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14-Nov-2025 03:25 PM
By First Bihar
Bodh Gaya election result : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना के बीच बोध गया सीट से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और उसके नेता तेजस्वी यादव के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जहां कई सीटों पर कड़ा मुकाबला जारी है, वहीं बोध गया से आरजेडी ने अपना खाता खोल दिया है। यहां पार्टी के उम्मीदवार कुमार सर्वजीत ने चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रत्याशी पर छोटी लेकिन निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए 881 वोटों से जीत दर्ज की है। इस जीत को तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी के लिए मनोबल बढ़ाने वाली खबर माना जा रहा है।
कड़ी टक्कर के बीच आरजेडी की जीत
बोध गया सीट शुरू से ही सुर्खियों में रही है। चिराग पासवान की पार्टी ने इस सीट पर काफी जोर-शोर से चुनाव लड़ा था। चुनाव प्रचार के दौरान लोजपा (रामविलास) के उम्मीदवार ने मजबूत पकड़ दिखाते हुए कई जगहों पर अच्छी बढ़त बनाई थी, लेकिन जैसे-जैसे काउंटिंग आगे बढ़ी, कुमार सर्वजीत ने स्थिर और निरंतर बढ़त बनाना शुरू कर दिया। अंतिम राउंड में उन्होंने 881 वोटों की बढ़त बनाकर सीट अपने नाम कर ली।
यह जीत इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि इस बार कई सीटों पर त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। कई क्षेत्रों में बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। ऐसे में आरजेडी के खाते की यह शुरुआती सफलता पार्टी के कैंप में उत्साह भर रही है।
तेजस्वी यादव को मिला मनोवैज्ञानिक लाभ
पिछले दिनों आरजेडी के सामने कई चुनौतियां खड़ी हुई थीं। एनडीए की लहर पर सवार बीजेपी और जेडीयू कई क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए हैं। ऐसे माहौल में बोध गया की जीत तेजस्वी यादव के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का बल बढ़ा है और मतगणना केंद्र पर मौजूद आरजेडी समर्थकों ने परिणाम के बाद जमकर जश्न मनाया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीत का असर अन्य सीटों पर भी पड़ सकता है। यह कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाएगा कि मुकाबला अभी बाकी है और मेहनत का फल मिल सकता है।
बोध गया सीट का राजनीतिक महत्व
बोध गया एक सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीट है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध बौद्ध स्थल होने की वजह से यह सीट हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल रहती है। यहां का मतदाता शांत स्वभाव का माना जाता है, लेकिन चुनावी समीक्षा में यह सीट कई बार सबको चौंका देती है। इस बार भी वोटरों ने एक बार फिर चुपचाप अपना फैसला सुनाया। चुनाव अभियानों में जातीय समीकरणों और स्थानीय मुद्दों के साथ ही पर्यटन और विकास जैसे पहलू भी प्रमुख थे।
कुमार सर्वजीत की रणनीति ने दिलाई जीत
आरजेडी उम्मीदवार कुमार सर्वजीत ने जमीन पर मजबूत पकड़ बनाकर चुनाव लड़ा। गांव-गांव जाकर उन्होंने मतदाताओं से संपर्क किया, स्थानीय समस्याओं को समझा और उनके समाधान का वादा किया। स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क निर्माण, बेरोजगार युवाओं से जुड़े वादों ने लोगों पर असर डाला।
इसके साथ ही, तेजस्वी यादव की रैली और रोड शो ने भी माहौल को आरजेडी के पक्ष में मोड़ने में अहम भूमिका निभाई। युवाओं और पिछड़े वर्गों में सर्वजीत के समर्थन की खास वजह उनकी सरल छवि और तेजस्वी यादव के विकास के मुद्दों पर केंद्रित भाषण रहे।
लोजपा (रामविलास) को बड़ी झटका
चिराग पासवान की पार्टी इस बार कई सीटों पर दमदार प्रदर्शन कर रही है। ऐसे में बोध गया से मिली यह हार लोजपा के लिए एक झटका है। इस सीट पर चिराग पासवान ने कई बार कहा था कि उनकी पार्टी यहां से दमदार प्रदर्शन करेगी, लेकिन अंतिम राउंड में हवा आरजेडी के पक्ष में मुड़ गई। लोजपा प्रत्याशी अच्छी चुनौती देने के बावजूद जीत से कुछ सौ वोट दूर रह गए।
बोध गया से मिली इस जीत ने आरजेडी को राहत जरूर दी है, लेकिन बाकी सीटों की लड़ाई अभी जारी है। शुरुआती रुझानों में जहां एनडीए कई क्षेत्रों में मजबूत स्थिति में दिख रहा है, वहीं आरजेडी और महागठबंधन भी कुछ सीटों पर अच्छी टक्कर दे रहे हैं।तेजस्वी यादव के लिए यह जीत एक बड़ी राहत इसलिए भी है क्योंकि इससे पार्टी के भीतर भी उत्साह का संचार होता है। चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि जैसे-जैसे अंतिम परिणाम सामने आएंगे, तस्वीर और साफ होगी कि यह जीत महागठबंधन के लिए कितनी महत्वपूर्ण साबित होती है।