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26-Nov-2025 07:34 AM
By First Bihar
Constitution Day India: हर वर्ष 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन देश राष्ट्रीय कानून दिवस भी मनाता है। यह वह तारीख है जिसने भारत को न सिर्फ एक संविधान दिया, बल्कि हर नागरिक को स्वतंत्रता, समानता और अधिकारों के साथ जीने की संविधानिक गारंटी भी प्रदान की। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारत के संविधान को औपचारिक रूप से अपनाया और यह दिन इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। संविधान ने देश को लोकतांत्रिक ढांचा दिया, नागरिकों को मौलिक अधिकार दिए और उनके कर्तव्यों को भी निर्धारित किया। यही वह दस्तावेज है जिसने हमें एक संप्रभु राष्ट्र के स्वतंत्र नागरिक होने का गौरव प्रदान किया।
क्यों मनाया जाता है संविधान दिवस?
संविधान दिवस मनाने की आधिकारिक घोषणा वर्ष 2015 में की गई थी। यह वर्ष संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती का वर्ष था। केंद्र सरकार ने 26 नवंबर को संविधान दिवस घोषित करते हुए इसे हर नागरिक में संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संवैधानिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार का अवसर बनाया। आज यह दिवस स्कूलों, कॉलेजों, संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में विशेष रूप से मनाया जाता है, जहां संविधान की प्रस्तावना पढ़कर लोकतांत्रिक भावनाओं को सशक्त किया जाता है।
26 नवंबर और 26 जनवरी में क्या अंतर?
26 नवंबर 1949 — संविधान अपनाया गया
26 जनवरी 1950 — संविधान लागू हुआ और भारत एक गणतांत्रिक राष्ट्र बना
हालांकि संविधान 26 नवंबर को तैयार हो गया था, लेकिन इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी 1950 की तारीख तय की गई, क्योंकि इस दिन देश की स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़ी बड़ी ऐतिहासिक घटना दर्ज है। 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया था। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाहौर में रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराते हुए पूर्ण आजादी की घोषणा की थी। इसी कारण इस तिथि को संविधान लागू करने के लिए चुना गया। इस दिन से भारत औपचारिक रूप से गणतंत्र बन गया।
क्यों खास है भारत का संविधान?
भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसमें ब्रिटेन, अमेरिका, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और जापान की संवैधानिक व्यवस्थाओं से प्रेरित अनेक प्रावधान शामिल किए गए। इसमें नागरिकों के मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य, न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका की शक्तियाँ स्पष्ट की गईं। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, संसद, पंचायती राज और न्याय व्यवस्था की भूमिका और अधिकार विस्तार से लिखे गए हैं। यह संविधान न केवल अधिकार देता है बल्कि नागरिकों को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य निभाने की जिम्मेदारी भी याद दिलाता है। इसी कारण इसे लोकतंत्र की आत्मा कहा जाता है।
कितने दिन में तैयार हुआ संविधान?
भारत का संविधान तैयार होने में कुल 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। इसे कई बार संशोधित, चर्चा और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अंतिम रूप दिया गया। सबसे विशेष तथ्य यह है कि संविधान की मूल प्रति हाथ से लिखी गई थी। इसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने सुंदर इटैलिक कैलिग्राफी में अंग्रेजी भाषा में हाथ से लिखा था। मूल प्रति आज भी संसद की लाइब्रेरी में सुरक्षित है और विशेष तापमान नियंत्रण में रखी जाती है। संविधान की प्रत्येक पृष्ठ पर भारतीय कलाकृति और इतिहास की झलक भी देखने को मिलती है।