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17-Dec-2025 08:16 AM
By First Bihar
Bhai Virendra MLA : एक दलित सरकारी कर्मचारी को अपमानित करने और धमकी देने के आरोप से जुड़े मामले में मनेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भाई वीरेंद्र की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस मामले की सुनवाई अब सांसदों और विधायकों के मामलों के लिए गठित विशेष अदालत (एमपी-एमएलए कोर्ट) में होगी। इससे पहले यह मामला एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष अदालत में विचाराधीन था।
मामले के अनुसार, हरिजन थाना पुलिस ने 28 नवंबर को इस प्रकरण में अपना आरोप पत्र एससी/एसटी अदालत के विशेष न्यायाधीश पंकज चौहान की अदालत में दाखिल किया था। आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए विशेष न्यायाधीश पंकज चौहान ने यह आदेश पारित किया कि चूंकि आरोपी एक वर्तमान विधायक हैं, इसलिए इस मुकदमे की सुनवाई सांसदों एवं विधायकों के मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत में की जानी चाहिए। इसके तहत यह मामला एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश धनंजय कुमार मिश्रा को सौंप दिया गया है।
पूरा मामला पटना जिले के मनेर प्रखंड से जुड़ा हुआ है। 28 जुलाई 2025 को मनेर प्रखंड की सराय पंचायत में पदस्थापित पंचायत सचिव संदीप कुमार ने पटना के हरिजन थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर हरिजन थाना कांड संख्या 47/2025 दर्ज किया गया। परिवादी संदीप कुमार ने अपने आवेदन में आरोप लगाया कि 26 जुलाई 2025 को मनेर विधायक भाई वीरेंद्र ने उन्हें फोन पर धमकी दी और जातिसूचक व अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया।
परिवादी के अनुसार, वह एक दलित समुदाय से आते हैं और सरकारी सेवा में पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक द्वारा उन्हें न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि पद और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर डराने-धमकाने की कोशिश भी की गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि इस घटना से उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा और उनकी सामाजिक गरिमा को ठेस लगी।
शिकायत दर्ज होने के बाद हरिजन थाना पुलिस ने मामले की विधिवत जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने परिवादी का बयान दर्ज किया, कॉल डिटेल्स और अन्य साक्ष्यों को खंगाला तथा संबंधित पक्षों से पूछताछ की। अनुसंधान पूरा होने के बाद पुलिस ने आरोप सही पाए जाने पर एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया।
अब यह मामला एमपी-एमएलए कोर्ट में जाने के बाद और अधिक अहम हो गया है, क्योंकि इस अदालत का गठन ही जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए किया गया है। ऐसे मामलों में अदालत की कोशिश रहती है कि सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो और कानून के अनुसार शीघ्र निर्णय लिया जा सके। अदालत में अगली तारीख पर इस मामले में संज्ञान और आगे की कार्यवाही को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
विधायक भाई वीरेंद्र बिहार की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं और मनेर विधानसभा क्षेत्र से वे कई बार विधायक रह चुके हैं। ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह के आरोप और मुकदमे का एमपी-एमएलए कोर्ट में जाना राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर पहले ही सवाल उठाते रहे हैं, वहीं सत्ताधारी पक्ष की ओर से इस पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में अदालतें काफी सख्ती बरतती हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषसिद्धि की स्थिति में सजा का प्रावधान भी कड़ा है। वहीं, बचाव पक्ष को भी अदालत में अपनी बात रखने और साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलेगा।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर सभी की नजरें एमपी-एमएलए कोर्ट की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई से यह तय होगा कि इस प्रकरण में आगे क्या रुख अपनाया जाता है और न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।