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NHAI projects Bihar : बिहार को मिली दो बड़ी सड़क परियोजनाओं की सौगात, चुनाव खत्म होते ही केंद्र सरकार ने दी मंजूरी

NHAI projects Bihar : बिहार को चुनाव खत्म होते ही केंद्र सरकार से दो बड़ी सड़क परियोजनाओं की सौगात मिली है। खगड़िया-पूर्णिया और मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सड़कों को वित्तीय मंजूरी मिल गई है। करीब 233 किमी लंबी इन परियोजनाओं पर 6 हजार करोड़ खर्च होंग

NHAI projects Bihar : बिहार को मिली दो बड़ी सड़क परियोजनाओं की सौगात, चुनाव खत्म होते ही केंद्र सरकार ने दी मंजूरी

18-Nov-2025 08:44 AM

By First Bihar

NHAI projects Bihar : बिहार चुनाव समाप्त होते ही राज्य को केंद्र सरकार की तरफ से एक बड़ी सौगात मिली है। लंबे समय से लंबित दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) परियोजनाओं खगड़िया-पूर्णिया और मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा को आखिरकार वित्तीय मंजूरी मिल गई है। दोनों सड़कों की कुल लंबाई लगभग 233 किलोमीटर है और इन पर करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वित्तीय अनुमति के बाद इन परियोजनाओं की अंतिम स्वीकृति का प्रस्ताव अब केंद्र सरकार की कैबिनेट के सामने जाएगा।


दोनों सड़कों का चौड़ीकरण जल्द शुरू होगा

एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार यह दोनों सड़कें वर्तमान समय में दो लेन की हैं। लेकिन बढ़ते यातायात और क्षेत्रीय विकास की जरूरतों को देखते हुए इन्हें चार लेन में विस्तारित किया जाएगा। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि वित्तीय मंजूरी के बाद निविदा (टेंडर) की प्रक्रिया पूरी होते ही इन दोनों परियोजनाओं पर मौजूदा वित्तीय वर्ष में ही निर्माण कार्य शुरू हो जाए।


बिहार सरकार ने इन दोनों परियोजनाओं की मंजूरी का प्रस्ताव पहले ही भेज दिया था। यह प्रस्ताव केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन आर्थिक कार्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता में गठित पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेज़ल कमेटी (PPPAC) के पास लंबित था। अब इस कमेटी ने दोनों परियोजनाओं को मंजूरी देते हुए निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है।


खगड़िया-पूर्णिया सड़क बनेगी HAM मोड में

खगड़िया से पूर्णिया के बीच लगभग 130 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा। इस मॉडल की खासियत यह है कि निर्माण लागत का 60% हिस्सा निर्माण कंपनी वहन करेगी, जबकि बचे हुए 40% खर्च केंद्र सरकार देगी। निर्माण पूरा होने के बाद कंपनी को निश्चित समय तक टोल टैक्स वसूलने का अधिकार होगा, जिससे वह अपनी लागत वापस पाएगी। HAM मॉडल को देश में सड़क निर्माण का सबसे संतुलित और सुरक्षित मॉडल माना जाता है क्योंकि इससे सरकार और प्राइवेट कंपनी दोनों का आर्थिक जोखिम संतुलित रहता है।


सीतामढ़ी-सोनबरसा मार्ग होगा BOT मोड में

दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना, मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा मार्ग, BOT (बिल्ट, ऑपरेट, ट्रांसफर) मॉडल पर बनाई जाएगी। इस मॉडल में निर्माण की पूरी लागत निर्माण एजेंसी वहन करती है, सरकार केवल निर्माण अवधि में आंशिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है,निर्माण एजेंसी टोल टैक्स से अपनी लागत वसूल करती है। सीतामढ़ी और सोनबरसा सीमा क्षेत्र के लिए यह सड़क अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस मार्ग के विकसित होने से नेपाल सीमा के निकट व्यापार और परिवहन के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी जिलों के बीच आवागमन सुगम होने से दोनों जिलों की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।


टेंडर प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ

PPPAC से मंजूरी मिलते ही इन दोनों परियोजनाओं के टेंडर जारी करने का रास्ता साफ हो गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि टेंडर की प्रक्रिया दिसंबर तक शुरू हो सकती है और निर्माण कार्य जनवरी-फरवरी से सक्रिय रूप से प्रारंभ हो जाएगा। एनएचएआई का लक्ष्य है कि बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क मजबूत बनाकर औद्योगिक, कृषि और व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा दी जाए। राज्य में कई अन्य सड़क परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं, जिनमें गंगा एक्सप्रेसवे और पटना रिंग रोड जैसी योजनाएं प्रमुख हैं।


बिहार को आर्थिक विकास का नया रास्ता

इन दोनों सड़क परियोजनाओं को बिहार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खगड़िया-पूर्णिया सड़क उत्तर बिहार के कई जिलों के बीच तेज और सुरक्षित परिवहन की सुविधा प्रदान करेगी। वहीं सीतामढ़ी-सोनबरसा मार्ग से न केवल स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा, बल्कि सीमा व्यापार और लॉजिस्टिक्स को भी नई रफ्तार मिलेगी।


चुनाव के बाद बिहार को मिली यह दोहरी सौगात निश्चित रूप से राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। चार लेन सड़कों का निर्माण पूरा होने के बाद इन मार्गों पर यात्रा समय घटेगा, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और स्थानीय बाजारों तथा उद्योगों की गतिविधियों को बहुत लाभ मिलेगा। यह परियोजनाएं पूरी होने पर बिहार में सड़क नेटवर्क का विस्तार नई गति से होगा और आने वाले वर्षों में इसका सीधा असर राज्य के आर्थिक विकास पर भी दिखाई देगा।