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11-Sep-2025 04:43 PM
By First Bihar
SSC EXAM : यदि आप स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एसएससी ने अपनी परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। खासकर उन परीक्षाओं में, जो कई शिफ्टों में आयोजित की जाती हैं, अब उम्मीदवारों के अंकों का नॉर्मलाइजेशन इक्वीपरसेंटाइल (Equi-percentile) मेथड से किया जाएगा।
हर साल लाखों उम्मीदवार एसएससी की विभिन्न परीक्षाओं में शामिल होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को समायोजित करने के लिए परीक्षा को कई शिफ्टों में आयोजित करना पड़ता है। लेकिन अलग-अलग शिफ्टों में प्रश्नपत्र की कठिनाई का स्तर भिन्न हो सकता है। कभी एक शिफ्ट अपेक्षाकृत आसान होती है, तो दूसरी शिफ्ट कठिन निकल जाती है। ऐसे में सीधी तुलना करना निष्पक्ष नहीं होता।
यही कारण है कि अब तक आयोग नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया अपनाता रहा है। पहले के सिस्टम में उम्मीदवारों के अंक शिफ्ट के टॉप स्कोर, एवरेज स्कोर और अंक के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर एडजस्ट किए जाते थे। इस तरीके से कठिन शिफ्ट वाले उम्मीदवारों को नुकसान से बचाने की कोशिश की जाती थी। हालांकि, कई बार उम्मीदवारों ने इस पद्धति की पारदर्शिता और सटीकता पर सवाल उठाए।
इन सवालों और आलोचनाओं को देखते हुए अब आयोग ने नया तरीका लागू किया है। अब नॉर्मलाइजेशन पर्सेंटाइल बेस्ड एप्रोच पर होगा। इसे इक्वीपरसेंटाइल मेथड कहा जाता है। इस पद्धति में प्रत्येक शिफ्ट में उम्मीदवार का पर्सेंटाइल स्कोर तय किया जाएगा। उदाहरण के लिए—अगर किसी उम्मीदवार ने अपनी शिफ्ट में 80% परीक्षार्थियों से बेहतर प्रदर्शन किया है, तो उसकी रैंक और पर्सेंटाइल उसी आधार पर निर्धारित होगी। फिर उसका यह पर्सेंटाइल दूसरी शिफ्ट के उम्मीदवारों से तुलना करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
इसका फायदा यह होगा कि चाहे किसी शिफ्ट का प्रश्नपत्र कठिन हो या आसान, उम्मीदवार की स्थिति उसकी सापेक्ष (Relative) परफॉर्मेंस के हिसाब से तय होगी। यानी रॉ स्कोर में फर्क होने के बावजूद तुलना निष्पक्ष होगी।यह बदलाव परीक्षार्थियों के लिए काफी अहम है। नए सिस्टम से यह सुनिश्चित होगा कि अलग-अलग शिफ्ट की कठिनाई का असर रैंकिंग पर न पड़े। किसी भी शिफ्ट के उम्मीदवार को अनुचित लाभ या नुकसान न हो। सभी परीक्षार्थियों की तुलना एक ही स्केल पर हो सके। पारदर्शिता और निष्पक्षता दोनों बनी रहें।
आयोग ने साफ कहा है कि उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर देना उसकी प्राथमिकता है। इसलिए जरूरी है कि उनकी तुलना केवल रॉ स्कोर पर न होकर उनके सापेक्ष प्रदर्शन के आधार पर की जाए। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इक्वीपरसेंटाइल मेथड पहले से कहीं ज्यादा वैज्ञानिक और भरोसेमंद है। इस प्रणाली का उपयोग कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में भी किया जाता है। इससे उम्मीदवारों का विश्वास बढ़ेगा और विवाद की संभावना कम होगी।
एक शिक्षा विश्लेषक का कहना है—“अक्सर देखा गया है कि आसान शिफ्ट वाले छात्रों के अंक ऊंचे आते हैं और कठिन शिफ्ट वाले छात्रों को नुकसान झेलना पड़ता है। इक्वीपरसेंटाइल पद्धति इस समस्या को काफी हद तक हल कर देगी। अब सभी छात्रों की तुलना एक समान पैमाने पर होगी।” कई परीक्षार्थी इस बदलाव का स्वागत कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब उन्हें यह डर नहीं रहेगा कि उनकी शिफ्ट कठिन आने के कारण वे पीछे रह जाएंगे। हालांकि, कुछ छात्र यह भी मानते हैं कि नए सिस्टम को समझने और अपनाने में समय लगेगा।
एक अभ्यर्थी ने कहा “पहले हमें लगता था कि नॉर्मलाइजेशन से पारदर्शिता पूरी तरह नहीं रहती। लेकिन अब पर्सेंटाइल के आधार पर तुलना होगी तो हम आश्वस्त रहेंगे कि मेहनत का सही मूल्यांकन हो रहा है।” स्टाफ सिलेक्शन कमीशन का यह कदम न सिर्फ उम्मीदवारों के लिए राहत की खबर है, बल्कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार भी है। माना जा रहा है कि इससे एसएससी परीक्षाओं पर छात्रों का भरोसा और मजबूत होगा।
अब देखना यह होगा कि इस नए बदलाव को लागू करने के बाद नतीजों पर इसका क्या असर पड़ता है और उम्मीदवार इसे कितना सहज पाते हैं। लेकिन इतना तय है कि आयोग का यह फैसला आने वाले समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।