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31-Jan-2026 11:47 AM
By RITESH HUNNY
Bihar News: बिहार के सहरसा जिले में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले नियोजित शिक्षकों पर निगरानी विभाग का शिकंजा कसता जा रहा है। ताजा मामला सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड का है, जहां तीन नियोजित शिक्षकों की इंटरमीडिएट की मार्कशीट जांच में फर्जी पाई गई है।
पटना से आए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के आदेश के बाद बलवाहाट थाने में इन तीन शिक्षकों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्जकर ली गई है। पटना हाईकोर्ट के द्वारा पारित आदेश के आलोक में वर्ष 2006 से 2015 तक नियुक्त हुए शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जाँच की जा रही थी।
इसी क्रम में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से इन शिक्षकों के इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया। जाँच रिपोर्ट आई तो विभाग के होश उड़ गए। तीनों शिक्षकों द्वारा नौकरी के समय जमा किए गए अंक पत्र और बोर्ड के मूल टेबुलेशन रजिस्टर में भारी अंतर पाया गया।
निगरानी जाँच में पाया गया कि शिक्षिका कान्ति कुमारी ने नौकरी पाने के लिए अपने आवेदन में इंटर का प्राप्तांक 600 और फर्स्ट डिवीजन दिखाया था, साथ ही रोल नंबर में भी हेराफेरी की थी। जबकि बोर्ड की जाँच में उनका असली प्राप्तांक 595 पाया गया और रोल नंबर भी भिन्न था।
शिक्षक राजेश ठाकुर ने अपने आवेदन में कुल अंक 570 और फर्स्ट डिवीजन का दावा किया था। लेकिन जब बोर्ड ने फाइल खंगाली, तो उनका असली प्राप्तांक 565 निकला। यानी नंबर बढ़ाकर नौकरी हथियाने का खेल खेला गया।
इसी तरह, शिक्षक मदन ठाकुर ने भी अपने आवेदन में 568 अंक दिखाए थे, जबकि सत्यापन में उनके अंक 564 ही पाए गए। साथ ही 'रिमार्क्स' कॉलम में भी भिन्नता पाई गई। निगरानी विभाग, पटना के पुलिस निरीक्षक के लिखित आवेदन पर बलवाहाट थाने में सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्जकर लिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद से जिले के उन अन्य शिक्षकों में हड़कंप मच गया है, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी प्राप्त की है। निगरानी विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि एक-एक प्रमाण पत्र की बारीकी से जाँच हो रही है और दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।