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11-Nov-2025 06:53 AM
By First Bihar
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे चुनावी मुकाबले में पुराने और नए चेहरों का दिलचस्प संगम देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 17वीं बिहार विधानसभा के 243 विधायकों में से करीब 79 फीसदी यानी 192 विधायक एक बार फिर से चुनावी मैदान में हैं। इन विधायकों को 18वीं विधानसभा के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों ने दोबारा मौका दिया है, जो इस बार के चुनावी परिदृश्य को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना रहा है।
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले विधायकों में सबसे ज्यादा 62 विधायक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हैं, जिन्हें दोबारा टिकट मिला है। इसके बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने 46, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने 41 और कांग्रेस ने 12 मौजूदा विधायकों को फिर से मैदान में उतारा है। वहीं, भाकपा (माले) के 11, हम सेक्युलर के 4 और सीपीआई व सीपीएम के 2-2 विधायकों को भी टिकट दिया गया है। इसके अलावा लोजपा (रा), एआईएमआईएम और आजाद समाज पार्टी (काशीराम) से एक-एक विधायक भी फिर से चुनावी जंग में हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इन 192 विधायकों में से कई ने इस बार दल बदलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वहीं, तीन विधायकों ने अपना विधानसभा क्षेत्र बदल लिया है, और किसी दल से टिकट न मिलने पर छह मौजूदा विधायक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 2020 में राजद से जीते 9 विधायक, जदयू के 4, कांग्रेस के 3, भाजपा के 2, और वीआईपी, एआईएमआईएम, बसपा एवं निर्दलीय जीते 1-1 विधायक ने भी इस बार पार्टी बदली है। दल-बदलने वालों में 5 जदयू से, 4 भाजपा से, 3 राजद से, 2 जनशक्ति जनता दल से, और 1-1 लोजपा (रा) तथा आजाद समाज पार्टी (काशीराम) से मैदान में हैं।
निर्दलीय उम्मीदवारों में बरबीघा से सुदर्शन कुमार, कहलगांव से पवन कुमार यादव, कसबा से मो. आफाक आलम, पारू से अशोक कुमार सिंह, गोपालपुर से नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल, और गोबिंदपुर से मो. कामरान प्रमुख नाम हैं। ये वे नेता हैं जिन्हें अपने दल से टिकट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने हार न मानते हुए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।
वहीं, विधानसभा क्षेत्र बदलकर चुनाव लड़ने वाले नेताओं में बड़े नाम शामिल हैं। इनमें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव, कुमार कृष्ण उर्फ सुदय यादव, और चेतन आनंद प्रमुख हैं। पिछली बार हसनपुर से राजद के टिकट पर जीतने वाले तेजप्रताप यादव इस बार महुआ से जनशक्ति जनता दल के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। वहीं, जहानाबाद के पूर्व विधायक सुदय यादव अब कुर्था से राजद के ही उम्मीदवार हैं, जबकि शिवहर से राजद विधायक रहे चेतन आनंद ने इस बार नवीनगर से जदयू का दामन थाम लिया है।
इस बार का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की होड़ नहीं, बल्कि राजनीतिक पुनर्संरेखण (political realignment) का भी संकेत देता है। भाजपा, राजद और जदयू जैसे प्रमुख दल अपने पुराने विधायकों पर भरोसा जता रहे हैं, जबकि छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार नई संभावनाओं की तलाश में हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पुराने चेहरों पर जनता फिर से विश्वास जताएगी या नए समीकरण बिहार की सियासत को नई दिशा देंगे।
दलवार सीटिंग विधायकों की संख्या
भाजपा – 62
राजद – 46
जदयू – 41
कांग्रेस – 12
भाकपा (माले) – 11
हम सेकुलर – 4
सीपीआई – 2
सीपीएम – 2
लोजपा (रा) – 1
एआईएमआईएम – 1
आजाद समाज पार्टी (काशीराम) – 1
निर्दलीय – 6
बिहार चुनाव 2025 का यह चरण न केवल दलों की रणनीतिक मजबूती का इम्तिहान है, बल्कि यह भी तय करेगा कि जनता किसे अपने क्षेत्र का सच्चा प्रतिनिधि मानती है पुराना चेहरा या नया विकल्प।