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09-Aug-2025 05:53 PM
By Viveka Nand
Bihar News: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजनैतिक कार्यकर्ताओं को विभिन्न आयोग में जगह दी है. इनमें अधिकांश जेडीयू और भाजपा के कार्यकर्ता हैं. किसी को अध्यक्ष तो किसी को उपाध्यक्ष ,महासचिव या सदस्य की जिम्मेदारी दी गई है. अब सरकार ने जगह दे दी तो कुछ ऐसे नेता हैं जो पद को झमकाने, भुनाने में लगे हैं. भोली भाली जनता और राजनैतिक कार्यकर्ताओं के बीच मैसेज देने लगे हैं, उनकी हैसियत क्या है. जनता दल (यू) के एक नेता खुद को राज्यमंत्री बताते फिर रहे. बजाप्ता प्रचारित कर रहे, वे राज्य मंत्री हैं. जबकि बिहार में राज्य मंत्री तो कोई है ही नहीं. आम जनता की बात छोड़िए, खुद मुख्यमंत्री भी नहीं जानते होंगे कि उनके यहां कोई राज्यमंत्री भी है.
जेडीयू के एक नेताजी बने राज्यमंत्री
नीतीश सरकार में एक भी राज्यमंत्री नहीं है, सभी कैबिनेट स्तर के मंत्री हैं. मुख्यमंत्री भी नहीं जानते होंगे कि उनके यहां कोई राज्यमंत्री भी है. लेकिन ऐसा है...हम आपको बता रहे हैं. वो कथित राज्यमंत्री जेडीयू कोटे से हैं. वे खुद को राज्यमंत्री बताते फिर रहे हैं. सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं...वे राज्यमंत्री हैं. अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जेडीयू के उक्त नेता को राज्यमंत्री कब बना दिया..यह समझ से परे है.
सोशल मीडिया पर खुद को बताया राज्यमंत्री
जेडीयू के छपास रोगी नेता खुद को राज्यमंत्री बताते फिर रहे. अपने फेसबुक पेज पर खुद को राज्यमंत्री लिख रहे. पिछले दिनों वे भोजपुर के एक विधानसभा क्षेत्र जहां वो तथाकथित रूप से चुनावी तैयारी में जुटे हैं, गए थे. जाने से पहले अपने फेसबुक पेज पर अपना पद नाम राज्यमंत्री लिखा. उस क्षेत्र की जनता को जानकारी दी कि उनका बाढ़ प्रभावित इलाके में दौरा होने वाला है. वे राज्यमंत्री हैं.
हाल में गठित 'परिषद' में महासचिव की लिस्ट में सबसे निचले नं. पर और बताते फिर रहे राज्यमंत्री
अब पूरे मामले से आपको रूबरू कराते हैं. नेताजी जेडीयू से ताल्लुक रखते हैं..यह बात आप सब लोग जान गए. अब इनके अन्य पहचान पर आइए. नीतीश सरकार ने हाल में एक 'परिषद' का गठन किया है. इसमें नेताओं की फौज को एडजस्ट किया गया है. 30 राजनैतिक कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है. इसमें अध्यक्ष 'पदेन' होते हैं. दो उपाध्यक्ष बनाए गए हैं, वहीं महासचिव की संख्या इस बार 7 कर दी गई है. महासचिव की लिस्ट में जो सबसे निचले पायदन यानि 7वें नंबर पर हैं, वे ही खुद को राज्यमंत्री बताते फिर रहे. जनता के सामने बता रहे कि वे राज्यमंत्री नियुक्त हुए हैं. भला बताइए, महासचिव की लिस्ट में सबसे निचले पायदान पर और बताते फिर रहे राज्यमंत्री. अब आप खुद ही समझ लीजिए, किस तरह से जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम किया जा रहा है.
बता दें, सरकार में शामिल मंत्री चाहे वो कैबिनेट हों या राज्यमंत्री, वे ही कैबिनेट मंत्री या राज्यमंत्री कहे जाते हैं. बाकी जितने भी आयोग, निगम-बोर्ड हैं, जहां नेताओं या रिटायर्ड अधिकारियों को एडजस्ट किया जाता है, वहां दर्जा मिलता है. यानि कैबिनेट मंत्री का दर्जा, राज्यमंत्री या उप मंत्री का दर्जा, उसे दर्जा प्राप्त मंत्री कहकर संबोधित किया जाता है. लेकिन यहां तो आम जनता की आंखों में धूल झोंकना है, जेडीयू के नेताजी खुद को राज्यमंत्री ही बताते फिर रहे हैं. विश्वास न हो तो आप जेडीयू के उक्त फोटो प्रेमी नेताजी का फेसबुक देख लें, सच्चाई का पता चल जायेगा. जानकार बताते है कि ये वही नेताजी हैं जो राजकीय समारोह में सरकार के पीछे फोटो खिंचाते जरूर मिल जायेंगे, मकसद अपना भाव-बाजार बनाना होता है. खुद को राज्यमंत्री बताने के पीछे का उद्देश्य भी बाजार बनाना ही बताया जाता है.