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Bihar Election 2025: NDA में तो सब तय फिर इस बात का संकेत देने में लगे हैं नेता जी ! कार्यकर्ता के बहाने दिखा रहे खुद का दर्द या सच में दे रहे संदेश; आखिर क्यों हो रहा ऐसा

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए में सीट बंटवारा का फार्मूला आखिरकार तय कर लिया गया है। इस बार का बंटवारा कई मायनों में अलग और दिलचस्प रहा। सबसे बड़ी बात यह रही कि एनडीए में लंबे समय से चला आ रहा “बड़ा भाई–छोटा भाई” वाला फार्मूला...

13-Oct-2025 07:11 AM

By First Bihar

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए में सीट बंटवारा का फार्मूला आखिरकार तय कर लिया गया है। इस बार का बंटवारा कई मायनों में अलग और दिलचस्प रहा। सबसे बड़ी बात यह रही कि एनडीए में लंबे समय से चला आ रहा “बड़ा भाई–छोटा भाई” वाला फार्मूला इस बार पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। भाजपा और जदयू के बीच अब बराबरी की हिस्सेदारी पर जोर दिया गया है, जबकि छोटे सहयोगी दलों को सीमित संख्या में सीटें देकर मनाने की कोशिश की गई है। हालांकि, इस सीट बंटवारे के बाद एनडीए के अंदर से जो आवाजें उठीं, उन्होंने बता दिया कि अंदरूनी असंतोष अभी खत्म नहीं हुआ है।


दरअसल, एनडीए में इस बार सीटों के वितरण का आधार “एक लोकसभा सीट पर पांच विधानसभा सीटें” का फार्मूला माना गया था। लेकिन बड़ी पार्टी होने के बावजूद भाजपा ने इस फार्मूले को हर सहयोगी दल पर समान रूप से लागू नहीं किया। यही वजह रही कि सीट बंटवारे के तुरंत बाद एनडीए के कुछ घटक दलों में असंतोष की झलक साफ दिखाई दी। शुरुआत हुई हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से। मांझी ने पहले तो मीडिया के सामने संयम दिखाते हुए कहा कि “भाजपा ने मुझे जो सीट दी, वह मुझे मंजूर है। लोकसभा चुनाव में भी जब एक सीट मिली थी तब कुछ नहीं कहा और अब भी नहीं बोल रहा हूं।” लेकिन जैसे-जैसे रात बढ़ी और पार्टी कार्यकर्ताओं का दबाव आया, मांझी का दर्द भी छलक पड़ा। उन्होंने एक समाचार एजेंसी से कहा कि “एनडीए में मुझे थोड़ा और सीट मिलना चाहिए था। हम पिछली बार से अधिक सीट डिजर्व करते थे। अब जो हो गया, सो हो गया, लेकिन मुझे लगता है इसका खामियाजा एनडीए को भुगतना पड़ेगा।”


इसी तरह एनडीए के एक और सहयोगी, रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी पहले तो संतोष जताया। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि मुझे एनडीए में छह सीटें दी गईं।” लेकिन देर रात उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के नाम एक भावनात्मक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि इस फार्मूले से आप खुश नहीं होंगे। कई घरों में खाना तक नहीं बना होगा। पार्टी के कई मजबूत कार्यकर्ताओं को झटका लगा होगा, लेकिन मेरी मजबूरी थी कि मुझे यह फैसला लेना पड़ा। अब आप खुद तय करें कि मेरा यह निर्णय कितना सही या गलत है।” कुशवाहा का यह बयान साफ इशारा कर रहा था कि उनके मन में भी कहीं न कहीं असंतोष है, लेकिन वह इसे खुलकर जाहिर नहीं करना चाहते।


वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही। उन्होंने कहा कि उन्हें चार से पांच सीटें कम मिली हैं, लेकिन बिहार के विकास और एनडीए की सरकार बनाने के लिए उन्होंने समझौता किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी का लोकसभा चुनाव में “100% स्ट्राइक रेट” रहा, हालांकि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उनकी जीत का असली कारण एनडीए की सामूहिक लहर और भाजपा का समर्थन था। इसके बावजूद, चिराग पासवान ने भाजपा नेतृत्व से अपनी बात मनवा ली, जिसका असर सीट बंटवारे के आधिकारिक फार्मूले में साफ देखा जा सकता है।


कुल मिलाकर, बिहार एनडीए में सीट बंटवारे का यह अध्याय जहां एक तरफ गठबंधन की एकता दिखाने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर अंदरूनी नाराजगी और असंतोष की परतें भी उजागर करता है। भाजपा ने गठबंधन की मजबूती बनाए रखने के लिए छोटे सहयोगियों को भरोसे में लेने की कोशिश की है, लेकिन कई नेताओं के बयान इस ओर इशारा कर रहे हैं कि चुनाव के दौरान यह असंतोष कहीं बड़ा मुद्दा न बन जाए। अब देखना होगा कि क्या यह सीट बंटवारा एनडीए के लिए मजबूती का कारण बनेगा या फिर चुनावी मैदान में नए समीकरणों की नींव रखेगा।