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13-Oct-2025 10:00 AM
By First Bihar
Human On Moon: चांद पर इंसान का रहना अब एक नया दौर साबित हो सकता है, लेकिन इसके साथ कई शारीरिक और मानसिक समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। आइए जानते हैं कि अगर इंसान चंद्रमा पर जीवन बिताए तो उसके शरीर में किस तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
इंसान अब अंतरिक्ष में रहने के सपने को सच करने के करीब पहुंच रहा है। नासा और स्पेसएक्स जैसी कंपनियां चांद और मंगल पर लोगों को बसाने की तैयारी कर रही हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर इंसान सच में चांद पर रहने लगे, तो उसके शरीर पर क्या असर पड़ेगा? चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी से छः गुना कम है और वहां का वातावरण खतरनाक रेडिएशन से भरा हुआ है। ऐसे माहौल में इंसानी शरीर और दिमाग में कई बड़े बदलाव हो सकते हैं। आइये जानते है क्या- क्या होगा बदलाव:
कम गुरुत्वाकर्षण का असर
पृथ्वी पर हमारा शरीर 1G ग्रैविटी का आदि होता है, लेकिन चांद पर ये केवल 0.16G होती है। इसका मतलब है कि वहां रहने पर इंसान की हड्डियां और मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर हो जाएंगी। रिसर्च में पाया गया है कि अंतरिक्ष में रहने से हर महीने हड्डियों की ताकत करीब 1% तक कम हो सकती है। लंबे समय तक वहां रहना हड्डियों से जुड़ी गंभीर बीमारियां ला सकता है।
दिल और खून के बहाव में बदलाव
कम ग्रैविटी की वजह से शरीर में खून ऊपर की तरफ यानी सिर की ओर जाने लगता है। इससे चेहरे पर सूजन आ सकती है, सिर दर्द हो सकता है और आंखों पर दबाव बढ़ सकता है। लंबे समय में यह नजर की कमजोरी और दिल की मांसपेशियों के कमजोर होने का कारण बन सकता है।
रेडिएशन का खतरा
चांद पर पृथ्वी की तरह कोई ओजोन परत नहीं है जो रेडिएशन से बचाए। वहां सूरज और ब्रह्मांड से आने वाली किरणें सीधे शरीर पर असर डालती हैं। इससे कैंसर, डीएनए को नुकसान और इम्यून सिस्टम कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि चांद पर एक साल रहना उतना रेडिएशन देगा जितना पृथ्वी पर कई सौ सालों में मिलता है।
मानसिक असर
चांद पर रहना केवल शरीर पर ही नहीं, दिमाग पर भी असर डाल सकता है। सूरज की रोशनी की कमी, अलग माहौल और नींद के पैटर्न में बदलाव से डिप्रेशन, चिंता और एकाग्रता की कमी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
इन सभी खतरों से बचने के लिए वैज्ञानिक "लूनर हैबिटैट्स" तैयार कर रहे हैं – यानी चांद पर रहने के लिए खास घर, जिनमें आर्टिफिशियल ग्रैविटी, रेडिएशन से सुरक्षा और बंद इकोसिस्टम जैसी तकनीकें होंगी ताकि इंसान सुरक्षित रह सके।