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10-Nov-2025 10:28 AM
By First Bihar
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर होगी। इस चरण के चुनाव प्रचार का आखिरी दिन रविवार को पूरे राज्य में गरमा-गरम रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अंतिम अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए जनसभाओं, रोडशो और रैलियों का सहारा लिया। मतदाताओं के दिल में अपनी छवि मजबूत करने के लिए नेताओं ने न केवल जमीन पर बल्कि हवाई अभियान के जरिए भी प्रचार किया।
चार दिनों तक चला यह प्रचार अभियान राज्य भर में ‘हेलीकॉप्टर युद्ध’ के रूप में सामने आया। कुल 82 हेलीकॉप्टर और 16 चार्टर्ड विमानों का इस्तेमाल हुआ, जिन्होंने मिलकर लगभग 310 घंटे की उड़ान भरी। हर हेलीकॉप्टर ने प्रतिदिन औसतन तीन से चार घंटे उड़ान भरी। कई बार एक ही हेलीकॉप्टर को एक दिन में तीन अलग-अलग जिलों में उतारा गया, जिससे एयरपोर्ट पर कई बार कतारें लग गईं। इस हवाई अभियान से चुनाव प्रचार की गति और पैठ दोनों में बढ़ोतरी हुई।
एनडीए ने इस चरण में अपनी पूरी ताकत झोंकी। कुल 61 हेलीकॉप्टर और कई चार्टर्ड विमान इस्तेमाल किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री लगातार रैलियों में उपस्थित रहे। एनडीए की रणनीति स्पष्ट थी—जितने अधिक क्षेत्रों में पहुंच, उतनी मजबूत पकड़। चार्टर्ड विमानों के जरिए नेताओं ने कम समय में ज्यादा जिलों को कवर किया।
महागठबंधन की ओर से कुल 21 हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल हुआ। कांग्रेस के राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अशोक गहलोत ने विभिन्न जिलों में सभाएं कीं। तेजस्वी यादव और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने भी कई जनसभाओं में हिस्सा लिया। हालांकि संख्या में महागठबंधन पीछे रहा, लेकिन उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा जैसे मुद्दों पर जोर दिया।
प्रचार के अंतिम दिन, पटना एयरपोर्ट से 21 हेलीकॉप्टर और 5 चार्टर्ड विमान उड़ान भरने के लिए तैयार थे। अमित शाह ने सासाराम और अरवल में जनसभाओं को संबोधित किया, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चटापुर, नरपतगंज, बिस्फी और सिकटी में रैलियों का नेतृत्व किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रोहतास और औरंगाबाद में अपनी सरकार के कामों का ब्योरा दिया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने किशनगंज और पूर्णिया में सीमांचल क्षेत्र के मतदाताओं से समर्थन मांगा और केंद्र सरकार पर सीधे हमला किया।
पहले चरण की तुलना में दूसरे चरण में प्रचार जमीन पर रैलियों से अधिक हवाई अभियानों पर निर्भर रहा। एनडीए ने संसाधनों और पहुंच का पूर्ण लाभ उठाया, जबकि महागठबंधन ने सीमित संसाधनों के बावजूद अधिक से अधिक जिलों को कवर करने की रणनीति अपनाई।
अब निर्णय का समय मतदाताओं के हाथ में है। 11 नवंबर को होने वाली वोटिंग न केवल दूसरे चरण के नतीजे तय करेगी, बल्कि यह राजनीतिक संतुलन और सत्ता समीकरण पर भी असर डालेगी। कई सीटों पर बहुकोणीय लड़ाई और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, जिससे बिहार विधानसभा चुनाव का रोमांच और बढ़ जाएगा।