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Bihar News: मद्य निषेध विभाग के 'अफसर' की काली कमाई...धीरे-धीरे खुल रही पोल, काले धन को सफेद बनाने के लिए 'चाय बगान' से लेकर अस्पताल....

बिहार में शराबबंदी कई अफसरों के लिए अवैध कमाई का जरिया बन गया है. अधिकारी अवैध कमाई से अर्जित धन को सफेद करने में जुटे हैं. इसके लिए तरह-तरह के हथकंड़े अपनाये जा रहे. मद्य निषेध के एक अधिकारी को लेकर विभाग में ही जबरदस्त चर्चा है,जानें...

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19-Sep-2025 11:40 AM

By Viveka Nand

Bihar News: बिहार में भ्रष्टाचार से आम जनता त्रस्त है. नीतीश राज में अफसरशाही करप्शन में लिप्त होकर खूब माल बना रही. ऐसा नहीं कि, सरकार कार्रवाई नहीं कर रही. आर्थिक अपराध इकाई, निगरानी ब्यूरो से लेकर विशेष निगरानी इकाई धनकुबेर सरकारी सेवकों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है. इसके बाद भी भ्रष्टाचारियों के मन में भय पैदा नहीं हो रहा. हाल के दिनों की बात करें तो कई धनकुबेर इंजीनियर, रजिस्ट्रार, कार्यपालक पदाधिकारी, शिक्षा विभाग के अफसर से लेकर अन्य के खिलाफ जांच एजेंसियों ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज कर रेड किया गया है. वैसे जिस हिसाब से सरकारी तंत्र करप्शन में लिप्त है, उस हिसाब से कार्रवाई-सजा नहीं हो रही. लिहाजा धकुबेर अफसरों के मन में भय पैदा नहीं हो रहा. सरकारी सेवा में रहकर धन अर्जित करना और उसे काला से सफेद करने के कई तरीके अपनाये जा रहे हैं. इसके लिए पत्नी को आगे कर खेल किया जा रहा है. 

शराबबंदी कानून बना अकूत कमाई का जरिया

नीतीश सरकार ने 2016 में बिहार में शराबबंदी कानून लागू किया. वैसे तो इस कानून से लागू होने से राज्य भर में अच्छा मैसेज गया, पर धीरे-धीरे शराबबंदी वसूली का माध्यम बन गया है. सरकारी तंत्र में बैठे अधिकारी शराब माफियाओं से मिलकर माल बनाने लगे. शराबबंदी पर सरकार की नजर धीमी पड़ी तो जिम्मेदार अफसरों की चांदी हो गई. खासकर मद्य निषेध विभाग और पुलिस के अफसर-कर्मी के लिए शरारबंदी कानून पैसा वसूली का माध्मय बन गया. बिना मेहनत सिर्फ सेटिंग से मोटी कमाई होने लगी. मद्य निषेध विभाग जिसके जिम्मे शराबबंदी कानून को सफल बनाने का जिम्मा है, इस विभाग के कई अफसरों के लिए यह कानून वरदान साबित हो रही है.

मद्य निषेध विभाग के अफसर की कहानी जानें...

मद्य निषेध विभाग के एक अधिकारी की कहानी बताते हैं. साहब...फील्ड में एक महत्वपूर्ण जिला में अपने डिपार्टमेंट के प्रमुख के पद पर पदस्थापित हैं. वह जिला शराब को लेकर काफी संवेदनशील है.चूंकि शराब के मामले में संवेदनशील है, पड़ोसी राज्य की सीमा से भी नजदीक है. लिहाजा मद्य निषेध के उक्त अधिकारी भी कमाई को लेकर ज्य़ादा ही संवेदनशील हैं. विभागीय सूत्र बताते हैं कि साहब दोनों हाथ से माल बना रहे. माल के लिए अपने एक खास सरकारी सेवक को साथ बनाकर रखे हैं. विभाग ने उक्त सरकारी सेवक को दूसरे जिले के लिए स्थानांतरित कर दिया, इसके बाद भी साहेब का प्रभाव ऐसा कि वो उसे साथ रखे हैं, छोड़ने को तैयार नहीं. विश्वासपात्र जो ठहरा. सारा-हिसाब किताब का लेखा-जोखा जो रखता है. 

हाकिम से जबरदस्त सेटिंग की थी चर्चा... 

मद्य निषेध विभाग के फील्ड(जिला) में पदस्थापित उक्त अधिकारी के बारे में और जान लें. अधिकारी दक्षिण बिहार वाले इलाके में पदस्थापित हैं. विभाग में चर्चा है कि कुछ दिन पहले तक इनका मुख्यालय में जबरदस्त सेटिंग थी. कमाई का कुछ हिस्सा ऊपर तक पहुंचाने के फार्मूले पर काम हो रहा था. इस काम के लिए उक्त दारोगा/इस्पेक्टर को साथ रखे रहे. वह कर्मी सिर्फ फील्ड में ही कमाऊ पूत साबित नहीं हो रहा, बल्कि वह सीमांचल तक काम कर रहा. चाय बागान से लेकर अन्य व्यवसाय़ में भी वह साहेब का काम कर रहा. 

कहां-कहां लगाया पैसा..हो रही तलाश

बताया जाता है कि मद्य निषेध विभाग के उक्त अधिकारी ने हाल के वर्षों में दोनों हाथ से माल बनाया है. काले धन को सफेद करने के लिए दूसरे फार्मूले पर काम किया जा रहा है. अवैध कमाई को अस्पताल के माध्यम से सफेद बनाने पर काम हो रहा. विभाग के सूत्र बताते हैं कि कमाई का पैस चाय बागान में भी लगाया गया है. वैसे बता दें, मद्य निषेध विभाग के उक्त अधिकारी के खेल की भनक ऊपर तक पहुंची है. जांच एजेंसियों के भी काम खड़े हुए हैं. अब देखना होगा कि मद्य निषेध विभाग के इस कमाऊ अफसर का काला चिट्ठा कब तक सामने आता है. वैसे...बहुत कुछ इकट्ठा किया जा चुका है.