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11-Oct-2025 04:47 PM
By First Bihar
BIHAR NEWS : सारण जिले के दिघवारा प्रखंड के अकिलपुर पंचायत के रामदास चक बिंदटोलिया गांव में शनिवार को गंगा नदी में नहाने गई चार बच्चियों के डूबने की घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया। हादसे में तीन बच्चियों की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल है और उसका इलाज चल रहा है। यह एक दुखद घटना है जिसने ग्रामीणों में भारी मातम फैला दिया है।
घटना की जानकारी के अनुसार, भुलेटन महतो की पुत्रियां 11 वर्षीय गुंजन कुमारी, 9 वर्षीय सपना कुमारी और 7 वर्षीय तुरनी कुमारी शनिवार दोपहर को घर से नदी में नहाने गई थीं। उनके साथ लखमुनि कुमारी (पिता रामनाथ महतो) भी थी। चारों बच्चियां नदी में स्नान कर रही थीं, तभी गहरे पानी में जाने के कारण अचानक डूबने लगीं। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन तब तक तीन सगी बहनों की मौत हो चुकी थी।
घायलों में शामिल लखमुनि कुमारी को स्थानीय लोगों की मदद से पतलापुर बाजार स्थित एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। मृत बच्चियों के परिजन रो-रोकर बेहाल हैं और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। घटना की सूचना पाकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी तट पर सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है। उनका कहना है कि नदी में स्नान के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए उचित उपाय किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके। इस हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गहरी और तेज बहाव वाली नदियों में बच्चों के लिए सुरक्षा बेहद जरूरी है।
स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों को सचेत रहने और बच्चों को अकेले नदी में नहाने नहीं जाने की सलाह दी है। इस घटना ने क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह घटना चेतावनी स्वरूप है। ग्रामीण अब सरकार और स्थानीय प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि नदी तट पर नियमित निगरानी और बचाव के लिए उचित व्यवस्था की जाए। ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को इसी तरह का दुख सहना न पड़े।
इस दर्दनाक हादसे ने लोगों को यह याद दिलाया कि पानी के आसपास बच्चों की निगरानी करना और सुरक्षित स्थान पर खेलने की सुविधा प्रदान करना आवश्यक है। घटना के बाद पूरे गांव में मातम छा गया है और लोग मृतक बच्चियों के परिवारों के साथ संवेदना प्रकट कर रहे हैं। घटना की जांच के साथ-साथ प्रशासन इस ओर भी ध्यान दे रहा है कि गंगा नदी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थायी उपाय किए जाएं। वहीं ग्रामीण भी सतर्क हैं और चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचाव के लिए सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए जाएं। यह हादसा न केवल तीन मासूम बहनों की मौत का कारण बना, बल्कि पूरे इलाके में चेतावनी और सुरक्षा की आवश्यकता को भी उजागर कर गया है।