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05-Nov-2025 02:20 PM
By First Bihar
Bihar Voting : बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में सुरक्षा दृष्टि से चुनाव आयोग ने एक बड़ा निर्णय लिया है। आयोग ने छह विधानसभा क्षेत्रों के 2,135 मतदान केंद्रों पर मतदान का समय एक घंटा कम कर दिया है। इन सभी केंद्रों पर अब सुबह 7 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक ही मतदान होगा। यह फैसला संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा व पूर्व की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। वहीं बाकी के 115 विधानसभा क्षेत्रों के सभी 43,206 मतदान केंद्रों पर मतदान समय पहले की तरह सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा।
चुनाव आयोग द्वारा जिन विधानसभा क्षेत्रों के मतदान समय में कमी की गई है, उनमें सिमरी बख्तियारपुर के 410 मतदान केंद्र, महिषी के 361, तारापुर के 412, मुंगेर के 404, जमालपुर के 492 और सूर्यगढ़ा के 56 मतदान केंद्र शामिल हैं। ये केंद्र नदी से दूर, दुर्गम मार्गों और संवेदनशीलता के कारण विशेष सुरक्षा व्यवस्था की श्रेणी में रखे गए हैं।
गौरतलब है कि बिहार में इस बार पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान 6 नवंबर को होना है। इस चरण में कुल 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं और इनमें नीतीश सरकार के 16 मंत्री भी शामिल हैं। आयोग ने संवेदनशील और अतिसंवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती के साथ ड्रोन और वीडियोग्राफी की भी विशेष व्यवस्था की है।
पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार मंगलवार की शाम 6 बजे थम गया। पहले चरण में कुल 45,324 मतदान केंद्र (बूथ) बनाए गए हैं, जिनमें ग्रामीण इलाकों में 36,733 और शहरी क्षेत्रों में 8,608 बूथ शामिल हैं। इनमें से 926 बूथों का संचालन महिलाओं द्वारा और 107 बूथों का संचालन दिव्यांग मतदाताओं द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा 320 बूथों को मॉडल बूथ के रूप में तैयार किया गया है ताकि मतदाताओं को बेहतर सुविधा मिल सके।
पहले चरण के जिन क्षेत्रों में मतदान होना है, उनमें कई जगह नक्सल प्रभावित इलाक़े भी शामिल हैं। यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन ने अपनी तैयारियों को पुख्ता किया है। नदी पार मतदान केंद्रों तक सुरक्षा बलों को पहले से ही भेजा जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की बाधा न आए। मतदाता जागरूकता अभियान भी लगातार चलाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग मतदान में हिस्सा लें।
प्रचार की अवधि समाप्त होने के बाद अब उम्मीदवारों के साथ-साथ आम मतदाताओं की निगाहें 6 नवंबर पर टिकी हैं। इस चरण की सीटें सूबे की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं और इनके नतीजे भविष्य की सत्ता की दिशा को तय कर सकते हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सुरक्षा की अतिरिक्त व्यवस्था, वोटिंग समय में बदलाव और नेताओं के जोरदार प्रचार से मतदान प्रतिशत पर क्या असर पड़ता है। परिणाम 14 नवंबर को आएंगे और तब यह साफ होगा कि जनता ने किसके विकास मॉडल पर मुहर लगाई है।