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22-Mar-2026 10:15 AM
By First Bihar
Bihar News : बिहार के सीवान जिले में स्कूली छात्रों के हक के अनाज में गड़बड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानमंत्री पोषण योजना (मिड-डे मील) के तहत मिलने वाले खाद्यान्न और राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। इस मामले के उजागर होने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए करीब 200 प्रधानाध्यापकों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों से दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
दरअसल, विभागीय जांच के दौरान यह पाया गया कि कई विद्यालयों ने ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज वास्तविक छात्र संख्या से अधिक नामांकन ‘प्रपत्र क’ में दर्शाया है। यह अंतर इतना अधिक था कि अधिकारियों को वित्तीय अनियमितता की आशंका हुई। प्राथमिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि कुछ स्कूलों द्वारा जानबूझकर छात्रों की संख्या बढ़ाकर दिखाई गई, ताकि अधिक मात्रा में खाद्यान्न और सरकारी फंड प्राप्त किया जा सके।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) ने इसे गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता करार दिया है। उन्होंने सभी संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे दो दिनों के भीतर यह बताएं कि किन परिस्थितियों में वास्तविक संख्या से अधिक छात्रों को लाभार्थी सूची में शामिल किया गया। डीपीओ ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग में डेटा प्रबंधन और निगरानी प्रणाली की कमजोरियों को भी उजागर किया है। ई-शिक्षाकोष पोर्टल, जिसे पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है, उसके आंकड़ों और स्कूलों द्वारा भेजे गए प्रपत्रों में इतना बड़ा अंतर होना कई सवाल खड़े करता है। विभाग का मानना है कि यदि समय रहते इस गड़बड़ी का पता नहीं चलता, तो सरकारी योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर संसाधनों का दुरुपयोग होता रहता।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रखंड स्तर पर भी सख्ती बढ़ा दी है। सभी प्रखंड साधन सेवियों (BRC) और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को निर्देश दिया गया है कि वे एमआईएस (मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) और ई-शिक्षाकोष के आंकड़ों का शत-प्रतिशत मिलान सुनिश्चित करें। साथ ही, भविष्य में किसी भी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर तत्काल रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगे से पीएम पोषण योजना का संचालन केवल ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर ही किया जाएगा। इससे फर्जी नामांकन और आंकड़ों में हेरफेर की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकेगा। इसके अलावा, विभाग द्वारा समय-समय पर औचक निरीक्षण भी किए जाएंगे, ताकि योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
इस घटना ने न केवल प्रशासन को सतर्क किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तकनीकी सिस्टम के साथ-साथ मानवीय जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। अब देखना यह होगा कि संबंधित प्रधानाध्यापक अपने जवाब में क्या सफाई देते हैं और विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।