ब्रेकिंग न्यूज़

Prashant Tamang: इंडियन आइडल 3 के विनर प्रशांत तमांग का हार्ट अटैक से निधन, म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री शोक की लहर Prashant Tamang: इंडियन आइडल 3 के विनर प्रशांत तमांग का हार्ट अटैक से निधन, म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री शोक की लहर Tejashwi Yadav : '100 दिन तक कुछ नहीं बोलूंगा ....', 40 दिनों के बाद वापस बिहार आए तेजस्वी यादव,कहा - चुनाव में 'लोक' हारा और 'तंत्र' जीता Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति 2026 की तारीख को लेकर क्यों हैं कंफ्यूजन? जानिए.. सही डेट Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति 2026 की तारीख को लेकर क्यों हैं कंफ्यूजन? जानिए.. सही डेट Virat Kohli : विराट कोहली ने बनाया नया रिकॉर्ड, भारत के लिए खेलकर तोड़ा सौरव गांगुली का रिकॉर्ड; पढ़िए पूरी खबर Bihar New Train: बिहार को आधा दर्जन नई ट्रेनों की सौगात, रेल यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत; इस दिन से होगी शुरुआत Bihar New Train: बिहार को आधा दर्जन नई ट्रेनों की सौगात, रेल यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत; इस दिन से होगी शुरुआत Bihar Crime News: बिहार में ट्रक से 30 लाख रुपए की विदेशी शराब बरामद, तस्करी के नेटवर्क को खंगालने में जुटी पुलिस Farmer Registry ID Bihar : बिहार में Farmer Registry ID बनी किसानों के लिए नई परेशानी, पैतृक जमीन वाले किसान योजनाओं से हो रहे वंचित

10 बेटियों के बाद बेटे का जन्म, 19 साल में 11वीं बार मां बनी हरियाणा की सुनीता

हरियाणा के फतेहाबाद जिले में 10 बेटियों के बाद बेटे के जन्म से परिवार में खुशी की लहर है। 19 साल में 11वीं बार मां बनी सुनीता की कहानी संघर्ष, बेटियों के सम्मान और सामाजिक मिसाल की है।

हरियाणा

10-Jan-2026 03:32 PM

By First Bihar

DESK: 19 साल के लंबे इंतजार और 10 बेटियों को जन्म देने के बाद एक महिला ने बेटे को जन्म दिया है। घर में एक चिराग (बेटा) की कमी थी वह आज पूरी हो गयी है। इस दंपति की सबसे बड़ी बेटी 18 साल की है, जो इंटर की छात्रा है। एक बेटी को इन्होंने रिश्तेदार को गोद में दे दिया है, वही अन्य बेटियां पढाई कर रही है। दस बेटियों के बाद एक बेटे के जन्म से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। क्योंकि बहुत दिनों से इस परिवार को बेटे की चाह थी, दादी ने पोते के लिए भगवान से मन्नत भी मांग रखी थी, उनकी मनोकामना को भगवान ने पूरा किया है। पोते के जन्म से दादी भी काफी खूश हैं।


मामला हरियाणा के फतेहाबाद जिले के भूना ब्लॉक स्थित ढाणी भोजराज गांव का है जहां एक घर में इन दिनों खुशी का माहौल बना हुआ है। 19 साल के लंबे इंतजार के बाद इस घर में बेटे का जन्म हुआ है। संजय और उनकी पत्नी सुनीता 11वीं बार माता-पिता बने हैं और इस बार उन्हें भगवान ने बेटे की सौगात दी है। इससे पहले दंपती की 10 बेटियां हैं। 10 बेटियों के बाद बेटे के जन्म से पूरा परिवार खुश हैं। बहनें भी अपने भाई को देखकर काफी खुश हो गयी। भाई को गोद में लेकर खिलाती नजर आ रही है। एक-एक कर सभी बहनें अपने भाई को गोद में खिलाती रहती हैं। अपने भाई का पूरा ख्याल रख रही हैं।  


बताया जाता है कि संजय और सुनीता की शादी को 19 साल हो चुके हैं। शादी के शुरुआती वर्षों से ही परिवार में बेटे की चाह थी, लेकिन समय के साथ उनके घर एक-एक कर 10 बेटियों ने जन्म लिया। इसके बावजूद संजय और सुनीता ने कभी बेटियों के साथ भेदभाव नहीं किया। सामाजिक तानों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच उन्होंने अपनी सभी बेटियों को समान सम्मान, शिक्षा और परवरिश दी। बच्चों के पिता संजय का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी बेटी 18 साल की है और 12वीं कक्षा में पढ़ रही है, जबकि बाकी बेटियां भी शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा बेटियों की पढ़ाई और संस्कारों को प्राथमिकता दी। गांव के लोग भी इस परिवार को एक मिसाल के रूप में देखते हैं।


हाल ही में सुनीता ने 11वीं संतान को जन्म दिया। खास बात यह रही कि यह डिलीवरी पूरी तरह सामान्य रही। बेहतर इलाज के लिए संजय ने पत्नी को घर से करीब 50 किलोमीटर दूर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जन्म के समय नवजात में खून की कमी पाई गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत उपचार किया। फिलहाल मां और बेटा दोनों स्वस्थ हैं। बेटे के जन्म से पूरे परिवार में उत्सव का माहौल है। मिठाइयां बांटी जा रही हैं और रिश्तेदार बधाई देने पहुंच रहे हैं। संजय की मां माया देवी पोते के जन्म से बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों पुरानी मन्नत अब पूरी हो गई है। संजय के पिता कपूर सिंह का पहले ही निधन हो चुका है और उनके बाद परिवार की जिम्मेदारी संजय ने संभाली।


आर्थिक तंगी के बावजूद संजय के हौसले कभी नहीं टूटे। वह पहले लोक निर्माण विभाग में डेली वेज पर काम करते थे, लेकिन 2018 में काम छूट गया। इसके बाद उन्होंने मनरेगा के तहत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण किया। फिलहाल वह बेरोजगार हैं, लेकिन बच्चों की शिक्षा और जरूरतों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है। संजय बताते हैं कि उनकी एक बेटी रिश्तेदारी में गोद दी गई है, जबकि बाकी नौ बेटियों की जिम्मेदारी वह खुद उठा रहे हैं। उनका मानना है कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं और अगर वे पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें, तो वही परिवार की सबसे बड़ी पूंजी हैं।


19 साल बाद बेटे के जन्म की यह कहानी अब गांव और आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव की सरपंच ज्योति देवी ने इस परिवार को सम्मानित करने की घोषणा की है। हालांकि संजय और सुनीता कहते हैं कि उनकी खुशियां सिर्फ बेटे तक सीमित नहीं हैं। उनके लिए बेटियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। बेटे के जन्म से दोनों काफी खुश हैं। जितनी चर्चा दस बेटियों के जन्म पर नहीं हुई थी उतनी चर्चा इलाके में बेटे के जन्म पर होने लगी है।