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06-Nov-2025 01:47 PM
By First Bihar
Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग के दौरान नालंदा जिले के बिहारशरीफ में हल्का तनाव देखने को मिला। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 16 के अंतर्गत अंबेर तीन-मुहानी इलाके में बूथ संख्या 226 से 232 के पास चार बीजेपी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद स्थानीय स्तर पर गर्मागर्मी बढ़ गई और राजनीतिक तनाव का माहौल बन गया।
क्या है पूरा मामला?
बिहारशरीफ से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रत्याशी डॉ. सुनील कुमार के समर्थक मतदान क्षेत्र में वोटर स्लिप बांट रहे थे। इसी दौरान बिहार थाना के एसआई रवि कुमार की नजर उन पर पड़ी। पुलिस का कहना था कि बूथ क्षेत्र के अंदर या उसके तुरंत आसपास इस तरह की गतिविधि आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। इसलिए चार कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं और स्थानीय पार्षद प्रतिनिधियों का दावा इससे बिल्कुल उलट है। उनका कहना है कि वे लोग बूथ से निर्धारित दूरी पर खड़े होकर ही मतदाताओं की सहायता कर रहे थे और उनके पास इसके प्रमाण भी थे।
प्रत्याशी और समर्थकों ने लगाए गंभीर आरोप
घटना के बाद बीजेपी प्रत्याशी डॉ. सुनील कुमार मौके पर पहुंचे और उन्होंने पुलिस पर आरजेडी समर्थक होने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक पुलिस बिना किसी वजह के कार्यकर्ताओं को उठाकर ले गई और धमकाया भी। “शांतिपूर्ण मतदान चल रहा था। पता नहीं दारोगा को हमसे क्या दुश्मनी है। हमारे चार लड़कों को जबरन उठा ले गए और कहा कि यहां काम नहीं करने देंगे। यह खुला पक्षपात है।” — डॉ. सुनील कुमार, प्रत्याशी, बिहारशरीफ
पार्षद प्रतिनिधि आशीष रंजन भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते नजर आए। उन्होंने दावा किया कि बीएलओ द्वारा मतदाता पर्ची सही तरीके से नहीं बांटी गई थी, जिसके कारण वे अपनी ओर से मतदाताओं को स्लिप उपलब्ध करा रहे थे। उनके अनुसार पुलिस ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं को पकड़ा बल्कि वोटर लिस्ट, पहचान पर्चियां और अन्य सामान भी जब्त कर लिया। उन्होंने कहा कि: “हम बूथ से 150 मीटर दूरी पर थे। फिर भी दारोगा ने हाथापाई कर धमकी दी। यह सरासर गलत है।”
पुलिस की सफाई
बवाल बढ़ने के बाद थाना प्रभारी सम्राट दीपक ने बयान जारी करते हुए कहा कि किसी भी तरह की गड़बड़ी की सूचना पर पुलिस सतर्क रहती है। उन्होंने मामले की जांच का आश्वासन दिया। “जानकारी मिली है। जांच की जा रही है। ज्यादा चिंता वाली बात नहीं है।” पुलिस इस घटना को सामान्य चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बताकर शांत रहने की अपील कर रही है। वहीं बीजेपी समर्थक इसे राजनीतिक तरफदारी बताने पर अड़े हुए हैं।
बीएलओ की लापरवाही की शिकायतें कई मतदान केंद्रों से पहले भी आती रही हैं। ऐसे में राजनीतिक दल अक्सर स्वयं वोटिंग स्लिप बांटते हैं ताकि कोई मतदाता वोट देने से चूक न जाए। मगर, मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में चुनाव प्रचार या पर्ची बांटना प्रतिबंधित है। विवाद का केंद्र यही है — पुलिस कह रही है कि नियमों का उल्लंघन हुआ, जबकि बीजेपी का दावा है कि वे निर्धारित दूरी पर ही थे।
माहौल पर असर
हालांकि घटना के कारण थोड़ी देर के लिए अफरातफरी जरूर मची, लेकिन वोटिंग में खास रुकावट नहीं आई। सुबह से ही बड़ी संख्या में मतदाता बूथों पर पहुंच रहे थे और महिलाओं व युवाओं में विशेष उत्साह दिखा। स्थानीय चुनाव पर्यवेक्षकों ने भी हालात पर नजर बनाए रखी और सुरक्षा बलों को एरिया में सघन निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।