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07-Mar-2022 11:35 AM
PATNA : बिहार में अफसरशाही को लेकर नीतीश सरकार हमेशा विधायकों के निशाने पर रही है. लेकिन आज बिहार विधानसभा में एक बार फिर से अधिकारियों की मनमानी का मामला उठा. दरअसल, विधानसभा के प्रश्नोत्तर काल में इस मामले को जब विधायकों ने उठाते हुए आरोप लगाया कि अधिकारी विधायकों को पूरा सम्मान नहीं देते हैं तो आरजेडी और बीजेपी के विधायक के एक साथ खड़े हो गए ऐसे में सरकार सदन के अंदर फंस गई.
दरअसल, आरजेडी के विधायक रामबली सिंह यादव ने विधानसभा में आज इस मामले को उठाते हुए आरोप लगाया कि अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं. अधिकारियों के लिए विधायकों के साथ सम्मान को लेकर प्रोटोकॉल तहत लेकिन विधायकों के पत्र तक का जवाब अधिकारी नहीं देते हैं. इसके बाद बीजेपी के विधायक के नीतीश मिश्रा भी सदन में उठ खड़े हुए एक-एक कर कई विधायकों ने सदन में आरोप लगाया कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों के पत्रों का जवाब तक नहीं देते हैं.
बीजेपी विधायक ने कहा कि उनके सैकड़ों पत्रों का एक बार भी जवाब अधिकारियों की तरफ से नहीं आया. अधिकारियों की तरफ से प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने पर सरकार की तरफ से मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बचाव भी किया. उन्होंने कहा कि अधिकारियों के लिए प्रोटोकॉल पहले से तय है. इस मामले को लेकर विधानसभा में हंगामा इतना बढ़ा कि आखिरकार सदस्य मांग करने लगे कि विधानसभा से कमेटी बनाकर इस मामले की जांच करवाई जाए. विधायकों के हंगामे को देखते हुए आखिरकार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने सदन की कमेटी बनाने का ऐलान कर दिया.
विधानसभा अध्यक्ष से 70 विपक्षी सदस्यों ने कहा कि माननीय से जुड़े पत्र को निगरानी करने के लिए विधानसभा की एक प्रोटोकोल कमेटी का गठन किया जाए. आरजेडी के विधायक आलोक मेहता ने आज सवाल उठाते हुए सदन में अपनी बात रखी. जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सभी सदस्यों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए विधानसभा की एक कमेटी बनेगी, जो प्रोटोकॉल कमेटी के नाम से होगी. जो सदस्यों के पत्रों को भेजे गए अधिकारियों के तय समय सीमा निर्धारित करेगी.
इस तरह अधिकारियों की लालफीताशाही और उनकी मनमानी को लेकर नीतीश सरकार की आज सदन में एक बार फिर से बड़ी फजीहत हुई विपक्ष और सत्तापक्ष के विधायक के अधिकारियों की मनमानी के मसले पर एकजुट नजर आए और सरकार बैकफुट पर आ गई.