस बात की जानकारी DIU की टीम को मिल गई और डीआईयू की टीम ने उसे धर दबोचा।
ARA: भोजपुर के चर्चित BJP नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड के गवाह कमल किशोर की हत्या के मुख्य आरोपी उमाशंकर मिश्रा को पुलिस और एसटीएफ की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने 50 हजार के इनामी बदमाश उमाशंकर मिश्रा को आरा के रमना मैदान रोड से गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएफ और भोजपुर पुलिस की स्पेशल टीम डीआईयू उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से उमाशंकर का पीछा कर रही थी।
दरअसल, भोजपुर के चर्चित विशेश्वर ओझा हत्याकांड के गवाह कमल किशोर मिश्रा की 28 सितंबर, 2018 को हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी उमाशंकर मिश्रा को गिरफ्तार किया था। साल 2022 में जेल में बंद उमाशंकर मिश्रा के पिता का निधन हो गया था। पिता के श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए उमाशंकर मिश्रा एक महीने के पैरोल पर जेल से बाहर आया था। पेरोल की एक महीने की अवधि खत्म होने के बावजूद उमाशंकर मिश्रा वापस जेल नहीं लौटा और फरार हो गया था।
बाद में पुलिस ने कोर्ट से कुर्की जब्ती का आदेश प्राप्त किया और उमाशंकर मिश्रा के घर की कुर्की की लेकिन उसने पुलिस के सामने सरेंडर नहीं किया। पटना हाई कोर्ट ने उमाशंकर मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए डीजीपी को निर्देश दिया था। सरकार के कुख्यात बदमाश के ऊपर 50 हजार का इनाम घोषित किया था। पुलिस और एसटीएफ की टीम उमाशंकर मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए लगातार कोशिश कर रहे थे लेकिन वह हाथ नहीं आ रहा था।
पुलिस की टीम झारखंड और उत्तर प्रदेश में कुख्यात उमाशंकर मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी। पुलिस को खबर मिली कि वह गोरखपुर में छिपा हुआ है। जिसके बाद पुलिस ने वहां दबिश दी लेकिन पुलिस को चकमा देकर वह आरा पहुंच गया। आरा पहुंचने के बाद उसने अपने वकील से संपर्क साधा और उससे मिलने के लिए कोर्ट जा रहा था, तभी इस बात की जानकारी DIU की टीम को मिल गई और डीआईयू की टीम ने उसे धर दबोचा।