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13-Feb-2026 02:28 PM
By First Bihar
New PMO India : देश की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। दोपहर करीब 1:30 बजे प्रधानमंत्री ने इस नए भवन परिसर के नाम का अनावरण किया और इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय आधिकारिक तौर पर इस नए परिसर में स्थानांतरित हो गए।
सरकार के अनुसार, यह कदम केवल कार्यालय बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक, प्रभावी और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। वर्ष 2014 के बाद केंद्र सरकार लगातार औपनिवेशिक दौर के प्रतीकों को बदलकर भारतीय परंपरा और आधुनिक सोच के अनुरूप नई पहचान देने का प्रयास कर रही है।
इसी क्रम में सरकार ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ऐतिहासिक राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया गया, वहीं प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास रेस कोर्स रोड से बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया। इसके अलावा सेंट्रल सचिवालय का नाम कर्तव्य भवन रखा गया, जबकि कई राजभवनों को लोक भवन या लोक निवास नाम दिया गया है।
पुराने भवनों की जगह आधुनिक व्यवस्था
केंद्र सरकार के कई मंत्रालय और कार्यालय लंबे समय तक सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग और पुराने भवनों में संचालित होते रहे। इन भवनों की जर्जर स्थिति, अलग-अलग स्थानों पर कार्यालय होने और समन्वय की कमी के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता था। रखरखाव लागत बढ़ रही थी और कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण भी नहीं मिल पा रहा था।
नए ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया गया है। अब प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय को एक ही परिसर में स्थापित किया गया है, जिससे मंत्रालयों के बीच तालमेल बेहतर होगा और प्रशासनिक निर्णयों की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
1910 से 1930 के बीच निर्मित नॉर्थ और साउथ ब्लॉक ब्रिटिश कालीन वास्तुकला का प्रमुख उदाहरण रहे हैं। ऊंचे स्तंभ, विशाल गुंबद, मेहराब और लाल-बफ सैंडस्टोन से बने ये भवन उस दौर की भव्यता के प्रतीक थे। हालांकि, इन भवनों में औपनिवेशिक शासन की झलक भी दिखाई देती थी, जहां प्रशासन आम जनता से कुछ हद तक दूर नजर आता था।
‘सेवा तीर्थ’ में क्या होगा खास
नए कर्तव्य भवन-1 और 2 सहित पूरे ‘सेवा तीर्थ’ परिसर को अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों से लैस किया गया है। यहां ओपन फ्लोर ऑफिस, सेंट्रलाइज्ड रिसेप्शन और जनता से सीधे संपर्क के लिए सार्वजनिक क्षेत्र बनाए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय, तेज निर्णय प्रक्रिया और नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी।
यह भवन 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें सौर ऊर्जा जैसी रिन्यूएबल एनर्जी प्रणाली, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा दक्ष निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया है। इससे पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के साथ-साथ कार्य गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से भी इस परिसर में स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, आधुनिक सर्विलांस नेटवर्क और एडवांस इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे अधिकारियों और आगंतुकों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा।
भारतीय पहचान के साथ आधुनिक डिजाइन
नया प्रधानमंत्री कार्यालय ओपन प्लान मॉडल पर आधारित है, जहां बंद कमरों की जगह खुले और आपस में जुड़े कार्यक्षेत्र बनाए गए हैं। इससे अधिकारियों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री के निजी कक्ष और अंतरराष्ट्रीय बैठकों के लिए अत्याधुनिक सम्मेलन कक्ष भी तैयार किए गए हैं।
इस भवन की खासियत यह भी है कि इसमें आधुनिक वास्तुकला के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई देती है। पारंपरिक भारतीय डिजाइन और आधुनिक सोच के समन्वय के साथ तैयार ‘सेवा तीर्थ’ प्रशासनिक व्यवस्था में नए युग की शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।सरकार का मानना है कि यह परिवर्तन केवल भवन परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन प्रणाली में पारदर्शिता, दक्षता और जनता से जुड़ाव को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।