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21-Nov-2025 10:34 AM
By First Bihar
NDA Bihar government : बिहार में एक बार फिर बदला हुआ सियासी परिदृश्य देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए सरकार का गठन हो चुका है। नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने डिप्टी सीएम के रूप में शपथ ग्रहण किया। इसके साथ ही 26 मंत्रियों को भी कैबिनेट में जगह दी गई, लेकिन सबसे अधिक चर्चा अब विभागों के बंटवारे को लेकर है — आखिर इस बार कौन सा मंत्रालय किसके हिस्से में आएगा?
बीजेपी को मिला बढ़त वाला आंकड़ा
इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी कोटे से 14 मंत्रियों को शामिल किया गया है, जबकि जेडीयू के केवल 8 मंत्री बने हैं। एलजेपी (आर) से 2 और आरएलएम व हम से एक-एक मंत्री बनाए गए हैं। यानी संख्या के हिसाब से बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा है। हालांकि, अभी भी 9 मंत्री पद खाली हैं, जिन पर आगे नियुक्तियां होंगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बीजेपी विभागों के बंटवारे में भी अपनी बढ़त बनाए रखेगी? या फिर नीतीश कुमार फिर वही पुराने राजनीतिक कौशल का परिचय देकर महत्वपूर्ण विभागों को अपने पास रखेंगे?
सीटों में मामूली अंतर, लेकिन दांव-पेंच गहरे
2020 के मुकाबले इस बार जेडीयू और बीजेपी की सीटों में ज्यादा अंतर नहीं है। बीजेपी के पास 89 विधायक हैं जबकि जेडीयू 85 सीटों के साथ लगभग बराबरी पर है। 2020 में बड़ी संख्या होने के बावजूद बीजेपी हाई-प्रोफाइल मंत्रालयों पर पकड़ नहीं बना सकी थी। नीतीश कुमार ने तब भी गृह, सामान्य प्रशासन और अन्य अहम विभाग अपने पास रखे थे। इस बार हालांकि हालात अलग हैं, लेकिन नीतीश का राजनीतिक अनुभव और वजूद अभी भी राज्य की राजनीति में भारी पड़ता माना जाता है।
स्पीकर पद का संकेत – बीजेपी को बढ़त?
विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर कई दिनों तक खींचतान चली। अंततः यह पद बीजेपी के हिस्से में जाता दिख रहा है, और प्रेम कुमार को स्पीकर बनाए जाने की चर्चा है। यह उन संकेतों में शामिल है जिनसे माना जा रहा है कि इस बार बीजेपी राजनीतिक सौदेबाजी में कुछ कदम आगे दिखाई दे सकती है।
गृह मंत्रालय: नीतीश का 'सबसे महत्वपूर्ण कार्ड'
गृह विभाग बिहार की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालय माना जाता है। प्रशासन, पुलिस, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार नियंत्रण — इन सब पर सीधी पकड़ इसी मंत्रालय से मिलती है। यही वह विभाग है जिसके सहारे नीतीश कुमार ने खुद को "सुशासन बाबू" के रूप में स्थापित किया। 2024 में भी बीजेपी ने गृह विभाग के लिए पूरी ताकत लगाई थी, लेकिन नीतीश ने यह मंत्रालय नहीं छोड़ा। इस बार भी माना जा रहा है कि नीतीश कुमार गृह मंत्रालय अपने पास ही रखने की कोशिश करेंगे और शायद इसमें सफल भी हों।
फाइनेंस और शिक्षा पर टकराव के पूरे आसार
स्वास्थ्य, वित्त, शिक्षा और लोक निर्माण इस समय सबसे चर्चित विभाग हैं। परंपरागत रूप से वित्त विभाग बीजेपी के पास रहा है — सुशील मोदी से लेकर तारकिशोर प्रसाद और फिर सम्राट चौधरी तक। हालांकि महागठबंधन सरकार में यह मंत्रालय जेडीयू के विजय चौधरी के पास था। जब नीतीश 2024 में एनडीए में लौटे, तब भी माना जा रहा था कि शिक्षा मंत्रालय बीजेपी को मिल सकता है, लेकिन बाद में वित्त विभाग फिर से बीजेपी को मिला।
इस बार भी वित्त मंत्रालय को लेकर दोनों दलों की दिलचस्पी बराबर है। शिक्षा पर भी बीजेपी की नजर है, क्योंकि वह इस मंत्रालय के जरिए अपनी वैचारिक पकड़ मजबूत करना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी गृह और शिक्षा, दोनों चाहती है, जबकि जेडीयू वित्त और ग्रामीण विकास मंत्रालय को प्राथमिकता दे रही है।
फिलहाल किनके पास क्या था?
बीजेपी के पास थे:
वित्त, नगर विकास, स्वास्थ्य, उद्योग, पशु एवं मत्स्य संसाधन, पंचायती राज, खेल, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, कृषि, श्रम, पथ निर्माण, भूमि सुधार, पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण आदि।
जेडीयू के पास थे:
गृह, सामान्य प्रशासन, निगरानी, निर्वाचन, जल संसाधन, संसदीय कार्य, ऊर्जा, शिक्षा, सूचना एवं जनसंपर्क, योजना एवं विकास, ग्रामीण विकास, समाज कल्याण, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा आदि।
किसे क्या मिल सकता है? – संभावित बंटवारा
बीजेपी के खाते में आने की संभावना:
राजस्व विभाग
पशु एवं मत्स्य
पर्यटन
उद्योग
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण
विधि
पथ निर्माण
सहकारिता
जेडीयू के हिस्से जा सकता है:
कृषि
जल संसाधन
संसदीय कार्य
ऊर्जा
योजना एवं विकास
तकनीकी शिक्षा
ग्रामीण विकास
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण
सूत्र बताते हैं कि बीजेपी गृह और शिक्षा चाहती है, बदले में स्वास्थ्य और वित्त छोड़ने को तैयार है। लेकिन जेडीयू गृह छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन की राजनीति में किसकी रणनीति भारी पड़ती है — बीजेपी की संख्या या नीतीश कुमार का तजुर्बा?
बिहार में मंत्रिमंडल गठन के बाद सबसे बड़ा सवाल अब विभागों के बंटवारे का है। बीजेपी इस बार संख्या बल के साथ है, लेकिन नीतीश कुमार ने हमेशा महत्वपूर्ण मंत्रालयों पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है। आगामी दिनों में यह साफ हो जाएगा कि बिहार की नई एनडीए सरकार में असली नियंत्रण किसके पास रहेगा — बीजेपी या फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।