ब्रेकिंग न्यूज़

बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में गोपालगंज के कृष्णा ने हासिल किया 9वां रैंक, 482 अंकों के साथ बने जिला टॉपर; पिता हैं सिक्योरिटी गार्ड बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में गोपालगंज के कृष्णा ने हासिल किया 9वां रैंक, 482 अंकों के साथ बने जिला टॉपर; पिता हैं सिक्योरिटी गार्ड 1 अप्रैल से लागू नया टैक्स कानून, सैलरी वालों के लिए बड़ा झटका या राहत? HRA से लेकर Education Allowance तक के बदले नियम बिहार बोर्ड मैट्रिक रिजल्ट 2026: स्क्रूटिनी और विशेष परीक्षा के लिए छात्रों को मौका, इस दिन से करें आवेदन बिहार बोर्ड मैट्रिक रिजल्ट 2026: स्क्रूटिनी और विशेष परीक्षा के लिए छात्रों को मौका, इस दिन से करें आवेदन वैशाली की सबरीन परवीन बनीं बिहार टॉपर, मैट्रिक में 98.4% अंक के साथ रचा इतिहास फिर बदलने वाला है बिहार का मौसम, IMD ने जारी किया अलर्ट; कई जिलों में तेज हवा और बारिश की संभावना फिर बदलने वाला है बिहार का मौसम, IMD ने जारी किया अलर्ट; कई जिलों में तेज हवा और बारिश की संभावना Bihar Board : बिहार बोर्ड 10वीं रिजल्ट 2026 जारी: डिजिलॉकर पर ऐसे मिनटों में देखें मैट्रिक मार्कशीट, जानें पूरा तरीका बिहार बोर्ड परीक्षा में टॉपर्स फैक्ट्री ने किया कमबैक, टॉप 10 की लिस्ट में स्टेट टॉपर पुष्पांजलि समेत तीन स्टूडेंट

Home / bihar / सुप्रीम कोर्ट के रोक के बावजूद बिहार के इस यूनिवर्सिटी ने लागू कर...

सुप्रीम कोर्ट के रोक के बावजूद बिहार के इस यूनिवर्सिटी ने लागू कर दिया UGC के नए नियम, विरोध के बाद कुलपति ने उठाया यह कदम

UGC rules controversy: सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद बिहार के तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी में यूजीसी के नए नियम लागू कर दिया गया, हालांकि विवाद बढ़ा तो कुलपति ने आदेश को वापस ले लिया.

04-Feb-2026 03:21 PM

By FIRST BIHAR

UGC rules controversy: बिहार की तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी (TMU) में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियम लागू करने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। TMU प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद विश्वविद्यालय में यूजीसी के नियम लागू कर दिए और छात्र शिकायत निवारण कोषांग के गठन का आदेश जारी कर दिया हालांकि, इस आदेश पर विवाद उठने के बाद कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आदेश वापस ले लिया।


छात्रों की शिकायत निवारण कमिटी के गठन के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इसका विरोध किया। छात्र संगठन ने इस आदेश जारी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग विश्वविद्यालय प्रशासन से की और आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के बीच जातीय भेदभाव फैलाने की साजिश कर रहा है।


कुलपति ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कुलसचिव डॉ. रामाशीष पूर्वे को आदेश वापस लेने और शो- कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। कुलपति ने स्पष्ट किया कि उनके आदेश के बिना कमिटी गठन की अधिसूचना जारी की गई थी।


यूजीसी ने पिछले महीने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ भेदभाव रोकने के लिए नए नियम लागू किए थे। इसके तहत छात्र शिकायत निवारण कमिटी का गठन अनिवार्य किया गया था। हालांकि, सवर्ण वर्ग के छात्रों ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए विरोध जताया और कहा कि इससे सवर्ण छात्रों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है।


बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और शीर्ष अदालत ने यूजीसी के नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने सरकार और यूजीसी से स्पष्टीकरण मांगा है और तब तक विश्वविद्यालयों में यूजीसी के नए नियम लागू नहीं किए जा सकते।