BIHAR: दो बाइक की सीधी टक्कर में वकील की मौत, घायल युवक DMCH रेफर मुंगेर में अवैध गिट्टी और बालू ढुलाई पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई, 5 गिरफ्तार, 47 लाख का जुर्माना NEET छात्रा हत्याकांड!: जहानाबाद में 25 KM लंबा मार्च, सरकार पर लीपापोती का आरोप BIHAR: रंगदारी मामले में निलंबित थानाध्यक्ष अमरज्योति ने किया सरेंडर, कोर्ट ने भेजा जेल पटना में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: तीन कॉल सेंटरों पर रेड, 22 गिरफ्तार फ्लैट खरीदारों के हित पर जोर: रेरा बिहार कार्यक्रम में न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह का मार्गदर्शन बिहार में अवैध खनन पर सरकार सख्त: सारण में कई वाहन जब्त, 75.65 लाख का जुर्माना राशनकार्ड धारकों को बड़ी राहत: होली और दिवाली पर मिलेगा मुफ्त गैस सिलेंडर Bihar News: जनगणना को लेकर नीतीश सरकार ने शुरू की तैयारी, समन्वय समिति की हुई बैठक; पूछे जाएंगे आपसे 33 सवाल Bihar News: जनगणना को लेकर नीतीश सरकार ने शुरू की तैयारी, समन्वय समिति की हुई बैठक; पूछे जाएंगे आपसे 33 सवाल
02-Mar-2025 06:09 PM
By First Bihar
UP: महाकुंभ के बाद अब वृंदावन में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाए जाने की मांग उठ रही है। मुस्लिम समाज के लोगों को यहां दुकान ना लगाने और वृंदावन की होली समारोह में शामिल नहीं होने की मांग की गयी है। हिन्दूवादी संगठन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है और यह मांग की है। हिन्दूवादी संगठन ने कहा कि ब्रज क्षेत्र में होली पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए।
हिंदूवादी नेताओं ने वृंदावन में दुकान लगाने को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों के सामने एक शर्त रखी है। धर्मरक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा है कि पिछले दिनों बरेली में मुस्लिम समाज के लोग हमारे लोगों को धमकियां दे नजर आए थे। जिसे देखते हुए धर्मरक्षा संघ ने यह फैसला लिया कि ब्रज क्षेत्र में मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, बरसाना, गोकुल, दाऊजी सहित अन्य तीर्थ स्थलों पर आयोजित होने वाले होली समारोह में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगवाएंगे। इसे लेकर धर्मरक्षा संघ ने सीएम योगी को पत्र लिखकर उनके समक्ष अपनी मांगे रखी है।
वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव एक सांस्कृतिक परंपरा है, जिसमें सदियों से सभी समुदायों की भागीदारी रही है। संविधान और कानून के अनुसार, किसी भी नागरिक को किसी सार्वजनिक स्थल या व्यापारिक गतिविधि से सिर्फ उनके धर्म के आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। यदि प्रशासन इस तरह की मांग को स्वीकार करता है, तो यह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के दायरे में आ सकता है। ऐसी मांगें सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं और धार्मिक आयोजनों को विवादों में डाल सकती हैं। प्रशासन को इस मामले पर संतुलित और संवैधानिक तरीके से निर्णय लेना चाहिए, ताकि समाज में कोई अनावश्यक तनाव न पैदा हो।